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सेल किरीबुरू में सुरक्षा के नाम पर मोबाइल पाबंदी पर यूनियनों का हल्लाबोल, अस्पताल की बदहाली पर प्रबंधन घिरा

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130% उत्पादन देने वाली खदान के कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं? ED Mines के सामने यूनियनों ने उठाए तीखे सवाल

हिलटॉप प्रशिक्षण केंद्र की बैठक में मोबाइल प्रतिबंध का विरोध, कार्यस्थल पर इस्तेमाल रोकने पर बनी सहमति; मेडिकल मुद्दे पर प्रबंधन के जवाब से असंतुष्ट यूनियनों ने दी बड़े फैसले की चेतावनी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू। झारखंड खान समूह के अंतर्गत किरीबुरू खदान में 23 अक्टूबर 2026 को हिलटॉप स्थित प्रशिक्षण केंद्र में खदान की संयुक्त यूनियनों के साथ आयोजित बैठक में सुरक्षा, मोबाइल फोन के इस्तेमाल, अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था और कर्मचारियों के मेडिकल अधिकारों को लेकर जमकर सवाल उठे। बैठक में ED Mines श्री विकास मानवटी ने CMD के साथ हुई बैठक में चर्चा किए गए विषयों की जानकारी दी। लेकिन सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े कई सवालों पर प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से यूनियन प्रतिनिधियों में नाराजगी देखने को मिली।

बैठक में मोबाइल फोन को लेकर प्रस्तावित पाबंदी पर यूनियनों ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर काम के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक उचित है, लेकिन खदान परिसर में मोबाइल फोन लेकर आने पर पूर्ण प्रतिबंध स्वीकार्य नहीं है। वहीं, किरीबुरू अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यूनियनों ने कहा कि कर्मचारियों से बेहतर उत्पादन की अपेक्षा रखने वाले सेल प्रबंधन को उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध का विरोध, काम के दौरान इस्तेमाल पर रोक

बैठक में एक प्लांट में हुई दुर्घटना के संदर्भ में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन लेकर आने पर प्रतिबंध लगाने की बात रखी गई। इस प्रस्ताव पर उपस्थित यूनियन प्रतिनिधियों ने विरोध जताया। यूनियनों का कहना था कि सुरक्षा की दृष्टि से कार्यस्थल पर काम करते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल रोकना जरूरी है, लेकिन मोबाइल फोन को खदान परिसर में ही प्रतिबंधित कर देना व्यावहारिक समाधान नहीं है।

लंबी चर्चा के बाद बीच का रास्ता निकाला गया। तय हुआ कि कार्य के दौरान ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन शिफ्ट इंचार्ज अथवा सुपरवाइजर के पास जमा रहेंगे और काम समाप्त होने के बाद उन्हें वापस कर दिए जाएंगे। मोबाइल फोन लेकर आने की अनुमति रहेगी, लेकिन काम के दौरान उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था को लागू कराने और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्षों को देने की बात कही गई। हालांकि, बैठक में यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहा कि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल मोबाइल फोन पर नियंत्रण पर्याप्त है या कार्यस्थल की दूसरी सुरक्षा खामियों पर भी समान गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा।

सुरक्षा बैठक में सुरक्षा कमेटी और अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर सवाल

बैठक के दौरान सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए। लेकिन यूनियन प्रतिनिधियों ने सुरक्षा कमेटी और सुरक्षा अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जब बैठक का मुख्य विषय ही सुरक्षा है, तो संबंधित अधिकारियों और सुरक्षा कमेटी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी क्यों नहीं थी?

यूनियनों ने यह भी सवाल उठाया कि पीट सुरक्षा कमेटी की बैठकों में किन विषयों पर चर्चा होती है, क्या निर्णय लिए जाते हैं और उन निर्णयों को धरातल पर कितना लागू किया जाता है—इसकी जानकारी कर्मचारियों और यूनियनों को नियमित रूप से क्यों नहीं मिलती?

सुरक्षा के नाम पर नियम लागू करने की पहल तो की जा रही है, लेकिन सुरक्षा से जुड़े फैसलों, उनकी समीक्षा और जवाबदेही की जानकारी भी पारदर्शी होनी चाहिए। यूनियनों का कहना था कि सुरक्षा संबंधी सवालों पर स्पष्ट जवाब और ठोस कार्ययोजना की जरूरत है। बैठक में उठाए गए कई सवालों पर प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का आरोप भी लगाया गया।

किरीबुरू अस्पताल की व्यवस्था पर यूनियनों का तीखा हमला

बैठक का सबसे गंभीर मुद्दा सेल किरीबुरू अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था रहा। कर्मचारियों और उनके परिजनों को समुचित इलाज मिलने में आ रही परेशानियों को लेकर यूनियन प्रतिनिधियों ने प्रबंधन से जवाब मांगा। आरोप लगाया गया कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी, आवश्यक मशीनों और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता जैसे सवाल लंबे समय से कर्मचारियों को परेशान कर रहे हैं।

यूनियनों ने सवाल उठाया कि जब सेल प्रबंधन का कहना है कि जहां डॉक्टरों की कमी हो या आवश्यक मशीनें उपलब्ध नहीं हों, वहां कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जाना चाहिए, तो किरीबुरू अस्पताल में इस व्यवस्था का प्रभावी पालन क्यों नहीं हो रहा है?

बैठक में चिकित्सा सुविधाओं को लेकर स्पष्ट और ठोस समाधान सामने नहीं आने से यूनियन प्रतिनिधियों की नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना था कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को टालने के बजाय अस्पताल की कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कदम उठाए जाने चाहिए।

अपने खर्च पर बाहर इलाज कराएं कर्मचारी, बाद में प्रतिपूर्ति का भरोसा

मेडिकल सुविधा के सवाल पर ED Mines ने कहा कि कर्मचारी बाहर इलाज करा सकते हैं और बाद में सेल के नियमों के अनुसार चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति की जा सकती है। हालांकि, इस जवाब से यूनियन प्रतिनिधि संतुष्ट नहीं हुए।

यूनियनों ने सवाल उठाया कि यदि पहले कर्मचारियों को बाहर इलाज कराने की सुविधा मिलती रही है, तो अब इस मामले में परेशानी क्यों हो रही है? कर्मचारियों को अपने और अपने परिवार के इलाज के लिए पहले अपनी जेब से खर्च करने की नौबत क्यों आए, जबकि सेल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह उपलब्ध नियमों के अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करे?

यूनियन प्रतिनिधियों का कहना था कि प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया, पात्रता और भुगतान को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को इलाज के दौरान आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

दिल्ली हाईकोर्ट और CAT रांची के आदेश का हवाला, मेडिकल अधिकारों पर बहस

बैठक में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू की ओर से चिकित्सा खर्च से जुड़े मामले में देवेन्द्र स्वरूप खरे बनाम बोकारो स्टील प्लांट से संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), रांची के आदेश की लिखित प्रति सौंपे जाने की बात सामने आई।

संघ की ओर से मेडिकल लाभ को कर्मचारियों के महत्वपूर्ण अधिकार से जोड़ते हुए प्रबंधन से चिकित्सा संबंधी नियमों और न्यायिक आदेशों के अनुरूप कार्रवाई की मांग की गई। संघ का तर्क था कि कर्मचारियों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में प्रबंधन को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

हालांकि, प्रस्तुत आदेश के सटीक निर्देशों, उनकी लागू होने की सीमा और संबंधित कर्मचारियों पर उनकी कानूनी प्रयोज्यता का निर्धारण आदेश की प्रमाणित प्रति और मामले के तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। यूनियन ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए सेल प्रबंधन से किरीबुरू अस्पताल की व्यवस्था में सुधार करने और कर्मचारियों की चिकित्सा संबंधी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।

130 प्रतिशत उत्पादन का दावा, फिर कर्मचारियों को सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों?

यूनियन प्रतिनिधियों ने किरीबुरू खदान के उत्पादन का हवाला देते हुए कहा कि खदान ने 130 प्रतिशत उत्पादन कर रिकॉर्ड बनाया है, जबकि कर्मचारियों को जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उनका कहना था कि कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए उत्पादन में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए।

यूनियनों ने सवाल उठाया कि यदि कर्मचारियों से उत्पादन के लक्ष्य हासिल करने की अपेक्षा की जाती है, तो अस्पताल की कमियों को दूर करने और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए उसी स्तर की तत्परता क्यों नहीं दिखाई जा रही है?

यूनियनों का स्पष्ट संदेश था कि उत्पादन और कर्मचारी कल्याण को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा नहीं किया जा सकता। सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर अस्पताल और समय पर इलाज कर्मचारियों के हितों से जुड़े बुनियादी विषय हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मेडिकल मुद्दे को NJCS पर डालने की कोशिश का विरोध

बैठक में ED Mines की ओर से चिकित्सा संबंधी मुद्दे को NJCS के स्तर पर उठाए जाने की बात भी सामने आई। इस पर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू के महामंत्री ने सवाल उठाया कि जब खदानों की समस्याओं और मांगों का प्रतिनिधित्व NJCS में प्रभावी रूप से नहीं है, तो किरीबुरू खदान की विशिष्ट समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी केवल उसी मंच पर क्यों छोड़ी जाए?

संघ की ओर से कहा गया कि NJCS में खदानों से संबंधित मांगें उठाई गई हैं और कई मुद्दों पर चर्चा भी हुई है, लेकिन कर्मचारियों को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए हैं। यूनियनों का तर्क था कि किरीबुरू अस्पताल की स्थानीय समस्याओं का समाधान करने के लिए स्थानीय प्रबंधन को भी ठोस पहल करनी चाहिए।

बैठक खत्म, लेकिन नाराजगी बरकरार; आगे के फैसले पर नजर

बैठक में सुरक्षा, मोबाइल फोन के इस्तेमाल, अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और कर्मचारियों के मेडिकल लाभ सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। मोबाइल फोन को लेकर कार्यस्थल पर इस्तेमाल रोकने की व्यवस्था पर सहमति बनने के बावजूद चिकित्सा सुविधाओं के मुद्दे पर यूनियनों की नाराजगी दूर नहीं हुई।

बैठक से बाहर निकलने के बाद विभिन्न यूनियन प्रतिनिधियों ने अपनी असंतुष्टि जाहिर की। उनका कहना था कि अस्पताल की समस्याओं से कर्मचारी और उनके परिजन परेशान हैं, इसलिए प्रबंधन को अब केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस सुधार दिखाना होगा।

यूनियनों ने संकेत दिया कि मेडिकल मुद्दे पर आने वाले दिनों में वे सामूहिक रूप से कोई बड़ा निर्णय ले सकती हैं। हालांकि, किसी आंदोलन या कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सेल प्रबंधन किरीबुरू अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था सुधारने, सुरक्षा कमेटी को प्रभावी बनाने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। यदि कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान समय रहते नहीं हुआ, तो इसका असर औद्योगिक संबंधों और भविष्य में उत्पादन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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