नन्हे राधा-कृष्ण के रूप में सजे बच्चों ने बांधा समां, कृष्ण जन्मलीला, भक्ति नृत्य और मटकी फोड़ ने लूटी महफिल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मेघाहातुबुरु सामुदायिक भवन शुक्रवार को भक्ति, उल्लास और बाल कृष्ण की नटखट अदाओं से सराबोर नजर आया। ब्राइट फ्यूचर एकेडमी की ओर से आयोजित जन्माष्टमी उत्सव में नन्हे-मुन्ने बच्चे राधा-कृष्ण का रूप धारण कर पहुंचे तो पूरा आयोजन स्थल मानो वृंदावन और गोकुल की मनोरम झांकी में तब्दील हो गया। बच्चों की मासूम मुस्कान, हाथों में बांसुरी, सिर पर सजे मोरपंख और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों ने समारोह की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए।
कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत कृष्ण जन्मलीला, भक्ति गीतों पर मनमोहक नृत्य, राधा-कृष्ण की आकर्षक प्रस्तुतियां और मटकी फोड़ प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण रहे। बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों पर उपस्थित अभिभावक और अतिथि लगातार तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाते नजर आए।

पूजा-अर्चना और आरती से हुआ समारोह का शुभारंभ
जन्माष्टमी समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि मेघाहातुबुरु महिला समिति की अध्यक्ष रंजिता सिंह, विशिष्ट अतिथि सुषमा योगेश राम, सुनीता थापा, विद्यालय की प्राचार्या सुश्री संगीता, पुष्पा, प्रतिमा सहित अन्य अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ किया।
पूजा-अर्चना के बाद अतिथियों ने पालने में विराजमान बाल गोपाल को झुलाया और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया। जैसे ही बाल कान्हा को पालने में झुलाया गया, उपस्थित बच्चों और अभिभावकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरा परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।

नन्हे राधा-कृष्ण ने लूटी पूरी महफिल
समारोह का सबसे मनमोहक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब विद्यालय के दर्जनों बच्चे राधा और कृष्ण के रूप में सजकर मंच और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। किसी नन्हे कान्हा के सिर पर मोर मुकुट सजा था तो किसी के हाथ में बांसुरी थी। वहीं नन्ही राधाएं पारंपरिक परिधानों और आकर्षक श्रृंगार में बेहद खूबसूरत नजर आईं।
नन्हे कृष्णों की चंचल अदाओं और राधाओं की मासूम मुस्कान ने उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया। अभिभावक अपने बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में देखकर उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए। बच्चों की इन मनमोहक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।

भक्ति गीतों पर थिरके नन्हे कदम
जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भक्ति गीतों और मधुर भजनों पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। नन्हे कलाकारों ने अपनी मासूम अदाओं और बेहतरीन तालमेल से ऐसा समां बांधा कि पूरा सामुदायिक भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
नृत्य प्रस्तुतियों में कहीं बाल कृष्ण की नटखटता दिखाई दी तो कहीं राधा-कृष्ण की भक्ति और प्रेम की सुंदर झलक देखने को मिली। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

मंच पर जीवंत हुई भगवान कृष्ण की जन्मलीला
समारोह में बच्चों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी घटनाओं पर आधारित नाटक का भी मंचन किया गया। मथुरा की जेल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, वासुदेव द्वारा उन्हें यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने तथा बाल कृष्ण से जुड़ी विभिन्न लीलाओं को नन्हे कलाकारों ने बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।
बच्चों के संवाद, अभिनय और मंच सज्जा ने दर्शकों को पूरी तरह अपनी ओर आकर्षित किया। नन्हे कलाकारों की अभिनय क्षमता देखकर अभिभावकों के साथ-साथ अतिथियों ने भी उनकी जमकर सराहना की।

मटकी फोड़ में दिखी कान्हा की नटखट शरारत
जन्माष्टमी समारोह में आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता ने बच्चों के उत्साह को और बढ़ा दिया। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की याद दिलाती इस प्रतियोगिता में बच्चों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ मटकी फोड़ने का प्रयास किया।
मटकी तक पहुंचने और उसे फोड़ने के लिए बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मटकी फूटते ही पूरा परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी।

जयकारों और भजनों से गूंजता रहा सामुदायिक भवन
पूरे कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे, भक्ति गीत और मधुर संगीत से सामुदायिक भवन का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।
कार्यक्रम में बच्चों की प्रस्तुतियों के साथ-साथ अभिभावकों की सहभागिता ने भी समारोह को खास बना दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं और अभिभावक अपने बच्चों के साथ आकर्षक पारंपरिक परिधानों में समारोह में पहुंचे।

बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का सुंदर प्रयास
ब्राइट फ्यूचर एकेडमी द्वारा आयोजित इस जन्माष्टमी समारोह ने बच्चों को केवल मनोरंजन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्ति भाव से जोड़ने का संदेश भी दिया।
विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों को श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और बाल लीलाओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ उनमें सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति रुचि पैदा करने का भी सुंदर प्रयास देखने को मिला।
अंत में उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन एवं बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व विकास के साथ उन्हें अपनी समृद्ध भारतीय परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूरे उत्सव के दौरान बच्चों की खिलखिलाहट, राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि और भक्ति गीतों ने मेघाहातुबुरु में जन्माष्टमी के उल्लास को यादगार बना दिया।













