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ग्रामीण कार्य विभाग बना ‘भ्रष्टाचार का अड्डा’? टेंडर रोककर खेला जा रहा बड़ा खेल!

On: March 19, 2026 8:35 PM
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कमिशन के इंतजार में लटकी फाइलें, खत्म हो रही Bid Validity – ED की एंट्री से मचा हड़कंप

बिना आदेश टेंडर रोकने का सनसनीखेज मामला

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में एक बार फिर बड़ा घोटाले की आहट तेज हो गई है। विभाग के चर्चित मुख्य अभियंता अवधेश कुमार, सरवन कुमार और शीर्ष स्तर के अभियंताओं पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी विभागीय आदेश और ठोस कारण के टेंडर प्रक्रिया को रोक दिया।
यह कोई साधारण प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल का हिस्सा बताया जा रहा है।

कमिशन के खेल में फंसी निविदाएं

सूत्रों के अनुसार अधिकांश निविदाएं “कमिशन सेटिंग” पूरी नहीं होने के कारण अटकी हुई हैं।
नतीजा—
👉 कई टेंडरों की Bid Validity समाप्त
👉 संवेदकों से बार-बार वैधता बढ़ाने के लिए पत्र लिखवाए जा रहे हैं
👉 पूरी प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है
अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह खेल किसके इशारे पर चल रहा है?

विधानसभा में वादा, जमीनी हकीकत ‘जीरो’

विधानसभा में विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने साफ कहा था कि SOP बनाकर समय पर टेंडर निष्पादन किया जाएगा।
लेकिन जमीनी हकीकत—
* SOP कागजों तक सीमित
* टेंडर प्रक्रिया ठप
* विकास कार्य शून्य
यह स्थिति सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रही है।

सचिव सख्त, फिर भी अभियंता बेखौफ

विभागीय सचिव मनोज कुमार, जिनकी पहचान एक ईमानदार अधिकारी की है, इस पूरे मामले को लेकर गंभीर बताए जा रहे हैं।
लेकिन बड़ा सवाल—
👉 जब सचिव गंभीर हैं,
👉 जब मामला सार्वजनिक हो चुका है,
👉 तब भी दोषी अभियंताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या सिस्टम पूरी तरह पंगु हो चुका है या ऊपर से संरक्षण मिल रहा है?

रुका विकास, टूटी उम्मीदें

अगर समय पर टेंडर होते तो—
* गांवों में सड़क और पुल बनते
* स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती
लेकिन भ्रष्टाचार की नीति ने पूरे सिस्टम को जाम कर दिया है।
ग्रामीण इलाकों में विकास की जगह अब नाराजगी और निराशा का माहौल है।

“फेल को पास, पास को फेल” – टेंडर में बड़ा खेल

सूत्रों का दावा है कि—
* योग्य ठेकेदारों को बाहर किया गया
* अयोग्य को अंदर लाया गया
* टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह मैनेज किया गया
कई मामलों में RTI के तहत जानकारी मांगी गई, लेकिन विभाग ने सूचना देने से भी इनकार कर दिया।
👉 यह पारदर्शिता नहीं, बल्कि “कुछ छुपाने” की ओर इशारा करता है।

ED की रडार पर मंत्री से लेकर अभियंता तक!

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़—
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री!
सूत्रों के अनुसार—
* विभाग के मंत्री, अधिकारी और अभियंता ED की निगरानी में हैं
* पहले भी ग्रामीण कार्य विभाग में ED की दो बड़ी कार्रवाई हो चुकी है
* अब Supplementary Chargesheet में और नाम जुड़ने की तैयारी

इन अधिकारियों पर लटक रही बड़ी कार्रवाई

सूत्रों के मुताबिक जिन अधिकारियों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है—
* मुख्य अभियंता अवधेश कुमार
* मुख्य अभियंता सरवन कुमार
* सुरेंद्र कुमार
* राम निवास प्रसाद
इन पर संवेदक चयन में भारी अनियमितता और “मैनेज टेंडर” के गंभीर आरोप हैं।

सरवन कुमार पर संकट के बादल, अवधेश कुमार ‘सेफ जोन’ की तलाश में?

सूत्रों का दावा—
👉 मंत्री के करीबी माने जाने वाले मुख्य अभियंता सरवन कुमार पर जल्द कार्रवाई की तलवार लटक सकती है
👉 वहीं अवधेश कुमार संभावित जांच को भांपते हुए अपने पैतृक विभाग लौटने की तैयारी में हैं
यह घटनाक्रम पूरे सिस्टम में अंदरखाने की हलचल को उजागर करता है।

मंत्रालय की भूमिका भी शक के घेरे में

टेंडर मैनेजमेंट जैसे बड़े खेल में केवल अभियंता ही नहीं, बल्कि मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
👉 बिना ऊपर की सहमति के इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं
👉 जांच की आंच मंत्री तक पहुंचने की आशंका

पूर्व अभियंता प्रमुख भी घेरे में

सेवानिवृत्त अभियंता प्रमुख जय प्रकाश सिंह को भी इस भ्रष्टाचार तंत्र का “जनक” बताया जा रहा है।
उनके खिलाफ भी जनहित याचिका (PIL) दायर होने की सूचना है, जिसे ED तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है।

सरकार की छवि पर सीधा असर

सूत्रों के अनुसार ग्रामीण कार्य विभाग का यह भ्रष्टाचार—
👉 पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुका है
👉 हेमंत सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है
👉 विभाग “भ्रष्टाचार का अड्डा” बनता जा रहा है

जनता का सवाल – कब टूटेगा भ्रष्टाचार का यह नेटवर्क?

अब जनता के मन में एक ही सवाल—
👉 क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
👉 क्या टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी?
👉 या फिर कमिशन के खेल में विकास यूं ही दम तोड़ता रहेगा?

ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर रोकने का यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक बड़े भ्रष्टाचार तंत्र की कहानी बन चुका है।
अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में झारखंड का सबसे बड़ा घोटाला बन सकता है—जहां सिर्फ फाइलें नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख दांव पर होगी।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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