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आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए युवाओं को आगे आने का आह्वान

On: June 2, 2026 9:38 PM
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दूबिल गांव में आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा ने चलाया सामाजिक जागरूकता अभियान

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने तथा युवा पीढ़ी को सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा द्वारा मनोहरपुर प्रखंड के दूबिल गांव में एक सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व महासभा की स्थानीय प्रखंड कमिटी ने किया।

युवाओं को परंपराओं से जोड़ने पर जोर

कार्यक्रम के दौरान समाज में मनाए जाने वाले पारंपरिक पर्वों और धार्मिक अनुष्ठानों की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित युवाओं को मगे पर्व, बा पर्व, हेरोः पर्व तथा जोमनामा पर्व सहित विभिन्न पारंपरिक आयोजनों के सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई। इसके साथ ही जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों से जुड़े रीति-रिवाजों के संरक्षण एवं पालन में युवाओं की भूमिका और जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला गया।
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में कई पारंपरिक मान्यताएं और सांस्कृतिक धरोहरें धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसे में युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़कर समाज की सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए आगे आना होगा।

संस्कृति संरक्षण के लिए संगठित होने की अपील

आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं और संस्कृति उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। इनके संरक्षण और विकास के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक संगठनों से जुड़कर समाजहित में कार्य करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और जागरूकता के माध्यम से ही समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना संभव है।

अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ चल रहा अभियान

गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने बताया कि आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के नेतृत्व में नेशनल आदिवासी रिवाईवल एसोसिएशन, सिंगी एण्ड सिंगी सोसाइटी तथा मिलन चैरिटेबल ट्रस्ट जैसे सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डायन प्रथा, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों तथा अन्य असामाजिक एवं असंवैधानिक गतिविधियों के खिलाफ समाज को जागरूक करने के लिए गांव-गांव में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य समाज में शिक्षा, जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है।

युवा वर्ग से सामाजिक योगदान देने की अपील

कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं से अपील की गई कि वे समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाने के लिए आगे आएं। वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास और उत्थान में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि युवा संगठित होकर कार्य करें तो सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो सकती है।

ग्रामीणों ने दिखाई सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामाजिक एवं सांस्कृतिक मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस दौरान धनसिंह चांपिया, मथुरा पुरती, मंगल चांपिया, कृष्णा तोपनो, माटु किम्बो, गुरा हेम्ब्रम, पीटर चांपिया, दर्शन चांपिया, गुरा मुर्मू, दुखिया आईन्द, विश्वजीत बिरूवा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं युवा उपस्थित थे।

संस्कृति बचाने का संदेश

कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक मूल्यों को बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। समाज की एकता, जागरूकता और सक्रिय भागीदारी ही आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रख सकती है।

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