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5 से 10 महीने बाद भी नहीं मिला जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सारंडा-नोवामुंडी के लोग परेशान

On: July 22, 2026 5:19 PM
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स्कूलों में बच्चों का नामांकन संकट में, बीमा क्लेम और सरकारी काम भी अटके

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सारंडा और नोवामुंडी प्रखंड क्षेत्र में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र समय पर नहीं बनने से दर्जनों परिवार गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। पंचायत स्तर की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर कई लोगों ने 5 से 10 महीने पहले प्रखंड कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन जमा किए थे, लेकिन आज तक उन्हें प्रमाण पत्र नहीं मिल सका। कई आवेदकों का आरोप है कि प्रखंड कार्यालय में उनके आवेदन का रिकॉर्ड तक नहीं मिल रहा है।

बच्चों की पढ़ाई पर मंडरा रहा खतरा

जन्म प्रमाण पत्र के अभाव में कई छोटे बच्चों का विभिन्न विद्यालयों में दाखिला मुखिया द्वारा सत्यापित शपथ पत्र के आधार पर किया गया था। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन को भरोसा दिलाया था कि एक-दो महीने के भीतर प्रमाण पत्र उपलब्ध करा देंगे, लेकिन महीनों बाद भी प्रमाण पत्र नहीं बनने से स्कूल लगातार नोटिस जारी कर रहे हैं। इससे बच्चों का नामांकन रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है।

एक साल बाद भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र

किरीबुरू निवासी शक्ति कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी माता के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लगभग एक वर्ष पहले नोवामुंडी प्रखंड कार्यालय में आवेदन दिया था, लेकिन आज तक प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में बीमा क्लेम, बैंकिंग कार्य, संपत्ति संबंधी प्रक्रिया और अन्य सरकारी काम प्रभावित हो रहे हैं।

SIR सहित कई सरकारी कार्य भी प्रभावित

वर्तमान में चल रहे SIR अभियान में भी मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ रही है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं और कानूनी प्रक्रियाओं में भी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य होने के कारण आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

क्या हो सकते हैं देरी के कारण?

हालांकि इस मामले में प्रखंड प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों और सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार देरी के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं—
* जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर दर्ज नहीं कराना।
* समय सीमा पार होने पर आवेदन की प्रक्रिया जटिल हो जाना तथा कुछ मामलों में एसडीएम या कार्यपालक दंडाधिकारी के आदेश की आवश्यकता पड़ना।
* अस्पताल की पर्ची, माता-पिता के पहचान पत्र, निवास प्रमाण या अन्य आवश्यक दस्तावेजों की कमी।
* ऑनलाइन सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) या अन्य पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि अथवा गलत जानकारी दर्ज हो जाना।
* प्रखंड कार्यालय में लंबित फाइलें, कर्मचारियों की कमी या प्रशासनिक स्तर पर देरी।
* आवेदन एवं रिकॉर्ड का सही रखरखाव नहीं होने से फाइलों का लंबित या गुम होना।
यदि अधिकांश आवेदकों ने समय पर आवेदन और आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं, तो ऐसे मामलों में प्रशासनिक देरी की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

जनता का सवाल, आखिर जिम्मेदार कौन?

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र प्रत्येक नागरिक का मूल दस्तावेज है। इसके बिना बच्चों की शिक्षा, सरकारी योजनाओं का लाभ, बीमा क्लेम और कई कानूनी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। ऐसे में महीनों तक प्रमाण पत्र लंबित रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन, स्थानीय सांसद और विधायक से मांग की है कि लंबित आवेदनों की विशेष समीक्षा कर शीघ्र प्रमाण पत्र जारी कराया जाए। साथ ही जिन मामलों में रिकॉर्ड गायब हैं या अनावश्यक देरी हुई है, उनकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र केवल एक कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि हर नागरिक का कानूनी अधिकार है। इसे समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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