त्रिपक्षीय वार्ता के बाद प्रबंधन और मजदूर संगठनों में बनी सहमति, पत्नी को नौकरी या फैमिली बेनिफिट स्कीम में विकल्प चुनने का अधिकार
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। गुवा सेल खदान में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दिवेंदु दास (32) की मौत के बाद मृतक के आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से जारी मजदूरों का चक्का जाम सोमवार को समाप्त हो गया। सेल गुवा प्रबंधन और विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच सोमवार, 17 अगस्त 2026 को हुई विस्तृत वार्ता के बाद प्रबंधन ने मृत अधिकारी के एक आश्रित को नियमानुसार नौकरी देने की प्रक्रिया पर सहमति जताई। इसके बाद मजदूर संगठनों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति दे दी।

शाम चार बजे फिर शुरू हुई वार्ता
सुबह की बैठक में एक महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रबंधन और यूनियनों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण वार्ता स्थगित हो गई थी। इसके बाद सोमवार शाम करीब 4 बजे पुनः वार्ता शुरू हुई। इस दौरान प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच मृत अधिकारी के परिवार को मिलने वाले लाभ तथा आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में प्रबंधन की ओर से सीजीएम गुवा माइंस सी.बी. कुमार और जीएम (एडमिनिस्ट्रेशन) अर्णब डे मौजूद रहे। वहीं विभिन्न मजदूर संगठनों की ओर से रमा पांडेय, झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, निर्मलजीत सिंह, सारंडा मजदूर यूनियन, पंचम जोर सोए, झारखंड मजदूर मोर्चा, विश्वजीत कांति, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन, राकेश कुमार, सीटू तथा तुफान घोष, इंटक सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सुबह अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार पर अटका था मामला
बैठक के दौरान सुबह मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा अटक गई थी कि मृत कर्मचारी के परिजन अनुकंपा नियुक्ति के हकदार हैं अथवा नहीं। प्रबंधन इस विशेष बिंदु पर तत्काल सहमति जताने को तैयार नहीं था। इसी बीच अधिकारियों के संगठन की शीर्ष संस्था SEFI के महासचिव संजय आर्या भी वार्ता में शामिल हुए। हालांकि नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण वह अधिक देर तक चर्चा में शामिल नहीं रह सके।
बैठक के दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने मृत अधिकारी की पत्नी से मुलाकात की है और परिवार की स्थिति से भी अवगत हुए हैं।
यूनियनों ने पत्नी को विकल्प देने की मांग रखी
मजदूर संगठनों का कहना था कि दिवेंदु दास की पत्नी को यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वह अनुकंपा नियुक्ति अथवा मृत्यु की स्थिति में मिलने वाले फैमिली बेनिफिट स्कीम में से किसी एक का चयन कर सकें।
यूनियनों की इस मांग को प्रबंधन के साथ हुई सुलह वार्ता में शामिल किया गया। हालांकि इस स्तर पर प्रबंधन ने अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता अथवा मांग की वैधानिक स्वीकार्यता के संबंध में कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की।
दोनों लाभ एक साथ नहीं मिलेंगे
वार्ता के दौरान यह महत्वपूर्ण बात सामने आई कि अनुकंपा नियुक्ति और फैमिली बेनिफिट स्कीम के तहत मिलने वाले लाभ को एक-दूसरे का विकल्प माना गया है। यानी दोनों लाभ एक साथ लेने के बजाय परिवार को लागू नियमों के अनुसार किसी एक विकल्प का चयन करना होगा।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि मृत अधिकारी की पत्नी अपनी इच्छा के अनुसार यह विकल्प चुन सकती हैं और जिस लाभ को प्राप्त करना चाहती हैं, उसके लिए संबंधित प्रतिनिधित्व अथवा आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं।

आवेदन मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी करेगा निर्णय
प्रबंधन की ओर से कहा गया कि मृत अधिकारी की पत्नी द्वारा संबंधित लाभ के लिए आवेदन अथवा प्रतिनिधित्व प्राप्त होने के बाद सक्षम प्राधिकारी उस पर लागू नियमों और संबंधित योजना के प्रावधानों के अनुसार विचार करेगा तथा नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश संबंधित आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है, तो केवल आवेदन के अस्वीकार होने के कारण पात्र परिवार के सदस्य फैमिली बेनिफिट स्कीम के तहत मिलने वाले लाभ के लिए अपने अधिकार से वंचित नहीं होंगे। लागू योजना के अनुसार उनके मामले पर विचार किया जा सकेगा।
प्रबंधन के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त
लंबी वार्ता के बाद प्रबंधन की ओर से दिए गए आश्वासन और एक आश्रित को नौकरी देने की सहमति के बाद मजदूर संगठनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही पिछले तीन दिनों से गुवा सेल खदान में चल रहा चक्का जाम खत्म हो गया।
मजदूरों द्वारा खदान में जाने वाली बसों को रोके जाने के कारण पिछले तीन दिनों से गुवा सेल खदान में लौह अयस्क का उत्पादन और डिस्पैच बुरी तरह प्रभावित था। आंदोलन समाप्त होने के बाद अब खदान में सामान्य कामकाज और उत्पादन बहाल होने की उम्मीद है।
दिवेंदु दास की मौत के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
गौरतलब है कि 15 अगस्त को गुवा सेल खदान में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दिवेंदु दास की तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद मजदूरों और विभिन्न यूनियनों ने मृत अधिकारी के परिवार को उचित मुआवजा और एक आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था।
मजदूरों का कहना था कि दिवेंदु दास अपने वृद्ध माता-पिता के इकलौते वारिस थे और उनकी शादी को भी करीब एक वर्ष ही हुआ था। परिवार की स्थिति को देखते हुए उनकी पत्नी को नौकरी देने की मांग को लेकर मजदूर संगठन लगातार दबाव बनाए हुए थे।
समझौते के बाद तीन दिन से बंद आंदोलन समाप्त
सोमवार शाम हुई वार्ता के बाद प्रबंधन और यूनियनों के बीच बनी सहमति को आंदोलन समाप्त करने का आधार बनाया गया। यूनियनों ने भी प्रबंधन के आश्वासन के बाद जारी चक्का जाम वापस लेने पर सहमति जताई। इस तरह तीन दिनों से गुवा सेल में चल रहा मजदूर आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है और अब मृत अधिकारी के परिवार को लागू नियमों के तहत मिलने वाले लाभ तथा नौकरी की प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।














