सड़े दरवाजे, खराब मोटर-नल और रोशनी का अभाव; रोजाना सैकड़ों यात्रियों को परेशानी, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
जगन्नाथपुर। जगन्नाथपुर चौक स्थित सुलभ शौचालय जर्जर अवस्था में है। टूटे दरवाजे, खराब मोटर-नल, पानी की समस्या और बिजली व रोशनी की कमी के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं को होती है, क्योंकि दरवाजे नीचे से सड़कर टूट चुके हैं, जिससे शौचालय के भीतर निजता और सम्मान बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

दरवाजे टूटे, बुनियादी सुविधाएं ठप
शौचालय के अधिकांश दरवाजे नीचे से सड़कर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा पानी की मोटर और नल भी खराब पड़े हैं। पानी की अनियमित उपलब्धता से शौचालय के इस्तेमाल में परेशानी होती है। बिजली और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से इसकी स्थिति और भी असुविधाजनक हो गई है।
सफाई बेहतर, लेकिन मरम्मत जरूरी
शौचालय के केयरटेकर द्वारा साफ-सफाई का बेहतर ध्यान रखा जाता है। हालांकि, केवल सफाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। क्षतिग्रस्त दरवाजों को बदलने, मोटर और नलों की मरम्मत तथा पानी और बिजली की व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता है।

रोजाना सैकड़ों यात्रियों का आवागमन
जगन्नाथपुर चौक पर यात्री बसों से प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते-जाते हैं। इनमें कई यात्री इस शौचालय का उपयोग करते हैं। ऐसे व्यस्त स्थान पर सार्वजनिक शौचालय की बदहाली यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय की उपलब्धता विशेष रूप से जरूरी है।

नेताओं की आवाजाही, फिर भी पहल नहीं
चौक पर विधायक समेत विभिन्न राजनीतिक संगठनों के बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा रहता है। इसके बावजूद शौचालय की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए ठोस पहल नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी इस समस्या के समाधान की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा?

तत्काल जीर्णोद्धार की मांग
स्थानीय स्तर पर इस शौचालय की मरम्मत कराकर इसे उपयोग के योग्य बनाने की जरूरत है। संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को टूटे दरवाजों, खराब मोटर-नलों, पानी की किल्लत तथा बिजली-रोशनी की समस्या दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा की बदहाली को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर कब तक कार्रवाई करते हैं और आम लोगों को कब राहत मिलती है।










