सरना स्थल और देशाउली में पौधों के संरक्षण पर बनी सहमति
रिपोर्ट शैलेश सिंह
नदी तट पौधरोपण कार्यक्रम के अंतर्गत गुआसाई सरना स्थल एवं देशाउली में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरना स्थल की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता के साथ-साथ पौधों के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

वन विभाग के पौधरोपण कार्य की ग्रामीणों ने की सराहना
बैठक में दिउरी (पुजारी) सुशील पुरती ने कहा कि सरना स्थल केवल पूजा-पाठ का स्थान नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था, परंपरा और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे स्थान पर वन विभाग द्वारा पौधरोपण किया जाना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि पौधों के बड़े होने से आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिलेगा और सरना स्थल की प्राकृतिक सुंदरता एवं हरियाली और अधिक बढ़ेगी।
उन्होंने ग्रामीणों की ओर से वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पौधरोपण के बाद उसकी देखभाल और सुरक्षा करना भी उतना ही जरूरी है।
पौधों की सुरक्षा हर ग्रामीण की जिम्मेदारी
बैठक में ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि पौधे लगाने के बाद उनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। केवल वन विभाग के भरोसे पौधों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए गांव के प्रत्येक परिवार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
ग्रामीणों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि महिला हो या पुरुष, युवा हों या बुजुर्ग और बच्चे, सभी मिलकर पौधरोपण क्षेत्र की निगरानी करेंगे। किसी भी पौधे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश होने पर ग्रामीण मिलकर उसे रोकेंगे।
पालतू पशुओं को पौधरोपण क्षेत्र में जाने से रोकेंगे ग्रामीण
बैठक में पौधों को पशुओं से होने वाले नुकसान को लेकर भी चर्चा की गई। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि अपने पालतू पशुओं को पौधरोपण क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने देंगे। लगाए गए पौधों के चारों ओर बनाए गए घेरान की भी निगरानी की जाएगी।
यदि घेरान के आसपास कोई पशु दिखाई देता है तो ग्रामीण उसे तत्काल वहां से भगाएंगे। इसके साथ ही घेरान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में उसकी मरम्मत के लिए भी सामूहिक प्रयास किया जाएगा।
सरना स्थल के जीव-जंतुओं और पक्षियों का भी होगा संरक्षण
बैठक में सरना स्थल के प्राकृतिक वातावरण को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि सरना स्थल में रहने वाले छोटे जीव-जंतुओं और पक्षियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि सरना स्थल प्रकृति और मानव के बीच बेहतर संबंध का प्रतीक है। यहां मौजूद पेड़-पौधे, पक्षी और छोटे जीव-जंतु भी प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसलिए इनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी ग्रामीणों की है।
पशुओं के चराने के लिए समय निर्धारित करने पर जोर
पौधों को नुकसान से बचाने के लिए पशुओं को चराने के समय को भी व्यवस्थित करने पर चर्चा हुई। ग्रामीणों से कहा गया कि पशुओं को ऐसे समय और स्थान पर चराया जाए, जिससे पौधरोपण क्षेत्र प्रभावित न हो।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर पौधों को पशुओं से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है और आने वाले वर्षों में यही पौधे बड़े होकर गांव और सरना स्थल के पर्यावरण को मजबूत करेंगे।
ग्रामीणों के सहयोग से आगे भी होगा संरक्षण कार्य
वन विभाग, गुआ रेंज की ओर से बैठक में उपस्थित प्रधान वनरक्षी छोटेलाल मिश्रा ने ग्रामीणों के सहयोग और सहभागिता के लिए सभी ग्रामवासियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वन विभाग और ग्रामीणों के बीच आपसी सहयोग से ही जल, जंगल और जमीन का बेहतर संरक्षण संभव है।
उन्होंने कहा कि “आप सभी के सहयोग से आगे भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए मिलकर कार्य किया जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि सरना स्थल के संरक्षण एवं विकास से संबंधित नए प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजे जाएंगे, ताकि क्षेत्र में आवश्यक सुविधाओं और संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
सरना स्थल के विकास पर भी चर्चा
बैठक में केवल पौधों की सुरक्षा तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि सरना स्थल के संरक्षण एवं विकास से जुड़े अन्य विषयों पर भी ग्रामीणों ने अपनी बातें रखीं। ग्रामीणों ने कहा कि सरना स्थल को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने के साथ-साथ इसकी प्राकृतिक पहचान को भी बनाए रखना जरूरी है।
वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया कि संरक्षण से जुड़े व्यवहारिक सुझावों एवं प्रस्तावों पर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा का लिया संकल्प
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को लेकर अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि जंगल, जलस्रोत और जमीन गांव के जीवन का आधार हैं। इनका संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पौधरोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल, सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि पौधरोपण का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
बैठक में जगमोहन पुरती (डाकूआ), सुरेश चम्पीया (मानकी), सुशील पुरती (दिउरी), राज पुरती, मंगल पुरती, सुमित्रा पुरती, चंद्रमोहन पुरती, टीनू पुरती, विकास पुरती, विनय पुरती, लखन पुरती सहित अन्य गणमान्य महिला-पुरुष एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ सरना स्थल, पौधों, जंगल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।













