बोल्डर पर 307.72 से बढ़कर 1050.32 रुपये, गिट्टी-मेटल पर 579.10 से सीधे 3069.10 रुपये तक पहुंची देय राशि
बालू पर 117.42 से 903.42 और स्टोन डस्ट पर 73.46 से 673.46 रुपये का नया गणित
रॉयल्टी की दोहरी कटौती रोकने और 27 अप्रैल 2026 से पूर्व की दरें बहाल करने की मांग
मंत्री का आश्वासन- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संशोधन की करेंगे अनुशंसा, बैठक के बाद ठेकेदारों में जगी उम्मीद
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
जमशेदपुर। झारखंड सरकार के खनिजों की दरों में बदलाव और रॉयल्टी से संबंधित नई गणना व्यवस्था ने कोल्हान के ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। पत्थर, गिट्टी, बालू, मोरम और स्टोन डस्ट जैसी निर्माण सामग्री पर सरकारी देय राशि में हुई भारी बढ़ोतरी ने संवेदकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, सरकारी निर्माण कार्यों के बिल भुगतान में रॉयल्टी की कटौती का मुद्दा इस परेशानी को और गंभीर बना रहा है।

इस मामले को लेकर कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ ने अपनी आवाज सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचाई है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को जमशेदपुर परिसदन (सर्किट हाउस) में संघ के प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार के मंत्री दीपक बिरुवा से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा। मंत्री ने ठेकेदारों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर खनिज पदार्थों एवं मिट्टी-मोरम की दरों के मूल्यांकन में संशोधन तथा रॉयल्टी कटौती के मुद्दे पर पुनर्विचार करने की अनुशंसा करेंगे।
मंत्री के इस आश्वासन के बाद बैठक में शामिल संवेदकों के बीच उम्मीद और उत्साह का माहौल देखने को मिला। हालांकि, अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के स्तर पर होना है, लेकिन संघ इसे अपनी सामूहिक पहल की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।

27 अप्रैल 2026 के बाद बदला खनिजों का गणित, कई गुना बढ़ी देय राशि!
ठेकेदारों की नाराजगी के पीछे सबसे बड़ा कारण खान एवं भूतत्व विभाग की 27 अप्रैल 2026 से संबंधित नई गणना व्यवस्था है। संघ की ओर से प्रस्तुत दरों की तुलनात्मक तालिका में 27 अप्रैल 2026 से पहले और उसके बाद की देय राशि का अंतर स्पष्ट रूप से दिखाया गया है।
तालिका के अनुसार, नई व्यवस्था में खनिजों के मूल्यांकन के लिए आधार मूल्य में बदलाव करते हुए रॉयल्टी की गणना से संबंधित नया फार्मूला अपनाया गया है। इसके बाद रॉयल्टी, डेड रेंट, DMFT अंशदान, प्रबंधन शुल्क और पर्यावरण उपकर को जोड़कर कुल देय राशि निर्धारित की गई है।
इसका परिणाम यह हुआ कि कई खनिजों पर पहले की तुलना में कई गुना अधिक राशि देय दिखाई गई है। संघ का कहना है कि इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी का सीधा असर सरकारी निर्माण योजनाओं की लागत और संवेदकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
देखिए, किस खनिज पर कितना बढ़ा सरकारी बोझ!
कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ की ओर से प्रस्तुत तुलनात्मक चार्ट में पुरानी और नई व्यवस्था के बीच अंतर इस प्रकार दर्शाया गया है—
| खनिज | पुरानी देय राशि | नई देय राशि | अंतर |
|---|---|---|---|
| बोल्डर | ₹307.72 | ₹1,050.32 | ₹742.60 |
| गिट्टी/चिप्स एवं मेटल | ₹579.10 | ₹3,069.10 | ₹2,490.00 |
| बालू | ₹117.42 | ₹903.42 | ₹786.00 |
| मोरम | ₹89.70 | ₹401.22 | ₹311.52 |
| ईंट/प्रतिशत | ₹211.40 | ₹211.40 | कोई अंतर नहीं |
| स्टोन डस्ट | ₹73.46 | ₹673.46 | ₹600.00 |
| मिट्टी (अर्थ सॉयल) | ₹47.48 | ₹104.64 | ₹57.16 |
राशियां रुपये में हैं। इकाइयां संघ की प्रस्तुत तालिका के अनुसार हैं; ईंट की दर प्रतिशत/1000 इकाई संबंधी अलग गणना पर आधारित है।
इन आंकड़ों पर गौर करें तो गिट्टी एवं मेटल की कुल देय राशि में 2,490 रुपये का अंतर दर्शाया गया है। इसी तरह बालू पर 786 रुपये, बोल्डर पर 742.60 रुपये और स्टोन डस्ट पर 600 रुपये की अतिरिक्त देय राशि का अंतर सामने आया है।
यानी निर्माण कार्यों में रोजाना इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत का सरकारी गणित ही बदल गया है। यही वजह है कि संवेदक इस व्यवस्था की समीक्षा और पुरानी दरों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं।

खनिज खरीद पर पहले रॉयल्टी, फिर सरकारी बिल से कटौती क्यों?
बैठक में ठेकेदारों ने रॉयल्टी की दोहरी कटौती की आशंका को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए अधिकृत स्रोतों से पत्थर, गिट्टी, बालू और अन्य खनिज सामग्री खरीदी जाती है। इनकी खरीद के दौरान रॉयल्टी भुगतान से संबंधित राशि और वैध दस्तावेज भी उपलब्ध होते हैं।
इसके बावजूद निर्माण कार्यों के अंतिम भुगतान के समय यदि फिर से रॉयल्टी की कटौती की जाती है तो संवेदकों पर दोहरा वित्तीय बोझ पड़ने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
संघ ने मंत्री के समक्ष मांग रखी कि खनिजों की खरीद के समय पहले से जमा रॉयल्टी का समुचित समायोजन किया जाए तथा सरकारी बिलों से अनावश्यक दोहरी कटौती पर रोक लगे। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर विभाग स्पष्ट और एकसमान दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि संवेदकों को विभागीय असमंजस और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
मंत्री दीपक बिरुवा का आश्वासन, मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला
परिसदन में हुई मुलाकात के दौरान कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ के प्रतिनिधियों ने खनिजों की नई दरों और रॉयल्टी कटौती से उत्पन्न व्यावहारिक परेशानियों को विस्तार से रखा। संघ ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ तो पहले से स्वीकृत सरकारी योजनाओं को पूरा करने में संवेदकों के सामने गंभीर आर्थिक कठिनाइयां आएंगी।
मंत्री दीपक बिरुवा ने संघ की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि वे इस विषय को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखेंगे। उन्होंने राज्य के विकास हित और ठेकेदारों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पुरानी दरों के आधार पर मूल्यांकन व्यवस्था में संशोधन की अनुशंसा करने की बात कही।
यह आश्वासन ठेकेदारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक वे अपनी मांगों को विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर उठा रहे थे। मंत्री के माध्यम से मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने की संभावना ने संघ की उम्मीदों को नया आधार दिया है।

बिटुमेन की बढ़ती कीमत और पुराने SOR ने भी बिगाड़ा निर्माण कार्यों का बजट
बैठक में केवल खनिजों की दरों और रॉयल्टी कटौती का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की लगातार बढ़ती कीमतों पर भी गंभीर चिंता जताई गई।
संवेदकों ने बताया कि सरकारी योजनाओं का टेंडर निर्धारित SOR (Schedule of Rates) और प्राक्कलित राशि के आधार पर आवंटित होता है, लेकिन बाजार में निर्माण सामग्री की वास्तविक कीमतें कई बार स्वीकृत दरों से काफी अधिक हो जाती हैं।
विशेषकर बिटुमेन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सड़क निर्माण की लागत प्रभावित हो रही है। ऐसे में संवेदकों ने बाजार की वास्तविक कीमतों के अनुरूप SOR के पुनरीक्षण और निर्माण सामग्री की बढ़ी लागत के समायोजन की मांग भी रखी।
कोल्हान के बड़े ठेकेदारों की एकजुटता, संघ को मिली नई ताकत
इससे पहले रविवार को निर्मल गेस्ट हाउस, सीएच एरिया, जमशेदपुर में कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ के बैनर तले आयोजित विशेष बैठक में 100 से अधिक संवेदकों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं साझा की थीं।
बैठक में NNB, Triveni, Mangu Newetia, KK Builder, Chandel Construction और Vijay Shankar Mishra सहित कोल्हान के कई बड़े निर्माण समूहों एवं संवेदकों की भागीदारी रही।
रविवार की बैठक में सामूहिक रूप से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का निर्णय लिया गया था। उसी क्रम में सोमवार को मंत्री दीपक बिरुवा से मुलाकात कर संघ ने अपनी मांगों को औपचारिक रूप से सामने रखा।

अब मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी नजरें, आश्वासन से आगे कार्रवाई की प्रतीक्षा
कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ की इस पहल को ठेकेदारों की सामूहिक आवाज सरकार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंत्री के आश्वासन से संवेदकों में उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन उनकी वास्तविक राहत मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाले निर्णय और खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले संशोधित निर्देशों पर निर्भर करेगी।
संघ की प्रमुख अपेक्षाएं हैं कि—
- 27 अप्रैल 2026 से पूर्व लागू दरों के आधार पर खनिजों के मूल्यांकन की व्यवस्था पर पुनर्विचार हो।
- रॉयल्टी की दोहरी कटौती रोकी जाए और पहले से जमा राशि का समुचित समायोजन हो।
- खनिजों एवं मिट्टी-मोरम की नई दरों और दंड संबंधी प्रावधानों की समीक्षा की जाए।
- बिटुमेन की बाजार कीमतों के अनुरूप SOR में संशोधन हो।
- पुराने टेंडर और निर्माणाधीन योजनाओं के लिए व्यावहारिक वित्तीय राहत की व्यवस्था बने।
ठेकेदारों का सवाल भी वाजिब है—जब सरकारी योजनाओं का बजट पुरानी दरों पर निर्धारित है और निर्माण सामग्री की देय राशि में अचानक कई गुना अंतर आ गया है, तो इस अतिरिक्त बोझ का समायोजन कौन करेगा?
फिलहाल मंत्री दीपक बिरुवा के आश्वासन से कोल्हान के संवेदकों में उत्साह है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखे जाने वाले प्रस्ताव और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। ठेकेदारों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर निर्माण कार्यों और संवेदकों, दोनों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करेगी।










