अस्पताल की बदहाली पर भी फूटा आक्रोश, यूनियन ने घेराव और संघर्ष का किया ऐलान
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल खदान क्षेत्र में ठेका मजदूरों की प्रस्तावित 40% छंटनी के खिलाफ माहौल गरमा गया है। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन ने बुधवार देर शाम मजदूरों के साथ आपात बैठक कर प्रबंधन के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
छंटनी के फैसले ने भड़काया आक्रोश
बैठक की अध्यक्षता यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने की। उन्होंने कहा कि ठेका मजदूरों की 40% छंटनी का प्रस्ताव मजदूर विरोधी है और इससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
रामा पांडे ने बताया कि स्टील सेक्रेटरी द्वारा इस संबंध में सेल प्रबंधन को पत्र भेजा गया है। जैसे ही इसकी जानकारी मजदूरों को मिली, पूरे क्षेत्र में असंतोष फैल गया।

“रोजगार छीना तो होगा बड़ा आंदोलन”
यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि छंटनी का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
बैठक में मौजूद मजदूरों ने एकजुट होकर कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी नौकरी नहीं जाने देंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर खदान तक संघर्ष करेंगे।
अस्पताल की बदहाली पर भी उठी आवाज
बैठक में सिर्फ छंटनी ही नहीं, बल्कि गुवा सेल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था भी प्रमुख मुद्दा बनी।
रामा पांडे ने कहा कि अस्पताल लंबे समय से अव्यवस्था का शिकार है—
* विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी
* नया एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं
* आवश्यक दवाइयों का अभाव
* मरीज वार्ड के एसी खराब
* शौचालयों की सफाई बदहाल
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन मजदूरों की बुनियादी जरूरतों तक की अनदेखी कर रहा है।
घेराव की चेतावनी, आर-पार की तैयारी
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि अस्पताल की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो सेल अस्पताल का घेराव किया जाएगा और आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
रामा पांडे ने कहा कि यह सिर्फ सुविधाओं का सवाल नहीं, बल्कि मजदूरों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मजदूरों का एकजुट संकल्प
बैठक के अंत में सभी मजदूरों ने एक स्वर में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
गुवा क्षेत्र में लगातार बढ़ते असंतोष ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में बड़ा औद्योगिक टकराव देखने को मिल सकता है।
प्रबंधन पर बढ़ा दबाव
एक ओर छंटनी का विवाद, दूसरी ओर अस्पताल की बदहाली—इन दोनों मुद्दों ने सेल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन मजदूरों की मांगों को गंभीरता से लेता है या फिर गुवा एक बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता है।













