एसडीओ अरुण उरांव और बीडीओ पप्पू रजक ने आंदोलनकारियों से की सकारात्मक वार्ता, जूस पिलाकर कराया आंदोलन समाप्त
राजू सांडिल बोले—प्रशासन को 5 अक्टूबर तक का समय, इसके बाद मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो लिया जाएगा अगला निर्णय
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। स्थानीय रोजगार, खदान प्रभावित गांवों के विकास और पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग को लेकर 10 अगस्त से सेल, गुवा की रांजाबुरु खदान में चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन आखिरकार 1 सितंबर को 22 दिनों बाद समाप्त हो गया। जगन्नाथपुर के एसडीओ अरुण उरांव और नोवामुंडी के बीडीओ पप्पू रजक मंगलवार को रांजाबुरु खदान के आंदोलन स्थल पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ सकारात्मक वार्ता की। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर आंदोलन को फिलहाल स्थगित कराया गया।

आंदोलन की शुरुआत से ही ग्रामीण पूर्व में मां सरला नामक ठेका कंपनी के साथ हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग पर अड़े हुए थे। आंदोलन के दौरान स्थानीय रोजगार, खदान प्रभावित गांवों के युवाओं को प्राथमिकता और अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने लगातार अपनी आवाज बुलंद की।

प्रशासन के आग्रह पर फिलहाल आंदोलन स्थगित
आंदोलन स्थगित होने के बाद मुखिया राजू सांडिल ने बताया कि एसडीओ अरुण उरांव और बीडीओ पप्पू रजक के आग्रह पर फिलहाल आंदोलन को स्थगित किया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों को पूरा कराने की दिशा में प्रशासन पहल करेगा और जल्द ही उपायुक्त तथा सेल प्रबंधन के साथ ग्रामीणों की वार्ता कराई जाएगी।
राजू सांडिल ने कहा कि एसडीओ ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समाधान कराने का आश्वासन दिया है। प्रशासन ने ग्रामीणों से कुछ समय मांगा है, जिसके बाद आंदोलन को फिलहाल आगे के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

5 अक्टूबर तक प्रशासन को दिया गया समय
राजू सांडिल ने बताया कि प्रशासन को 5 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यदि ग्रामीणों की मांगों को लेकर सकारात्मक कार्रवाई होती है तो आंदोलन आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। प्रशासन की पहल और वार्ता के परिणाम के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान समय में पूरा प्रशासन SIR के कार्यों में व्यस्त है। इसके अलावा गुवा शहीद दिवस को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारियां हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन को समय देने का निर्णय लिया है।

लाल पानी से प्रभावित गांवों का दौरा करेंगे एसडीओ
वार्ता के दौरान खदान से निकलने वाले कथित लाल पानी से प्रभावित गांवों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राजू सांडिल के अनुसार एसडीओ अरुण उरांव ने खदान के लाल पानी से प्रभावित गांवों का दौरा कर स्वयं स्थिति देखने की बात कही है।
ग्रामीणों ने बताया कि खदान से निकलने वाले लाल पानी से प्राकृतिक जलस्रोतों और ग्रामीणों की कृषि भूमि प्रभावित होने की समस्या लंबे समय से उठाई जाती रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का प्रशासन स्वयं निरीक्षण करे।

CSR गांवों की बुनियादी समस्याओं से भी कराया अवगत
वार्ता के दौरान ग्रामीणों ने CSR गांवों की बुनियादी समस्याओं को भी प्रशासन के समक्ष रखा। इनमें स्कूलों में शिक्षकों की कमी, पेयजल की समस्या और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
ग्रामीणों ने कहा कि खनन क्षेत्र के आसपास के गांवों में विकास कार्यों की जरूरत है। शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को गंभीर पहल करनी चाहिए।

रोजगार की पुरानी मांग भी रहेगी केंद्र में
आंदोलन की प्रमुख मांगों में पूर्व में हुए लिखित समझौते का अनुपालन, खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी तथा स्थानीय स्तर पर विभिन्न कार्यों में ग्रामीणों को अवसर देना शामिल रहा है।
ग्रामीणों का आरोप रहा है कि स्थानीय युवा बेरोजगार हैं, जबकि खदान से जुड़े विभिन्न कार्यों में बाहरी लोगों को रोजगार दिए जाने से स्थानीय लोगों में असंतोष है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से इस मुद्दे पर भी ठोस पहल करने की मांग की।
22 दिनों तक चला शांतिपूर्ण आंदोलन
10 अगस्त को शुरू हुआ यह आंदोलन लगातार 22 दिनों तक चला। इस दौरान ग्रामीणों ने रांजाबुरु खदान के मैगजीन लेबल क्षेत्र में अलग-अलग दिनों में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। भारी बारिश के बावजूद आंदोलनकारी कई दिनों तक डटे रहे। स्वतंत्रता दिवस के दिन भी आंदोलन स्थल पर तिरंगा फहराकर देशभक्ति के नारे लगाए गए और ग्रामीण एकता की आवाज बुलंद की गई।

‘वार्ता सकारात्मक रही, प्रशासन पर भरोसा किया’
राजू सांडिल ने कहा कि प्रशासन के साथ हुई वार्ता सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा, “हमने प्रशासन की बात और आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन को आगे तक के लिए स्थगित किया है। प्रशासन ने हमारी मांगों को पूरा कराने और उपायुक्त एवं सेल प्रबंधन के साथ जल्द वार्ता कराने का भरोसा दिया है।”
उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रशासन को दिया गया समय देखेंगे और इस दौरान होने वाली कार्रवाई पर नजर रखेंगे। यदि मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल होती है तो ग्रामीण सकारात्मक सहयोग करेंगे।

मानकी-मुंडाओं और महिलाओं की रही मौजूदगी
आंदोलन स्थगित किए जाने के दौरान मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल, मुंडा बुधराम सिद्धू, मुंडा कुशू देवगम, मुंडा जामदेव चांपिया, मुंडा जानुम सिंह चेरोवा, मुंडा लेबेया देवगम, मुंडा राजेश टोपनो, सुमित दास, राजू समेत विभिन्न गांवों के ग्रामीण और महिलाएं मौजूद रहीं।
प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद जूस पिलाकर आंदोलन समाप्त कराया गया। हालांकि आंदोलन को स्थायी रूप से समाप्त नहीं बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि 5 अक्टूबर तक प्रशासनिक पहल और मांगों पर होने वाली कार्रवाई के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।














