दुगुनिया में रमेश चांपिया को घर से बुलाकर पीट-पीटकर उतारा था मौत के घाट
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
गोइलकेरा थाना क्षेत्र के दुगुनिया गांव में नक्सलियों ने अपनी घटती पकड़ और बौखलाहट का खतरनाक चेहरा दिखाया था। पूर्व नक्सली रमेश चांपिया की निर्मम हत्या ने पूरे कोल्हान जंगल इलाके को दहला दिया है। इस सनसनीखेज वारदात में 10 लाख रुपये का इनामी कुख्यात नक्सली, जेडसीएम रैंक का सालुका कायम उर्फ डांगील उर्फ मारु उर्फ भुवनेश्वर समेत कई अन्य नक्सलियों को नामजद किया गया है।
सालुका कायम अपने तीन साथियों के साथ दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर गांव पहुंचा था। उसने रमेश चांपिया को घर से बुलाया और फिर कुछ दूरी पर ले जाकर बेरहमी से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी थी। हत्या की यह वारदात न सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या है, बल्कि पूरे इलाके में दहशत फैलाने की सुनियोजित साजिश मानी जा रही है।

कौन है सालुका कायम?—जिसका नाम सुनते ही कांपते हैं ग्रामीण
सालुका कायम कोई मामूली नक्सली नहीं, बल्कि झारखंड के सबसे खतरनाक और चालाक उग्रवादियों में गिना जाता है। वह सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरू (कायम टोला) का रहने वाला है और सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के घने जंगलों का ऐसा जानकार है, जो हर पगडंडी, हर गांव और हर रास्ते को अपनी हथेली की तरह पहचानता है।
यही वजह है कि बार-बार पुलिस के घेराबंदी के बावजूद वह हर बार फरार होने में सफल हो जाता है। उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है, लेकिन अब तक वह कानून के शिकंजे से बाहर है।
चाईबासा जेल ब्रेक: जब मिर्च पाउडर फेंककर भाग निकले थे 15 कैदी
सालुका कायम का नाम 9 दिसंबर 2014 की उस सनसनीखेज घटना से भी जुड़ा है, जिसने पूरे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
चाईबासा जेल गेट के सामने शाम 4:15 बजे, जब कैदियों को कोर्ट पेशी के बाद जेल वापस लाया जा रहा था, तभी नक्सलियों ने पहले से रची गई साजिश के तहत हमला बोल दिया। जैसे ही कैदी वाहन से उतरे, नक्सलियों ने सुरक्षाकर्मियों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया और अफरा-तफरी मचा दी।
इस मौके का फायदा उठाकर 20 कैदियों ने भागने की कोशिश की, जिनमें से 7 कुख्यात नक्सली साथ 15 कैदी फरार होने में सफल रहे थे। हालांकि सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दो हार्डकोर नक्सलियों—रामविलास तांती और टिपा दास—को मौके पर ही ढेर कर दिया था, जबकि तीन को घायल हालत में पकड़ लिया गया था।
भीड़ का फायदा उठाने की साजिश: मंगलवार का बाजार बना था ढाल
नक्सलियों ने इस हमले के लिए मंगलवार का दिन इसलिए चुना था क्योंकि उस दिन चाईबासा में बड़ा बाजार लगता है। हजारों की संख्या में ग्रामीण और किसान वहां मौजूद रहते हैं।
योजना साफ थी—भीड़ के बीच घुलमिल जाना, ताकि पुलिस ना तो आसानी से पहचान सके और ना ही खुलकर गोली चला सके। यह पूरी घटना नक्सलियों की सटीक प्लानिंग और खतरनाक रणनीति का उदाहरण थी।
जेल ब्रेक गैंग का अंत: कोई मारा गया, कोई पकड़ा गया—पर सालुका अब भी फरार
इस जेल ब्रेक के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। इस गैंग के कई सदस्य या तो मारे गए या गिरफ्तार हुए।
* कुख्यात नक्सली जॉनसन को रोंगो गांव के ग्रामीणों ने मार डाला
* सहदेव महतो हाल ही में हजारीबाग में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ
* मास्टरमाइंड संजय गंझु को गुमला में मुठभेड़ के दौरान घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया था।
लेकिन इस पूरे ऑपरेशन के बावजूद सालुका कायम पुलिस के हाथ नहीं लगा और लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहा।
रमेश चांपिया की हत्या: कारण अब भी रहस्य, लेकिन संकेत खतरनाक
सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर रमेश चांपिया को क्यों मारा गया?
अब तक इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय जानकारों का मानना है कि यह हत्या एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
नक्सलियों की बौखलाहट: गांवों से खत्म हो रहा समर्थन, अब डर का सहारा
सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में अब नक्सलियों की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही। ग्रामीणों का समर्थन तेजी से घटा है और पुलिस ने भी अपने सूचना तंत्र को काफी मजबूत कर लिया है।
नतीजा यह हुआ है कि नक्सलियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अब वे अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए दहशत का रास्ता अपना रहे हैं।
रमेश चांपिया की हत्या को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है—एक संदेश, एक चेतावनी, कि जो भी उनके खिलाफ जाएगा या सहयोग बंद करेगा, उसका अंजाम यही होगा।

आखिर कब तक बचता रहेगा सालुका?
बार-बार बड़े अपराधों में शामिल होने के बावजूद सालुका कायम का फरार रहना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
एक तरफ सरकार नक्सलवाद के खात्मे के दहलीज पर है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे कुख्यात नक्सली खुलेआम हत्या जैसी वारदात को अंजाम देकर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं।
ग्रामीणों में दहशत, पुलिस पर दबाव
इस घटना के बाद दुगुनिया समेत आसपास के गांवों में भय का माहौल है। लोग खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
वहीं पुलिस पर अब दबाव है कि वह जल्द से जल्द सालुका कायम और उसके गिरोह को पकड़कर इस इलाके में शांति बहाल करे।













