सुनील सिरका ने मुख्य सचिव से मांगी उच्चस्तरीय जांच, विजिलेंस क्लीयरेंस और प्रोन्नति की प्रक्रिया पर सवाल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
चाईबासा। ग्रामीण विकास विभाग में अधीक्षण अभियंता जितेंद्र पासवान की पदोन्नति और महत्वपूर्ण प्रभार को लेकर विवाद गहरा गया है। झारखंड आंदोलनकारी सुनील सिरका ने आरोप लगाया था कि संबंधित अधिकारी का नाम ACB कांड संख्या 58/16 में दर्ज था और चार्जशीट किया गया था। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति दी गई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

सूत्रों का दावा: ACB ने दाखिल नहीं की चार्जशीट
हालांकि, सूत्रों के अनुसार ACB ने उक्त अधिकारी के खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की है। यानी केस संख्या में नाम दर्ज होना और न्यायालय में चार्जशीट दाखिल होना, दोनों अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अधिकारी को चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया गया। अनुसन्धान में साक्ष्य के अभाव में आरोप मुक्त किया गया है, इस लिए विभाग स्वच्छता परमाण दिया, जिसके आधार पर प्रोन्नति दी गई है।
सिरका बोले—नाम तो केस में था
इस पर सुनील सिरका का कहना है कि भले ही चार्जशीट दाखिल नहीं हुई हो, लेकिन केस में अधिकारी का नाम दर्ज था। उन्होंने कहा कि जब नाम दर्ज था, तभी उनकी पदोन्नति हुई। ऐसे में विजिलेंस क्लीयरेंस जारी करने और पदोन्नति देने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मुख्य सचिव से जांच की मांग
सिरका ने मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर ACB मामले, लोहरदगा सदर अस्पताल के 100 बेड भवन निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितता, विजिलेंस क्लीयरेंस और पदोन्नति की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने RTI के जरिए संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं।
दोषसिद्धि नहीं, पर प्रक्रिया पर सवाल
कानूनी तौर पर केवल केस में नाम दर्ज होना दोषसिद्धि नहीं माना जाता। वहीं चार्जशीट दाखिल न होने की स्थिति भी अलग है। अब जांच का विषय यह है कि पदोन्नति से पहले विभाग ने ACB रिकॉर्ड और अधिकारी की वास्तविक कानूनी स्थिति की समीक्षा की थी या नहीं।









