मुंडा-मानकी के नेतृत्व में सेल प्रबंधन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, 20 मई की वार्ता पर टिकी उम्मीदें
रिपोर्ट : शैलेश सिंह / संदीप गुप्ता
सारंडा के लौह अयस्क क्षेत्र में एक बार फिर स्थानीय रोजगार का मुद्दा भड़क उठा है। शनिवार को सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले खदान प्रभावित गांवों के मुंडा-मानकी और ग्रामीणों ने सेल, गुवा की रांजाबुरु माइंस को बंद कर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने सुबह से ही माइंस क्षेत्र में पहुंचकर कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया, जिससे खनन कार्य और वाहनों का परिचालन कई घंटों तक बाधित रहा।
राजाबेड़ा, जामकुंडिया, लेंबरे, दुईया, रोआम, तितलीघाट और अग्रवां समेत कई गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने मानकी लागुड़ा देवगम के नेतृत्व में सेल प्रबंधन और ठेकेदारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि सेल प्रबंधन ने पूर्व में हुए समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय बाहरी मजदूरों को लाकर काम कराया जा रहा है।

“समझौता हुआ, लेकिन पालन नहीं”
ग्रामीणों ने बताया कि रांजाबुरु माइंस को लेकर पूर्व में 13 दिनों तक आंदोलन चला था। उस दौरान सेल प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच लंबी वार्ता के बाद समझौता हुआ था। समझौते में यह स्पष्ट तय किया गया था कि माइंस में मजदूरों और कर्मियों की बहाली गुवा खदान से प्रभावित 18 गांवों से की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि समझौते के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं बदला। आरोप लगाया गया कि संबंधित ठेकेदार “मां सरला” द्वारा ड्राइवर, खलासी, झंडा दिखाने वाले कर्मी और अन्य मजदूरों को बाहरी क्षेत्रों से लाकर काम कराया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि जब खदानों का धूल, प्रदूषण और विस्थापन स्थानीय लोग झेल रहे हैं, तब रोजगार के अवसरों से भी उन्हें दूर रखना अन्याय है। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह केवल रोजगार का सवाल नहीं बल्कि स्थानीय अधिकार और सम्मान की लड़ाई है।
माइंस के बाहर डटे रहे ग्रामीण
सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण माइंस परिसर के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने खनन क्षेत्र में जाने वाले वाहनों को रोक दिया और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग करते रहे। आंदोलन के कारण माइंस क्षेत्र में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही।
ग्रामीणों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर “स्थानीय को रोजगार दो”, “समझौता लागू करो”, और “बाहरी मजदूर वापस जाओ” जैसे नारे लिखे थे। महिलाओं और युवाओं की भी आंदोलन में बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

प्रशासन हरकत में, मंत्री के पीए ने भी की वार्ता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू की। ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगों को विस्तार से रखा और समझौते के पालन की मांग की।
इसी दौरान झारखंड के परिवहन मंत्री के पीए ने भी ग्रामीणों से फोन पर बातचीत की और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों और सेल प्रबंधन तक पहुंचाया जाएगा।
काफी देर तक चली वार्ता के बाद आंदोलन को फिलहाल कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में जल्द ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा और अधिक उग्र रूप में शुरू किया जाएगा।
“20 मई की वार्ता निर्णायक होगी”
इस संबंध में गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि आगामी 20 मई को इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण वार्ता प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सम्मानजनक समाधान चाहते हैं, लेकिन यदि वार्ता बेनतीजा रही तो फिर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
राजू शांडिल ने कहा कि खदान प्रभावित गांवों के युवाओं में भारी आक्रोश है। क्षेत्र के लोग वर्षों से रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला शांत करने की कोशिश की जाती है। अब ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

रोजगार बनाम बाहरी मजदूर का बढ़ता विवाद
सारंडा क्षेत्र में खनन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय रोजगार का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। खदान प्रभावित गांवों के लोगों का आरोप है कि कंपनियां स्थानीय संसाधनों का उपयोग तो करती हैं, लेकिन रोजगार के मामले में स्थानीय युवाओं की अनदेखी करती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर काम पर रखने के बजाय ठेकेदार बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता देते हैं। इससे क्षेत्र में बेरोजगारी और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
रांजाबुरु माइंस का यह आंदोलन अब केवल एक खदान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सारंडा क्षेत्र में स्थानीय अधिकार और रोजगार की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में 20 मई की वार्ता पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि उसी से तय होगा कि यह आंदोलन शांत होगा या फिर और बड़ा रूप लेगा।














