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आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा किरीबुरू-मेघाहातुबुरु, पारंपरिक वेशभूषा में निकली भव्य शोभायात्रा

On: August 8, 2026 7:43 PM
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आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा किरीबुरू-मेघाहातुबुरु, पारंपरिक वेशभूषा में निकली भव्य शोभायात्रा
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ढोल-मांदर और नगाड़ा की थाप पर जमकर थिरके महिला-पुरुष, विश्व आदिवासी दिवस समारोह में शामिल होने का दिया निमंत्रण

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को किरीबुरू-मेघाहातुबुरु शहर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और एकजुटता के रंग में रंगा नजर आया। आदिवासी संयुक्त मंच, किरीबुरू-मेघाहातुबुरु के बैनर तले कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में भव्य शोभायात्रा निकाली।
शोभायात्रा में महिलाएं एवं पुरुष पारंपरिक परिधान एवं आभूषणों से सुसज्जित होकर शामिल हुए। ढोल, मांदर, नगाड़ा और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच महिला-पुरुषों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हुए शहर का भ्रमण किया। शोभायात्रा के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली।

 

विश्व आदिवासी दिवस समारोह में आने का दिया निमंत्रण

शोभायात्रा का मुख्य उद्देश्य 9 अगस्त को सामुदायिक भवन, मेघाहातुबुरु में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस समारोह के लिए समाज के लोगों को आमंत्रित करना था। आयोजकों ने क्षेत्र के तमाम आदिवासी समाज के लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की।
इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस समारोह की थीम “अधिकारों की रक्षा और संस्कृति का सम्मान” रखी गई है। आयोजकों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा, कला और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली में निहित है। इसे संरक्षित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बिरसा मुंडा, डॉ. अंबेडकर और नेताजी को किया नमन

शोभायात्रा के दौरान भगवान बिरसा मुंडा, डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने इन महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

पारंपरिक नृत्य ने बांधा समां

शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और पुरुषों ने ढोल-मांदर की थाप पर सामूहिक नृत्य किया। जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से पूरा वातावरण उत्सवी हो गया।

शोभा यात्रा के दौरान ये रहे मौजूद 

इस अवसर पर मानकी मुंडा संघ के केंद्रीय अध्यक्ष गणेश पाठ पिंगुवा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय महासचिव गब्बर सिंह हेंब्रम, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला सचिव ऑयबन हेंब्रम, समाजसेवी सुश्री चंद्रकला खंडाइत, मुखिया पार्वती कीड़ो, मुखिया लिपि मुंडा, उप मुखिया सुमन मुंडू, बीर सिंह मुंडा, गोपी लागुरी, इलियास चांपिया, माधव चंद्र कोड़ा, बीरबल गुड़िया, शांतियल भेंगरा, एस. होरो, आलोक अजय टोपनो, प्रदीप चातर, डुम्बी हेंब्रम, फ्रांसिस मुंडा सहित दर्जनों पदाधिकारी, सदस्य एवं समाज के लोग मौजूद रहे।


आयोजकों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों, सम्मान, संस्कृति और पहचान की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है।

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