मनोहरपुर के पांच गांवों में अधूरी नल-जल योजनाएं बनीं ग्रामीणों की परेशानी का कारण, मुख्य सचिव को फिर भेजा स्मार पत्र
रिपोर्ट शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत लाईलोर, जोजोगुटू, हाकागुई, रायकेरा एवं मकरण्डा गांवों में जल जीवन मिशन के तहत निर्मित की जा रही नल-जल योजनाओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। योजनाओं में व्यापक वित्तीय अनियमितता, विभागीय लापरवाही और राजकोषीय अपव्यय का आरोप लगाते हुए भारत आदिवासी पार्टी ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अधूरे जलमीनार-पाइपलाइन से ग्रामीण परेशान
आरोप है कि इन गांवों में जल जीवन मिशन के तहत जलमीनार और पाइपलाइन निर्माण का कार्य लंबे समय से अर्धनिर्मित अवस्था में पड़ा हुआ है। करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में योजना की उपयोगिता और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
9 दिसंबर 2025 को भी सरकार को दी गई थी शिकायत
भारत आदिवासी पार्टी के पश्चिमी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुशील बारला के अनुसार, इस मामले को लेकर पूर्व में 9 दिसंबर 2025 को पत्रांक BAP/JHD-21/2025 के माध्यम से झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा गया था।
ज्ञापन में जल जीवन मिशन की इन योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच झारखंड उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित संवेदकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
आठ महीने बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पार्टी का आरोप है कि ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद लंबे समय तक शासन-प्रशासन की ओर से मामले में कोई ठोस और सकारात्मक पहल नहीं की गई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ रही है।
29 अगस्त को मुख्य सचिव को फिर भेजा स्मार पत्र
विभागीय कथित उदासीनता के खिलाफ अब भारत आदिवासी पार्टी ने एक बार फिर सरकार का दरवाजा खटखटाया है। 29 अगस्त 2026 को पत्रांक 36/2026 के माध्यम से झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को पुनः स्मार पत्र भेजा गया है।
स्मार पत्र में पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर तत्काल संज्ञान लेने तथा पांचों गांवों में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे अथवा अधूरे पड़े कार्यों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
अधिकारी और संवेदक जांच के घेरे में लाने की मांग
पार्टी ने मांग की है कि यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी, कार्य में अनियमितता या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों की जवाबदेही तय कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
‘पानी चाहिए, कागजी योजना नहीं’
भारत आदिवासी पार्टी का कहना है कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन यदि योजनाएं निर्माण के नाम पर अधूरी छोड़ दी जाएं तो सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद ग्रामीण अपने मूल अधिकार से वंचित रह जाएंगे। पार्टी ने सरकार से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
सुशील बारला ने कहा कि यदि सरकार की ओर से इस मामले में जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई तो क्षेत्र की जनता के हित में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
— सुशील बारला
जिलाध्यक्ष, भारत आदिवासी पार्टी, पश्चिमी सिंहभूम














