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सारंडा के जंगल में फिर गूंजा धमाका

On: May 4, 2026 4:48 PM
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IED की चपेट में आया हाथी, गंभीर रूप से घायल होने की आशंका

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सारंडा वन क्षेत्र एक बार फिर नक्सली हिंसा की चपेट में आता नजर आ रहा है। जराइकेला थाना क्षेत्र के कोलबोंगा जंगल के आसपास IED विस्फोट की सूचना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जंगल में विचरण कर रहा एक जंगली हाथी इस विस्फोट की चपेट में आ गया, जिससे उसके गंभीर रूप से घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

जंगल में बिछे ‘मौत के जाल’ का शिकार बना मासूम वन्यजीव

सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से जंगल के विभिन्न हिस्सों में IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) लगाए गए हैं। लेकिन इस बार उनका यह ‘मौत का जाल’ एक निर्दोष वन्यजीव पर भारी पड़ गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने धमाके की आवाज सुनने के बाद इलाके में दहशत की स्थिति की पुष्टि की है।
हाथी जैसे विशालकाय और संवेदनशील जीव के इस तरह विस्फोट की चपेट में आने की खबर ने वन विभाग और प्रशासन की चिंता को और बढ़ा दिया है।

सुरक्षा बलों के लिए लगाया गया IED बना वन्यजीवों के लिए खतरा

सारंडा के घने जंगल लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ रहे हैं। नक्सली अक्सर सुरक्षा बलों की गश्ती टीमों को नुकसान पहुंचाने के लिए IED का इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन इन विस्फोटकों का सबसे बड़ा नुकसान अब वन्यजीवों को झेलना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में अंधाधुंध तरीके से बिछाए गए IED न सिर्फ इंसानों बल्कि हाथी, हिरण और अन्य जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं।

वन विभाग और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम अलर्ट मोड में आ गई है। हालांकि, क्षेत्र में IED होने की आशंका के कारण सर्च ऑपरेशन बेहद सावधानी के साथ चलाया जा रहा है।
हाथी की स्थिति का सही आकलन तभी हो पाएगा जब टीम सुरक्षित तरीके से घटनास्थल तक पहुंच पाएगी।

ग्रामीणों में दहशत, जंगल जाने से बच रहे लोग

घटना के बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने जंगल की ओर जाना लगभग बंद कर दिया है।
लकड़ी, महुआ और अन्य वन उपज पर निर्भर लोगों की आजीविका पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

नक्सलियों की रणनीति पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नक्सलियों द्वारा बिछाए जा रहे IED आखिर किस हद तक जायज हैं।
जहां एक ओर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर इसका खामियाजा निर्दोष ग्रामीण और वन्यजीव भुगत रहे हैं।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर संकट

सारंडा, जिसे एशिया का सबसे बड़ा साल वन क्षेत्र माना जाता है, वहां इस तरह की घटनाएं पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।
हाथियों की संख्या और उनकी सुरक्षित आवाजाही पहले ही एक चुनौती बनी हुई है, ऐसे में IED जैसे खतरनाक हथियार स्थिति को और भयावह बना रहे हैं।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगल में बिछाए गए IED को जल्द से जल्द निष्क्रिय किया जाए और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर इस तरह के खतरों को खत्म करने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्थिति पर नजर, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस घटना को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
लेकिन शुरुआती सूचना ने यह साफ कर दिया है कि सारंडा के जंगलों में खतरा अभी टला नहीं है — और इस बार इसका शिकार एक बेगुनाह हाथी बना है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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