सारंडा विकास समिति ने माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप, 1800 स्थानीय रोजगार समेत चार मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। सेल गुवा खदान के अधीन रंजाबुरू खदान में स्थानीय रोजगार और कार्यों में भागीदारी को लेकर विवाद अब टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया ने माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी पर पूर्व में किए गए लिखित समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए 10 अक्टूबर से रंजाबुरू खदान के सभी तरह के कार्यों की अनिश्चितकालीन बंदी की घोषणा की है।
समिति के अध्यक्ष राजू सांडिल ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर कंपनी के साथ लिखित समझौता हुआ था, लेकिन समझौते के बावजूद अब तक मांगों को धरातल पर लागू नहीं किया गया। समिति अब केवल आश्वासन के भरोसे पीछे हटने के मूड में नहीं है।

1800 स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा
राजू सांडिल के अनुसार समिति की प्रमुख मांगों में माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी में सीएसआर प्रभावित गांवों के 100×18, यानी कुल 1800 स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराना शामिल था। समिति का कहना है कि स्थानीय क्षेत्र की खदानों और परियोजनाओं में बाहरी लोगों को अवसर देने के बजाय प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं के सामने बेरोजगारी की गंभीर समस्या है और खनन क्षेत्र में काम होने के बावजूद यदि प्रभावित गांवों के युवक रोजगार से वंचित रहें तो यह स्थानीय लोगों के साथ अन्याय है।
रेलवे साइडिंग का रेक लोडिंग काम भी समिति को देने की मांग
समिति ने रेलवे साइडिंग में रेक लोडिंग का कार्य सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया को देने की मांग की है। समिति का आरोप है कि इस संबंध में भी कंपनी के साथ सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक मांग को लागू नहीं किया गया।
राजू सांडिल ने कहा कि स्थानीय लोगों और समिति को रोजगार से जोड़ने के लिए जिन कार्यों पर सहमति बनी, उनमें से किसी को भी अपेक्षित रूप से जमीन पर उतारा नहीं गया।
खदान से रेलवे साइडिंग तक ट्रांसपोर्टिंग पर भी आर-पार
समिति की तीसरी प्रमुख मांग रंजाबुरू खदान से रेलवे साइडिंग तक होने वाले ट्रांसपोर्टिंग कार्य को सारंडा विकास समिति के माध्यम से संचालित करने की है।
समिति के अनुसार लिखित समझौते में कहा गया था कि सीटीओ प्राप्त होने के बाद इस मांग पर समिति के साथ आवश्यक बैठक कर नियम के अनुसार कार्य पूर्ण किया जाएगा। लेकिन समिति का कहना है कि अब तक इस दिशा में भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सड़क पर पानी छिड़काव का काम भी बना विवाद का कारण
रंजाबुरू खदान में सड़क पर पानी के छिड़काव के लिए टैंकर संचालन का कार्य भी समिति को देने की मांग की गई थी। समिति के अनुसार इस मांग को कंपनी ने लिखित रूप से स्वीकार किया था, बावजूद इसके इसे भी अब तक लागू नहीं किया गया।
‘समझौता हुआ, लेकिन अमल नहीं हुआ’—राजू सांडिल
समिति अध्यक्ष राजू सांडिल ने कहा कि मांग पत्र की पहली और चौथी मांग को माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी ने स्वीकार किया था, जबकि दूसरी और तीसरी मांग को सीटीओ मिलने के बाद बैठक कर नियम के अनुसार पूरा करने की बात लिखित रूप से कही गई थी।
लेकिन समिति का आरोप है कि समझौते के बाद भी एक भी मांग पूरी तरह लागू नहीं की गई।
10 अक्टूबर से खदान में पूर्ण अनिश्चितकालीन बंदी
राजू सांडिल ने स्पष्ट किया कि अब समिति ने 10 अक्टूबर से रंजाबुरू खदान में सभी प्रकार के कार्यों की अनिश्चितकालीन बंदी का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जब तक समिति की मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक बंदी जारी रहेगी।
समिति ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि बंदी शुरू होने की तिथि से लेकर मांगों पर अंतिम फैसला होने तक होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति, हानि अथवा आय के नुकसान की जिम्मेदारी माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी, संवेदक एवं सेल प्रबंधन गुवा की होगी।
‘अब आश्वासन नहीं, मांगों का जमीन पर क्रियान्वयन चाहिए’
राजू सांडिल ने कहा कि सारंडा क्षेत्र के ग्रामीण वर्षों से रोजगार और स्थानीय भागीदारी की मांग उठाते रहे हैं। कंपनियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच बातचीत एवं समझौते के बाद भी यदि मांगें लागू नहीं होती हैं तो ग्रामीणों के सामने आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
उन्होंने कहा कि समिति शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रयास करती रही है, लेकिन लिखित समझौते के बावजूद मांगें लंबित रहने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। अब समिति तब तक पीछे नहीं हटेगी, जब तक लिखित समझौते के अनुरूप मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।

प्रधानमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक भेजी गई प्रतिलिपि
अनिश्चितकालीन बंदी संबंधी पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय खान मंत्री, झारखंड के मुख्यमंत्री, झारखंड के खान मंत्री तथा पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
अब देखना होगा कि 10 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन बंदी से रंजाबुरू खदान में खनन एवं उससे जुड़े कार्यों पर क्या असर पड़ता है और सेल प्रबंधन तथा संबंधित कंपनी स्थानीय ग्रामीणों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाती है।










