रोजगार पर संकट का आरोप, लंबित मांगों के समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
गुवा संवाददाता।
सेल प्रबंधन द्वारा संविदा कर्मियों की संख्या में 40 प्रतिशत तक कटौती किए जाने के प्रस्तावित निर्णय के विरोध में गुवा-चिरिया खान श्रमिक संघ (संबद्ध भारतीय मजदूर संघ) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक (सी.एम.एल.ओ.) को ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

कटौती से हजारों परिवारों पर पड़ेगा असर
श्रमिक संघ का कहना है कि संविदा कर्मियों की संख्या में इतनी बड़ी कटौती से सैकड़ों मजदूरों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। संघ के नेताओं ने कहा कि खदानों और औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत संविदा कर्मी वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनकी संख्या कम करने का निर्णय न केवल श्रमिक हितों के खिलाफ है, बल्कि इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
संघ ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है और रोजगार के अवसर सीमित हैं। ऐसे में संविदा कर्मियों की छंटनी जैसी कार्रवाई मजदूर परिवारों को आर्थिक असुरक्षा की ओर धकेल सकती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव
ज्ञापन में कहा गया है कि संविदा कर्मियों की आय से ही क्षेत्र के छोटे व्यवसाय, दुकानें और स्थानीय बाजार संचालित होते हैं। यदि बड़ी संख्या में श्रमिकों की नौकरी प्रभावित होती है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। श्रमिक संघ ने चेतावनी दी कि इस निर्णय से सामाजिक असंतोष भी बढ़ सकता है।
प्रबंधन से पुनर्विचार की मांग
संघ ने सेल प्रबंधन से आग्रह किया है कि वह संविदा कर्मियों की कटौती संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे और इसे तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। श्रमिक नेताओं ने कहा कि उत्पादन और विकास में मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
लंबित मांगों को भी उठाया गया प्रमुखता से
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने कर्मचारियों की कई लंबित मांगों को भी प्रबंधन के समक्ष रखा। इनमें वेतन समझौते का शीघ्र निष्पादन एवं एरियर भुगतान, इंसेंटिव स्कीम का पुनर्निर्धारण, अवकाश नीति में समानता, फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने, कर्मचारियों के लिए आवास योजना लागू करने तथा चिकित्सा सुविधाओं में सुधार की मांग शामिल है।
सुरक्षा और कल्याण योजनाओं पर भी जोर
श्रमिक संघ ने खदान क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। संघ का कहना है कि खदानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान करने की भी मांग की गई।
आंदोलन की चेतावनी
संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की औद्योगिक अशांति की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रबंधन की होगी।
कई श्रमिक नेता रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान श्रमिक संघ के महासचिव बृजभूषण लाल, समीर पाठक, गणेश दास, हरिहर जेना, अर्जुन सहित बड़ी संख्या में मजदूर और संघ के कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में संविदा कर्मियों की कटौती का विरोध करते हुए श्रमिक हितों की रक्षा की मांग की।













