2022 में पूरी होनी थी योजना, अब जांच की मांग तेज; भारत आदिवासी पार्टी ने संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की उठाई मांग
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम। जिला मुख्यालय चाईबासा सदर प्रखंड की हारिला पंचायत अंतर्गत ग्राम गितिलपी में DMFT मद से निर्मित होने वाली जलमीनार की योजना निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद अधूरी बताई जा रही है। ग्रामीणों को घर-घर नल से पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
भारत आदिवासी पार्टी, पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने योजना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा लापरवाही या अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन से निर्माण कार्य जल्द पूरा कराकर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

2019 में हुआ एकरारनामा, 2022 थी अंतिम समय सीमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम गितिलपी की जलमीनार योजना ESR No. 3 के अंतर्गत आती है। इसका एकरारनामा 12 फरवरी 2019 को किया गया था और कार्य पूरा करने की निर्धारित तिथि 11 फरवरी 2022 थी।
योजना का कार्य M/S Shriram EPC Limited, Chennai द्वारा किया जा रहा है।
योजना का प्रमुख विवरण इस प्रकार है:
- क्षमता: 3.60 लाख लीटर
- स्टेजिंग की ऊंचाई: 18 मीटर
- एकरारनामा: 12 फरवरी 2019
- निर्धारित पूर्णता तिथि: 11 फरवरी 2022
- कार्यकारी कंपनी: M/S Shriram EPC Limited, Chennai
निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा रहने से योजना के क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, निर्माण में देरी के वास्तविक कारणों और वर्तमान कार्य-प्रगति की आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
DMFT की राशि, भुगतान और निर्माण की स्थिति की हो जांच
सुशील बारला ने मांग की है कि जांच के दौरान योजना की स्वीकृत राशि, संवेदक को किए गए भुगतान और मौके पर हुए निर्माण कार्य का मिलान किया जाए। साथ ही, तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण हुआ है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में संवेदक अथवा संबंधित अधिकारियों की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो।
पेयजल योजना अधूरी, ग्रामीणों को लाभ मिलने पर सवाल
जलमीनार का उद्देश्य ग्रामीणों तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाना है। लेकिन निर्माण पूरा नहीं होने की स्थिति में योजना का अपेक्षित लाभ मिलने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सवाल यह है कि 11 फरवरी 2022 तक पूरी होनी वाली योजना अब तक अधूरी क्यों है, इस पर कितना खर्च हुआ है और शेष काम कब तक पूरा होगा? संबंधित विभाग को इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि योजना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सरकार और जिला प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग
सुशील बारला ने झारखंड सरकार और पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन से ग्राम गितिलपी की जलमीनार योजना की निष्पक्ष जांच कराने तथा निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण तरीके से जल्द पूरा कराने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि भारत आदिवासी पार्टी विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी। DMFT मद से संचालित योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल सके।
अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पर हैं कि वे योजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए जांच और निर्माण पूरा कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।









