मृत सेल अधिकारी के आश्रित को नौकरी व मुआवजा नहीं मिला तो दोनों खदानों में उत्पादन ठप करने की चेतावनी
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु, 17 अगस्त। गुवा सेल खदान में कार्य के दौरान मृत सेल अधिकारी दिवेंदु दास के एक आश्रित को स्थायी नौकरी एवं जरूरी मुआवजा देने की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब व्यापक रूप लेने की चेतावनी दी गई है। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, मेघाहातुबुरु के महासचिव अफताब आलम ने सेल प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मृत अधिकारी के एक आश्रित को जल्द नौकरी और जरूरी मुआवजा नहीं दिया गया, तो गुवा के बाद आंदोलन को मेघाहातुबुरु और किरीबुरू सेल खदानों तक विस्तारित किया जाएगा।

दोनों खदानों को बंद कराने की चेतावनी
अफताब आलम ने कहा कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उनकी यूनियन मेघाहातुबुरु और किरीबुरू दोनों खदानों में आंदोलन करने तथा उत्पादन बंद कराने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
उन्होंने कहा कि दिवेंदु दास सेल के अधिकारी थे और उनके निधन के बाद परिवार के भविष्य को लेकर प्रबंधन को गंभीरता दिखानी चाहिए। केवल संवेदना पत्र और नियमों के तहत मुआवजे की बात पर्याप्त नहीं है। प्रबंधन को मृत अधिकारी के एक आश्रित को उसकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार सेल में स्थायी नौकरी देने का स्पष्ट लिखित आश्वासन देना चाहिए।
आरएमडी से बोकारो के अधीन आने के बाद बढ़ी परेशानी : अफताब
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के महासचिव ने कहा कि जब से सेल की आरएमडी इकाई को बोकारो के अधीन शामिल किया गया है, तब से आरएमडी के अधीन आने वाली झारखंड की खदानों में कार्यरत सेल कर्मचारियों को विभिन्न समस्याओं और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बेहतर रेफरल स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है। सेल अस्पताल किरीबुरू में विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। इसके अलावा बेहतर आवास, टाउनशिप सुविधा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आरएमडी के अधीन रहते तो गुवा की समस्या तत्काल सुलझती : आलम
अफताब आलम ने कहा कि यदि सेल की झारखंड स्थित खदानें आज भी आरएमडी के अधीन होतीं, तो गुवा के मृत सेल अधिकारी से जुड़ी मांगों को तत्काल पूरा कर लिया जाता और खदान में उत्पादन भी सामान्य रूप से चलता रहता। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में प्रबंधन और मजदूर संगठनों के बीच संवाद एवं समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
उन्होंने कहा कि दिवेंदु दास के मामले को केवल एक कर्मचारी के परिवार का मामला समझकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह सेल कर्मियों के भविष्य और उनके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
झारखंड की खदानों के लिए अलग स्वतंत्र इकाई बनाने की मांग
अफताब आलम ने सेल प्रबंधन से झारखंड में संचालित तमाम खदानों को बोकारो के प्रशासनिक नियंत्रण से अलग कर एक नई स्वतंत्र इकाई बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड की खदानों की अपनी अलग भौगोलिक, औद्योगिक और श्रमिक परिस्थितियां हैं। इसलिए इन खदानों के बेहतर संचालन और कर्मचारियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए स्वतंत्र इकाई का गठन जरूरी है।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन होगा व्यापक
उन्होंने कहा कि गुवा सेल खदान में मृत अधिकारी के आश्रित को नौकरी और जरूरी मुआवजा देने के मामले में प्रबंधन को तत्काल पहल करनी चाहिए। यदि इस मामले में जल्द ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन केवल गुवा तक सीमित नहीं रहेगा। मेघाहातुबुरु और किरीबुरू के मजदूर संगठन भी आंदोलन में उतरेंगे और दोनों खदानों में उत्पादन बंद कराने का निर्णय लिया जा सकता है।
अफताब आलम ने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी। फिलहाल गुवा में जारी आंदोलन और प्रबंधन के बीच बातचीत के परिणाम पर मेघाहातुबुरु और किरीबुरू के मजदूर संगठनों की भी नजर बनी हुई है।





















