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20 दिन का समय मांगने पर टला चक्का जाम, लेकिन 13 जुलाई से 10 गांवों में पेयजल ठप

On: August 1, 2026 12:38 PM
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10 करोड़ की जलापूर्ति योजना पर उठे गंभीर सवाल, बिजली संकट और अधूरे कार्यों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

सारंडा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा स्थित छोटानागरा पंचायत की लगभग 10 करोड़ रुपये की बाईहातु-आसन ग्रामीण जलापूर्ति योजना पूरी तरह सवालों के घेरे में है। 13 जुलाई से पंचायत के सभी 10 गांवों और उनके विभिन्न टोलों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बंद है। नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं निकल रही है। हजारों ग्रामीण बारिश के मौसम में नदी-नालों और अन्य असुरक्षित जल स्रोतों का पानी पीने को मजबूर हैं। इस बीच पंचायत में लगातार बनी बिजली की समस्या ने हालात को और भी गंभीर बना दिया है।

पेयजल और बिजली संकट को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच मनोहरपुर प्रखंड कार्यालय में बीडीओ शक्तिकुंज की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रशासन ने सभी समस्याओं के समाधान के लिए 20 दिनों का समय मांगा, जिसके बाद फिलहाल प्रस्तावित चक्का जाम आंदोलन स्थगित कर दिया गया।

बैठक में ग्रामीणों ने खोला समस्याओं का पिटारा

बैठक में छोटानागरा पंचायत के विभिन्न गांवों के मुंडा विनोद बारीक, कानू राम देवगम, मंचूडिया सिद्धू, राम लाल चांपिया, पूर्व जिला परिषद सदस्य बामिया माझी, दुलाल आइंद, अमित दास सहित कई ग्रामीण प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने पेयजल, बिजली और अधूरी विकास योजनाओं से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से प्रशासन के समक्ष रखा।

13 जुलाई से ठप है पेयजल आपूर्ति

ग्रामीणों ने बताया कि 13 जुलाई से जलापूर्ति पूरी तरह बंद है। पूरे पंचायत के लोग पीने के पानी के लिए भटक रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है, जबकि कई परिवार नदी-नालों का दूषित पानी उपयोग करने को मजबूर हैं।

टेंडर खत्म, प्लांट में लगा ताला

ग्रामीणों के अनुसार जलापूर्ति योजना का संचालन कर रही ठेका एजेंसी का टेंडर समाप्त होने के बाद बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के पानी की आपूर्ति रोक दी गई। फिल्टर प्लांट के कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने की बात कहकर प्लांट में ताला लगा दिया और काम छोड़ दिया। इसके बाद पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था ठप हो गई।

10 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरी योजना

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पंचायत के कई गांवों और टोलों तक आज भी पाइपलाइन और नल कनेक्शन नहीं पहुंचे हैं। दुबील, राजबेड़ा, बहदा, सोनापी, धर्मारगुट्टू, रोडुवा सहित कई बस्तियों के लोग आज भी योजना के लाभ से वंचित हैं।

बिजली संकट ने बढ़ाई परेशानी

बैठक में ग्रामीणों ने पंचायत की बदहाल बिजली व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती होती है और कई बार घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप रहती है। बार-बार बिजली बाधित होने से जलापूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित होती है और लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति को नियमित करने और तकनीकी खराबियों को तत्काल दूर करने की मांग की।

भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलापूर्ति योजना के निर्माण और संचालन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि यदि योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन हुआ होता तो आज करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी के लिए नहीं तरसना पड़ता। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

पंचायत पर जिम्मेदारी थोपने का विरोध

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जलापूर्ति योजना पंचायत को सौंपी जाती है तो फिल्टर प्लांट का बिजली बिल, रखरखाव, मरम्मत और कर्मचारियों का वेतन कौन देगा? जब योजना अभी तक पूरी भी नहीं हुई, तब उसका संचालन पंचायत पर थोपना उचित नहीं है।

मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में बढ़ा स्वास्थ्य खतरा

छोटानागरा पंचायत पहले से ही मलेरिया प्रभावित क्षेत्र है। ऐसे में दूषित पानी पीने की मजबूरी से डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द जलापूर्ति बहाल नहीं हुई तो स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।

20 दिन में समाधान का भरोसा

बैठक में बीडीओ शक्तिकुंज ने संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर पेयजल एवं बिजली की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने सभी समस्याओं के निराकरण के लिए 20 दिनों का समय मांगा।

फिलहाल टला आंदोलन, चेतावनी बरकरार

बीडीओ के आश्वासन और स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए ग्रामीण प्रतिनिधियों ने 11 अगस्त से छोटानागरा चौक पर प्रस्तावित अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 20 दिनों के भीतर पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हुई, बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और अधूरे कार्य पूरे नहीं किए गए तो ग्रामीण फिर सड़क पर उतरेंगे।

अब प्रशासन की परीक्षा

बैठक के बाद फिलहाल आंदोलन टल गया है, लेकिन अब प्रशासन के पास केवल 20 दिन का समय है। यदि इस अवधि में पेयजल और बिजली संकट का समाधान नहीं हुआ तथा योजना की खामियां दूर नहीं की गईं, तो छोटानागरा पंचायत में जनाक्रोश एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। अब पूरे सारंडा की निगाह प्रशासन के अगले कदम और उसके वादों पर टिकी हुई है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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