मेघाहातुबुरु के पंडाल में पहुंचा 15 सदस्यों का परिवार, लोगों ने गिनती शुरू की तो खुद बादल पान ने खोल दिया पूरा ‘फैमिली रजिस्टर’
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू/मेघाहातुबुरु। विश्वकर्मा पूजा में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने लोग आते हैं, मशीनों और औजारों की पूजा होती है और प्रसाद में खिचड़ी मिलती है। लेकिन मेघाहातुबुरु में गुरुवार को लोगों को पूजा के साथ-साथ ‘फैमिली मैनेजमेंट’ का ऐसा लाइव डेमो देखने को मिला कि हर कोई बस एक ही तरफ देखता रह गया।
कॉन्ट्रैक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के पूजा पंडाल में अचानक 15 लोगों का एक परिवार पहुंचा। आगे-आगे बादल पान और पीछे बच्चों की लंबी कतार। लोगों ने सोचा—‘लगता है पूरा मोहल्ला ही पूजा घूमने निकल पड़ा है!’
लेकिन जब गिनती और पूछताछ शुरू हुई तो कहानी निकली कुछ और ही।

सवाल हुआ—‘कितने बच्चे हैं?’ जवाब सुनकर गिनती करने वाले ने ही हार मान ली
किरीबुरू के प्रोस्पेक्टिंग निवासी करीब 45 वर्षीय राज/मेशन मिस्त्री बादल पान से जब पूछा गया कि परिवार में कितने बच्चे हैं, तो उनका जवाब सुनकर आसपास खड़े लोग चौंक गए।
बादल पान ने बताया—तीन पत्नियां और 18 बच्चे!
अब जिन लोगों ने सामने खड़े बच्चों की गिनती शुरू की थी, उन्होंने शायद मन ही मन कैलकुलेटर निकाल लिया होगा। बादल पान ने तुरंत स्पष्ट किया कि आज उनके साथ दो पत्नियां और 12 बच्चे ही आए हैं। तीसरी पत्नी घर पर हैं और छह बच्चे अलग घूम रहे हैं।
यानी पूरा परिवार एक साथ निकलता तो शायद पूजा पंडाल में प्रवेश से पहले ही गिनती की पर्ची बांटनी पड़ती!
‘आज सिर्फ आधा परिवार आया है!’
सबसे मजेदार बात यह रही कि सामने खड़े परिवार को देखकर लोग जितना बड़ा कुनबा समझ रहे थे, बादल पान ने बताया कि यह तो पूरा परिवार भी नहीं है।
तीसरी पत्नी घर पर और छह बच्चे अलग!
लोगों के चेहरे का भाव मानो कह रहा था—‘भाई साहब, पूरा परिवार कब निकलता है?’
बादल पान बोले—‘हम तीनों एक कमरे में रहते हैं, कोई विवाद नहीं’
जब उनसे पूछा गया कि तीन पत्नियों के साथ परिवार कैसे चलता है, तो बादल पान ने बेहद सहज अंदाज में कहा कि तीनों पत्नियां साथ रहती हैं और परिवार में कोई विवाद नहीं होता।
उनका कहना था कि कई बार सिर्फ पति-पत्नी और बच्चों वाले छोटे परिवारों में भी आपसी मनमुटाव और शक की स्थिति बन जाती है। लेकिन उनके यहां तीन पत्नियों के बावजूद वे सभी मिलकर रहते हैं।
बादल पान की बात सुनकर आसपास खड़े लोगों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई।
18 बच्चों में सबसे बड़ा सवाल—‘कौन खाना खाया?’
बादल पान ने अपनी असली परेशानी भी बता दी।
उनके मुताबिक 18 बच्चों वाले परिवार में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि ‘किसकी किससे लड़ाई हुई?’, बल्कि यह होता है कि—
* कौन खाना खा चुका है?
* कौन अभी भूखा है?
* कौन कहां घूम रहा है?
* और कौन घर पर है?
अब 18 बच्चों में एक-एक करके पूछना भी अपने आप में रोज का हाजिरी रजिस्टर भरने जैसा काम होगा!
नाम पुकारते-पुकारते कभी-कभी ‘कन्फ्यूजन’
बादल पान ने हंसते हुए बताया कि बच्चों के नाम पुकारने में भी कई बार गड़बड़ी हो जाती है। एक को बुलाते-बुलाते दूसरे का नाम निकल जाता है।
18 बच्चों के नाम याद रखने का यह सिलसिला ऐसा है कि घर में मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट से ज्यादा बड़ा शायद बच्चों का नामों वाला रजिस्टर हो!
फैमिली फोटो का आया नंबर, तो ‘टीम’ अधूरी रह गई
जब बादल पान, उनकी दोनों पत्नियों और 12 बच्चों की ग्रुप तस्वीर लेने की कोशिश की गई तो मामला थोड़ा अलग निकला। दोनों पत्नियां तस्वीर में शामिल नहीं हुईं।
इस तरह जिस तस्वीर में ‘बादल एंड फैमिली’ का पूरा कुनबा दिखना था, उसमें भी परिवार की टीम पूरी नहीं हो सकी।
‘बिंदास जिंदगी’ का अपना ही फॉर्मूला
बादल पान का कहना है कि इतनी बड़ी फैमिली में परेशानियां तो आती हैं, लेकिन इसके बावजूद वे सभी मिल-जुलकर और बिंदास तरीके से जिंदगी जीते हैं।
उनकी कहानी सुनकर विश्वकर्मा पूजा में पहुंचे लोगों को भगवान विश्वकर्मा के साथ-साथ परिवार प्रबंधन की अनोखी मिसाल भी देखने को मिली।
पूजा में भोग खिचड़ी का था, लेकिन चर्चा ‘बादल के कुनबे’ की होती रही
पंडाल में खिचड़ी भोग की खुशबू के बीच बादल पान के परिवार ने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। कोई बच्चों की संख्या गिनता नजर आया तो कोई परिवार के आकार को देखकर मुस्कुराता रहा।
विश्वकर्मा पूजा में मशीनों और औजारों की पूजा के बीच इस परिवार ने लोगों को एक अलग ही विषय दे दिया—‘इतने बड़े परिवार का हिसाब-किताब आखिर चलता कैसे है?’
बादल पान का जवाब भी उतना ही सीधा था—‘सब बिंदास है।’
और शायद यही उनके बड़े परिवार का सबसे छोटा और मजेदार परिचय है।













