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मुख्य चोर की गिरफ्तारी और जेल जाने के एक महीने बाद भी करीब 10 लाख के जेवरात, लैपटॉप व मोबाइल बरामद नहीं; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल

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सेल अधिकारी के घर हुईं चोरी का माल कहां है? पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू में चोरी की घटनाओं ने लोगों की नींद उड़ा रखी थी। सबसे गंभीर मामला SAIL अधिकारी राहुल यादव के घर हुई करीब 10 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात, लैपटॉप, मोबाइल और अन्य सामान की चोरी का है। इस मामले में मुख्य आरोपी अफताब उर्फ ‘टेंगर’ की गिरफ्तारी हो चुकी है और वह जेल भी जा चुका है, लेकिन घटना के लगभग एक महीने बाद भी चोरी गया सामान बरामद नहीं हो सका है।

मुख्य चोर की गिरफ्तारी के बावजूद जेवरात, लैपटॉप और मोबाइल का पता नहीं चलना पुलिस की जांच और कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

गिरफ्तार शातिर को टेंगर की फाइल तस्वीर

मुख्य आरोपी ने साथियों के साथ चोरी की बात कबूली थी

पूछताछ के दौरान अफताब उर्फ टेंगर ने खुद थाना प्रभारी रोहित कुमार के सामने स्वीकार किया था कि उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर राहुल यादव के घर चोरी की घटना को अंजाम दिया था। थाना प्रभारी ने पूरी वीडियो ग्राफी भी की थी। इसके बावजूद पुलिस अब तक न तो उसके कथित साथियों को गिरफ्तार कर सकी है और न ही चोरी का सामान बरामद कर पाई है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब मुख्य आरोपी ने साथियों के साथ चोरी करने की बात स्वीकार की थी, तो पुलिस ने उससे यह पता क्यों नहीं लगाया कि चोरी का माल किसके पास है, कहां छिपाकर रखा गया है या किसे बेचा गया है?

गिरफ्तारी हुई, जेल गया आरोपी… लेकिन बरामदगी शून्य

अफताब की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द ही चोरी का पूरा सामान बरामद कर लेगी। मगर एक महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। लाखों रुपये के जेवरात, लैपटॉप और मोबाइल का कोई सुराग नहीं मिलना पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगा रहा है।

शहर में चर्चा है कि यदि पुलिस ने आरोपी से सख्ती से पूछताछ की होती और उसके नेटवर्क की कड़ियां खंगाली होतीं, तो चोरी का माल अब तक बरामद हो जाना चाहिए था।

अन्य चोर अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों?

मुख्य आरोपी के साथ चोरी में शामिल बताए जा रहे अन्य चोरों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। जबकि पुलिस को यह स्पष्ट जानकारी है कि इस घटना में कौन कौन चोर शामिल थे। टेंगर ने खुद अपने साथियों का नाम बताया था।

लोगों का सवाल है कि क्या पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल लोकेशन, संपर्क सूत्र, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और चोरी के सामान की खरीद-बिक्री करने वालों की जांच की? यदि जांच हुई, तो अब तक कोई ठोस परिणाम सामने क्यों नहीं आया?

थाने से हथकड़ी और रस्सी समेत फरार हुआ था टेंगर

अफताब उर्फ टेंगर की गिरफ्तारी का मामला भी कम सनसनीखेज नहीं रहा। 29 सितंबर को पूछताछ के लिए थाना लाए गए अफताब को पुलिस ने हथकड़ी और रस्सी से बांध रखा था। इसके बावजूद वह पुलिस को चकमा देकर थाना से फरार हो गया था।

उसके फरार होने से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर भी सवाल उठे थे। हालांकि पुलिस ने अभियान चलाकर करीब 72 घंटे के भीतर उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया।

टूटी हथकड़ी, कटा रस्सा और सब्बल बरामद

पुलिस ने अफताब की निशानदेही पर टूटी हुई हथकड़ी, कटा हुआ रस्सा और करीब ढाई फीट लंबा लोहे का सब्बल बरामद किया था। सब्बल की बरामदगी से यह आशंका जताई गई कि आरोपी चोरी की अन्य घटनाओं में भी शामिल हो सकता है।

लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि राहुल यादव के घर से चोरी गया सामान कहां गया। पुलिस ने बरामदगी को लेकर कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

किरीबुरू में लगातार चोरी, पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

किरीबुरू में लगातार चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। आम लोगों के घरों से लेकर अधिकारियों के आवास, सेल की खदानों तक चोरों की पहुंच ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बावजूद कई मामलों में पुलिस की कार्रवाई गिरफ्तारी तक सीमित दिखाई दे रही है।

लोगों का कहना है कि केवल आरोपी को पकड़कर जेल भेज देना पर्याप्त नहीं है। चोरी का सामान बरामद करना, गिरोह का पर्दाफाश करना और सभी आरोपियों को गिरफ्तार करना पुलिस की जिम्मेदारी है।

सेल खदानों से स्क्रैप चोरी के मामलों में भी पुलिस पर तंज

दूसरी ओर, सेल खदानों से मालगाड़ी के माध्यम से स्क्रैप चोरी और इससे जुड़े मामलों को लेकर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन मामलों में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।

लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि किरीबुरू थाना पुलिस कई मामलों में “खेत खाए गदहा और मार खाए जोलहा” वाली कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है। चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, आरोपी पकड़े भी जा रहे हैं, लेकिन चोरी का माल और पूरे गिरोह का खुलासा अब तक नहीं हो पा रहा है।

पुलिस कब तक बरामद करेगी चोरी का सामान?

अब शहरवासियों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। सवाल साफ है—राहुल यादव के घर से चोरी गए सोने-चांदी के जेवरात, लैपटॉप और मोबाइल कब तक बरामद होंगे? मुख्य आरोपी के कथित साथियों की गिरफ्तारी कब होगी? चोरी का माल किसे बेचा गया और पुलिस उस तक कब पहुंचेगी?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक टेंगर की गिरफ्तारी को अधूरी कार्रवाई ही माना जाएगा। लोगों को उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही चोरी का पूरा सामान बरामद कर इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजेगी।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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