किरीबुरू से सैडल गेट तक दर्जनों अंधे मोड़ बने जानलेवा, तेज रफ्तार और लापरवाही से हर दिन मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा के घने जंगलों के बीच स्थित किरीबुरू से सैडल गेट तक की मुख्य सड़क इन दिनों गंभीर सुरक्षा संकट से गुजर रही है। बरसात के मौसम में सड़क के दोनों ओर उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियां, पेड़-पौधे और घास ने सड़क को संकीर्ण बना दिया है। सबसे चिंताजनक स्थिति घाटी के उन दर्जनों तीखे और अंधे मोड़ों की है, जहां सामने से आने वाले वाहन अंतिम क्षण तक दिखाई नहीं देते। ऐसे में हर सफर हादसे की आशंका के बीच तय हो रहा है।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि समय रहते झाड़ियों की कटाई नहीं कराई गई तो किसी भी दिन बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।
अंधे मोड़ों पर बढ़ा जान का खतरा
किरीबुरू से सैडल गेट के बीच कई गहरी घाटियां और तीखे मोड़ हैं। बरसात में सड़क किनारे उगी झाड़ियां इतनी घनी हो गई हैं कि मोड़ पर सामने से आने वाला वाहन दिखाई ही नहीं देता। ऐसे में अचानक आमने-सामने वाहन आने से दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार चालक केवल अपनी सूझबूझ और समय रहते ब्रेक लगाने की वजह से बड़ी दुर्घटनाओं से बच पाए हैं।

पहले हर साल होती थी झाड़ियों की कटाई
ग्रामीणों के अनुसार पहले सेल प्रबंधन और वन विभाग आपसी समन्वय से हर वर्ष बरसात शुरू होने से पहले या बारिश के दौरान सड़क के दोनों ओर उगी झाड़ियों और पेड़-पौधों की नियमित कटाई कराते थे। इससे वाहन चालकों को दूर से सामने आने वाले वाहन दिखाई देते थे और दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम रहती थी।
लेकिन इस वर्ष अब तक ऐसी कोई पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
संकीर्ण होती सड़क, बढ़ती परेशानी
झाड़ियों के तेजी से फैलने के कारण सड़क की चौड़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर बड़े वाहनों के क्रॉसिंग के दौरान चालकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
वाहन चालकों का कहना है कि दृश्यता कम होने और सड़क संकरी होने के कारण हर समय सतर्क रहना पड़ता है।
बस चालकों की लापरवाही भी बन रही खतरा
स्थानीय लोगों ने कुछ यात्री बस चालकों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ चालक घाटी की लंबी ढलान पर मामूली डीजल बचाने के उद्देश्य से बस को न्यूट्रल गियर में तेज गति से नीचे उतारते हैं।
ऐसी स्थिति में बस की रफ्तार अचानक बढ़ जाती है और तीखे मोड़ों पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार छोटी गाड़ियां ऐसे वाहनों की चपेट में आने से बाल-बाल बची हैं।

कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
घाटी के अंधे मोड़, सड़क किनारे घनी झाड़ियां और कुछ चालकों की कथित लापरवाही मिलकर इस मार्ग को बेहद जोखिमपूर्ण बना रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी दिन बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।
प्रशासन और संबंधित विभाग से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सेल प्रबंधन, वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि किरीबुरू-सैडल गेट मार्ग के दोनों ओर उगी झाड़ियों की तत्काल कटाई कराई जाए। साथ ही घाटी क्षेत्र में यात्री वाहनों की गति पर निगरानी रखी जाए और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
सुरक्षा इंतजार नहीं करती
सारंडा की यह सड़क हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में सड़क की साफ-सफाई, दृश्यता बनाए रखना और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए तो संभावित दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है, अन्यथा एक बड़ी घटना के बाद कार्रवाई करना केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।











