2019 में हुआ था एकरारनामा, 2022 में पूरी होनी थी योजना; वर्षों की देरी के बाद विभाग ने उठाया कदम, 5 नवंबर तक अंतिम मापी के लिए संवेदक को आखिरी मौका
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम। सरकारी विकास योजनाओं की बदहाली और वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को लेकर उठाए जा रहे सवालों का असर अब दिखने लगा है। चाईबासा सदर प्रखंड की हारिला पंचायत अंतर्गत ग्राम गितिलपी में DMFT मद से निर्मित होने वाली जलमीनार का मामला सामने आने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चाईबासा ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई की है। विभाग ने इस योजना के संवेदक SEPC Limited (पूर्व में Shriram EPC Limited), चेन्नई का एकरारनामा विखंडित (Rescind) कर दिया है।
इस संबंध में कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चाईबासा की ओर से बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संवेदक को इसकी सूचना दी गई है। विभाग ने अब योजना की अंतिम मापी की प्रक्रिया शुरू करते हुए 5 नवंबर 2026 तक संयुक्त अंतिम मापी (Joint Final Measurement) के लिए उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया है। निर्धारित तिथि तक संवेदक के उपस्थित नहीं होने पर एकतरफा मापी करने की स्पष्ट चेतावनी दी गई है।

तीन साल पहले खत्म हो गई थी निर्माण की समय सीमा
गौरतलब है कि ग्राम गितिलपी में घर-घर नल से पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से DMFT मद के तहत ESR No. 3 जलमीनार योजना शुरू की गई थी। इसकी तकनीकी क्षमता और एकरारनामा संबंधी प्रमुख विवरण इस प्रकार हैं—
- जलमीनार की क्षमता: 3.60 लाख लीटर।
- स्टेजिंग की ऊंचाई: 18 मीटर।
- एकरारनामा की तिथि: 12 फरवरी 2019।
- निर्धारित कार्य पूर्णता तिथि: 11 फरवरी 2022।
- संवेदक: M/S Shriram EPC Limited, Chennai (वर्तमान में SEPC Limited)।
निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद योजना अधूरी रहने का मामला सामने आया था। इस पर भारत आदिवासी पार्टी, पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने योजना की उच्चस्तरीय जांच, भुगतान का ब्योरा सार्वजनिक करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई थी।
जल जीवन मिशन के अभियान निदेशक के निर्देश पर रद्द हुआ एकरारनामा
विभागीय प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जल जीवन मिशन के अभियान निदेशक, जल जीवन मिशन एवं पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड, रांची के पत्रांक 2669, दिनांक 13 अक्टूबर 2026 के माध्यम से उक्त योजना का एकरारनामा विखंडित करने का निर्देश प्राप्त हुआ था।
इसके अनुपालन में कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चाईबासा ने कार्यालय पत्रांक 1246, दिनांक 14 अक्टूबर 2026 के माध्यम से संवेदक SEPC Limited का एकरारनामा रद्द कर दिया।
यह कार्रवाई वर्षों से लंबित योजना के मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम है। हालांकि, एकरारनामा रद्द होने के बाद अधूरे निर्माण कार्य को आगे किस प्रक्रिया से पूरा कराया जाएगा, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
संवेदक की अनुपस्थिति से नहीं हो सकी अंतिम मापी
प्रेस विज्ञप्ति में विभाग ने बताया है कि अधीक्षण अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता अंचल, चाईबासा के कार्यालय आदेश संख्या 24/चाईबासा, सहपत्र ज्ञापांक 886, दिनांक 14 अक्टूबर 2026 के तहत गठित टीम को योजना की अंतिम मापी (Final Measurement) करनी है।
इसके लिए विभाग ने संवेदक को पत्रांक 1246, दिनांक 14 अक्टूबर 2026 तथा पत्रांक 1275, दिनांक 22 अक्टूबर 2026 के माध्यम से निर्माण स्थल पर उपस्थित होकर अंतिम मापी कराने की सूचना दी थी।
लेकिन विभाग के अनुसार, संवेदक के अनुपस्थित रहने के कारण अब तक अंतिम मापी नहीं हो सकी है। ऐसे में निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति, पूर्ण हुए कार्य की मात्रा और अंतिम वित्तीय हिसाब निर्धारित करने की प्रक्रिया लंबित है।
5 नवंबर तक आखिरी मौका, अनुपस्थिति पर होगी एकतरफा मापी
कार्यपालक अभियंता विनोद कुमार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से SEPC Limited को निर्देश दिया है कि 5 नवंबर 2026 तक संयुक्त अंतिम मापी के लिए स्वयं अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि को निर्माण स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रखे।
विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि संवेदक निर्धारित समय तक उपस्थित नहीं होता है, तो योजना की एकतरफा अंतिम मापी कर दी जाएगी। ऐसी स्थिति में विभाग द्वारा की गई मापी संवेदक को स्वीकार करनी होगी तथा भविष्य में इससे संबंधित कोई दावा मान्य नहीं होगा।
विभाग के इस रुख से स्पष्ट है कि अब योजना के अधूरे कार्य का तकनीकी और वित्तीय हिसाब अंतिम रूप देने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
सुशील बारला की मांग—एकरारनामा रद्द करने के साथ वित्तीय जांच भी हो
भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने इस मामले में पहले ही उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका कहना है कि संवेदक का एकरारनामा रद्द करना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन इससे योजना से जुड़े सभी सवालों का जवाब नहीं मिलता।
उन्होंने मांग की है कि जांच के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं को प्राथमिकता दी जाए—
- योजना की कुल स्वीकृत राशि और अब तक किए गए भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- भुगतान के अनुरूप धरातल पर हुए निर्माण कार्य का तकनीकी सत्यापन कराया जाए।
- निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होने के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए।
- निर्माण की गुणवत्ता तथा वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो।
- संवेदक अथवा संबंधित अधिकारियों की लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सुशील बारला ने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि DMFT मद से संचालित योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
एकरारनामा रद्द हुआ, लेकिन ग्रामीणों को पानी कब मिलेगा?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अब भी कायम है। वर्षों पहले जिस जलमीनार से गितिलपी के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने का सपना दिखाया गया था, वह आखिर कब पूरा होगा? संवेदक का एकरारनामा रद्द होने और अंतिम मापी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने की ठोस समयसीमा सामने आना बाकी है।
अब जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधूरे निर्माण का हिसाब पूरा करने के साथ जलमीनार को चालू कराने की है। इसके लिए नई कार्ययोजना, शेष निर्माण की व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
खबर के बाद विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति ने मामले में नया मोड़ ला दिया है। अब निगाहें 5 नवंबर को होने वाली अंतिम मापी और उसके बाद विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
सरकारी धन खर्च होने के बाद भी यदि ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिलता, तो विकास योजना की सफलता पर सवाल उठना लाजिमी है। गितिलपी के ग्रामीणों को अब कागजी कार्रवाई नहीं, धरातल पर जलमीनार और घर-घर पानी चाहिए।











