सैडल गेट-छोटानागरा मार्ग पर जगह-जगह ध्वस्त हो रहे गार्डवाल, टोंटोगडा-झाड़बेड़ा में बड़ा हिस्सा जमींदोज
झाड़ियां बनीं ‘मौत की दीवार’, मोड़ों पर सामने से नहीं दिखती गाड़ियां; विभाग कब जागेगा?
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
सारंडा। पिछले करीब 15 दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने सारंडा जंगल के बीच से गुजरने वाली मुख्य सड़क की बदहाल व्यवस्था और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सैडल गेट से छोटानागरा के बीच घाटी क्षेत्र में सड़क किनारे बने सुरक्षा गार्डवाल अब एक-एक कर धराशाई होने लगे हैं और कई जगह मुख्य सड़क भी टूटने लगी है। हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में सड़क के कई हिस्सों के खाई में समा जाने का खतरा पैदा हो सकता है।

टोंटोगडा-झाड़बेड़ा में गार्डवाल जमींदोज
बीते दिनों टोंटोगडा और झाड़बेड़ा के बीच गार्डवाल का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जमींदोज हो गया। इसके अलावा दर्जनों स्थानों पर गार्डवाल बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर गिरने के कगार पर हैं। लगातार बारिश के बीच सड़क के किनारे की मिट्टी खिसक रही है, जिससे सड़क की मजबूती पर भी सवाल खड़ा हो गया है।
यदि समय रहते क्षतिग्रस्त गार्डवाल और सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो बारिश के दबाव में सड़क का हिस्सा कभी भी खाई की ओर स्लाइड कर सकता है। ऐसी स्थिति में किरीबुरू-बड़ाजामदा से मनोहरपुर के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित होने का खतरा है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
गार्डवालों के लगातार टूटने ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण और सुरक्षा कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी का खामियाजा अब बारिश के मौसम में सामने आ रहा है।
सवाल यह है कि जिस सड़क और सुरक्षा संरचना को भारी बारिश, पहाड़ी ढलान और लगातार वाहनों के दबाव को ध्यान में रखकर मजबूत बनाया जाना चाहिए था, वह कुछ ही समय में बारिश का दबाव क्यों नहीं झेल पा रही है?

तितलीघाट पुल में बड़ा होल, अब अस्तित्व पर संकट
इसी मार्ग पर कुछ दिन पहले तितलीघाट के समीप मुख्य पुल में बड़ा होल हो चुका है। पुल की स्थिति को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ रही है। एक तरफ पुल क्षतिग्रस्त है, दूसरी तरफ सड़क किनारे के गार्डवाल लगातार टूट रहे हैं और तीसरी तरफ सड़क के किनारे कटाव बढ़ता जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
सड़क के दोनों किनारे उगी झाड़ियां बनीं बड़ा खतरा
सिर्फ सड़क और गार्डवाल ही नहीं, बल्कि किरीबुरू से बड़ाजामदा तक सड़क के दोनों किनारों पर उगी घनी झाड़ियां भी दुर्घटना को न्योता दे रही हैं। बारिश के मौसम में झाड़ियां इतनी बड़ी हो गई हैं कि कई महत्वपूर्ण मोड़ों पर सामने से आने वाले वाहन दिखाई तक नहीं देते।
इस मार्ग पर लगातार भारी वाहनों और छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में मोड़ पर अचानक सामने आ जाने वाली गाड़ी से दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।

अधिकारी आए, हालात देखे… फिर भी कार्रवाई कब?
विडंबना यह है कि कुछ दिन पहले ही डीआईजी, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, एसडीओ, बीडीओ समेत कई वरीय अधिकारी इसी मार्ग से होकर किरीबुरू पहुंचे और वापस लौटे हैं। अधिकारियों की नजर इस बदहाल सड़क पर पड़ी होगी, लेकिन इसके बावजूद सड़क सुरक्षा से जुड़े सवाल अब भी जस के तस हैं।
हर वर्ष पुलिस-प्रशासन और विभिन्न विभागों द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। लोगों को यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित वाहन चलाने की सलाह दी जाती है। लेकिन जब सड़क की सुरक्षा संरचनाएं ही टूटने लगें, पुल में बड़ा होल हो जाए और मोड़ों पर झाड़ियां दृश्यता खत्म कर दें, तो फिर केवल वाहन चालकों को जिम्मेदार ठहराना कितना उचित है?

बड़ा सवाल—हादसे के बाद जागेगा विभाग?
सारंडा की यह सड़क केवल स्थानीय आवागमन का मार्ग नहीं है, बल्कि किरीबुरू-बड़ाजामदा को मनोहरपुर और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क बंद होने की स्थिति में हजारों लोगों के आवागमन के साथ खनन क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
बारिश अभी जारी है। गार्डवाल पहले ही टूटने लगे हैं, सड़क कई स्थानों पर कमजोर हो रही है और तितलीघाट पुल में बड़ा होल हो चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या पथ निर्माण विभाग किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा, या उससे पहले सारंडा की इस महत्वपूर्ण सड़क को बचाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाएगी?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से मांग की है कि गार्डवाल, पुल और सड़क की तत्काल तकनीकी जांच कराकर युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए तथा सड़क के दोनों किनारों की झाड़ियों को तत्काल साफ कराया जाए। लोगों का कहना है कि अभी कार्रवाई का समय है; हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने से किसी की जान वापस नहीं आएगी।












