मरम्मत कार्य के दौरान करंट लगने से रवि चाम्पिया की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
शव के साथ घंटों धरना, विभागीय अधिकारियों पर एफआईआर की मांग; आश्वासन के बाद भी परिजन लिखित आदेश पर अड़े
रिपोर्ट : संदीप गुप्ता
पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत दुधबिला पंचायत के बेतेरकेया गांव में गुरुवार सुबह बिजली विभाग में कार्यरत 40 वर्षीय बिजली मिस्त्री रवि चाम्पिया की 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब वह नियमित मरम्मत कार्य के तहत पोल पर चढ़कर बिजली के तार जोड़ रहे थे। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने शव के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता तथा सहायक अभियंता पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

मरम्मत के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, रवि चाम्पिया रोज की तरह गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे 11 हजार वोल्ट विद्युत लाइन की मरम्मत के लिए पोल पर चढ़े थे। इसी दौरान वे अचानक करंट की चपेट में आ गए। करंट इतना तेज था कि उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। हादसे की सूचना मिलते ही विभागीय कर्मियों, ग्रामीणों और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
सुरक्षा उपकरण नहीं मिलने का आरोप
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि बिजली मिस्त्रियों को पर्याप्त सेफ्टी किट, सुरक्षा बेल्ट, इंसुलेटेड ग्लव्स और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिसके कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कराया जाता तो संभवतः रवि चाम्पिया की जान बचाई जा सकती थी।
मुआवजा, नौकरी और एफआईआर की मांग
घटना के बाद परिजनों ने मृतक के आश्रित को सरकारी नौकरी, 20 लाख रुपये मुआवजा तथा घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर कई घंटों तक शव के साथ धरना-प्रदर्शन किया।
परिजनों का आरोप है कि सुबह हादसा होने के बावजूद देर शाम तक विभाग की ओर से कोई संतोषजनक लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। उनका कहना था कि केवल मौखिक भरोसे से काम नहीं चलेगा और जब तक मांगों पर लिखित आदेश नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
20 हजार से 50 हजार की तत्काल सहायता, 10 लाख मुआवजे का आश्वासन
परिजनों के अनुसार, चाईबासा के कार्यपालक अभियंता से हुई बातचीत में विभाग की ओर से प्रारंभिक सहायता के रूप में 20 हजार से 50 हजार रुपये उपलब्ध कराने, मृतक के आश्रित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।
हालांकि, परिजनों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक इन आश्वासनों का लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
जनप्रतिनिधियों ने की न्याय की मांग
घटना की सूचना मिलते ही आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारी के परिवार के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने सरकार और बिजली विभाग से मृतक के आश्रित को तत्काल सरकारी नौकरी, सम्मानजनक मुआवजा तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
शुक्रवार को विभागीय कार्यालय के घेराव की चेतावनी
परिजनों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो शुक्रवार को संबंधित बिजली विभाग के कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है, जबकि पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा देते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना विभाग की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी फील्ड कर्मचारियों को आधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।












