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दुबिल माइंस घेराबंदी तीसरे दिन भी जारी, पानी रोकने के आरोप से भड़का आंदोलन

On: June 28, 2026 8:03 PM
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उत्पादन पूरी तरह ठप, भूख-प्यास और बारिश के बीच डटे ग्रामीण; बोले—“पानी नहीं देंगे तो नाला से लाएंगे, लेकिन आंदोलन नहीं हटेगा”

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

जल-जंगल-जमीन और अस्तित्व की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ग्राम सभा दुबिल के बैनर तले “हातु-आबुआ राज, ग्राम स्वराज अभियान” के तहत सेल की चिड़िया-दुबिल माइंस के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन रविवार 28 जून को तीसरे दिन भी पूरे उग्र तेवर में जारी रहा। लगातार कठिन हालात, बारिश, भूख और अब पानी के संकट के बावजूद ग्रामीण आंदोलन स्थल से हटने को तैयार नहीं हैं। खदान का उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई तीसरे दिन भी पूरी तरह ठप रही।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी चार सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अब पानी पर टकराव, प्रबंधन पर गंभीर आरोप

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुंडा रामलाल और दुलाल आइंद ने बताया कि रविवार को आंदोलनकारियों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। रामलाल मुंडा ने कहा कि महाप्रबंधक को फोन कर पानी भेजने का आग्रह किया गया, लेकिन जवाब मिला कि रविवार की छुट्टी होने के कारण चालक उपलब्ध नहीं है और पानी नहीं भेजा जा सकता।
इस जवाब ने आंदोलनकारियों में और गुस्सा भर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह केवल उपेक्षा नहीं, बल्कि आंदोलन को कमजोर करने की रणनीति है।
रामलाल मुंडा ने साफ कहा—
“अगर प्रबंधन पानी नहीं देगा तो हम गांव या नाला से पानी लाएंगे, लेकिन आंदोलन किसी भी हालत में नहीं रुकेगा।”

पुलिस से भी लगाई गुहार, नहीं मिली राहत

आंदोलन स्थल पर मौजूद चिड़िया और छोटानागरा थाना पुलिस से भी ग्रामीणों ने प्रबंधन से बात कर पानी की व्यवस्था कराने की अपील की। लेकिन देर शाम तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
इससे आंदोलनकारियों में यह संदेश गया कि उनकी बुनियादी जरूरतों तक को नजरअंदाज किया जा रहा है।

महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मोर्चे पर, संघर्ष बना जनज्वार

आंदोलन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी भागीदारी दिख रही है। प्लास्टिक के अस्थायी तंबू के नीचे रहकर, जंगल में खाना बनाकर और बारिश के बीच रात काटकर भी ग्रामीणों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है।
यह अब केवल धरना नहीं, बल्कि गांव के अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।

चार मांगों पर अड़े आंदोलनकारी

ग्रामसभा ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा—
दुबिल गांव के 200 बेरोजगार युवाओं को खतियान आधारित प्राथमिकता के साथ रोजगार दिया जाए।
• अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों को नौकरी मिले।
• सरना, कब्रिस्तान और रैयती जमीन पर गाड़े गए अवैध पिलर हटाए जाएं।
• गांव में चार नए चापाकल और आठ जलमीनार लगाए जाएं।

“अब भरोसा नहीं, सिर्फ अधिकार चाहिए”

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिले, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली। अब गांव ने तय कर लिया है कि वादा नहीं, अपना हक लेकर ही लौटेंगे।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने उनकी मांगों की अनदेखी जारी रखी तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
दुबिल की पहाड़ियों में लगातार गूंज रहे नारे अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि संघर्ष की खुली घोषणा बन चुके हैं—
“हातु-आबुआ राज, हमारा गांव हमारा राज!”
और यह आवाज अब सेल प्रबंधन और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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