झारखंड में लघु खनिजों की दरों का नया गणित। पत्थर, गिट्टी और बालू पर प्रति घनमीटर देय राशि की तस्वीर स्पष्ट
रॉयल्टी के बराबर डेड रेंट, साथ में DMFT, प्रबंधन शुल्क और पर्यावरण उपकर
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू। झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से जारी लघु खनिजों से संबंधित दरों की तालिका में खनिजों के विरुद्ध देय राशि का विस्तृत ब्योरा सामने आया है। इस तालिका में पत्थर, गिट्टी, बालू, मोरम, ईंट बनाने की मिट्टी और स्टोन डस्ट सहित विभिन्न लघु खनिजों के लिए रॉयल्टी, डेड रेंट, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) अंशदान, प्रबंधन शुल्क और पर्यावरण उपकर को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि खनिजों के उत्खनन और परिवहन से जुड़ी लागत निर्धारित करने में केवल रॉयल्टी ही नहीं, बल्कि अन्य देय मदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

रॉयल्टी के साथ कई मदों का भुगतान
तालिका के अनुसार, खनिजों पर रॉयल्टी के अतिरिक्त 100 प्रतिशत डेड रेंट, रॉयल्टी का 30 प्रतिशत DMFT अंशदान, प्रति टन निर्धारित प्रबंधन शुल्क और रॉयल्टी का एक प्रतिशत पर्यावरण उपकर दर्शाया गया है। इन मदों को जोड़कर कुल देय राशि निकाली गई है।
हालांकि, अलग-अलग खनिजों के लिए दरें और गणना की इकाइयां अलग हैं। इसलिए किसी भी खनिज की अंतिम देय राशि निर्धारित करते समय संबंधित खनिज की दर, मात्रा और लागू नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
किस खनिज पर कितनी देय राशि?
तालिका में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख खनिजों की दरें इस प्रकार हैं—
1. पत्थर (बोल्डर): रॉयल्टी 132 रुपये, डेड रेंट 132 रुपये, DMFT अंशदान 39.60 रुपये, प्रबंधन शुल्क 2.80 रुपये और पर्यावरण उपकर 1.32 रुपये दर्शाया गया है। कुल देय राशि 307.72 रुपये है।
2. पत्थर (गिट्टी/मेटल एवं अन्य): रॉयल्टी 250 रुपये, डेड रेंट 250 रुपये, DMFT अंशदान 75 रुपये, प्रबंधन शुल्क 1.60 रुपये और पर्यावरण उपकर 2.50 रुपये है। कुल देय राशि 579.10 रुपये दर्शाई गई है।
3. बालू: रॉयल्टी 50 रुपये, डेड रेंट 50 रुपये, DMFT अंशदान 15 रुपये, प्रबंधन शुल्क 1.92 रुपये और पर्यावरण उपकर 0.50 रुपये है। कुल देय राशि 117.42 रुपये दर्ज है।
4. मोरम: रॉयल्टी 38 रुपये, डेड रेंट 38 रुपये, DMFT अंशदान 11.40 रुपये, प्रबंधन शुल्क 1.92 रुपये और पर्यावरण उपकर 0.38 रुपये है। कुल देय राशि 89.70 रुपये है।
5. ईंट बनाने की मिट्टी: तालिका में रॉयल्टी और डेड रेंट 90 रुपये प्रति 1000 इकाई के आधार पर दर्शाए गए हैं। DMFT अंशदान 27 रुपये, प्रबंधन शुल्क 3.50 रुपये और पर्यावरण उपकर 0.90 रुपये दर्ज है। कुल देय राशि 211.40 रुपये प्रति 1000 इकाई दर्शाई गई है।
6. स्टोन डस्ट: रॉयल्टी 30.97 रुपये, डेड रेंट 30.97 रुपये, DMFT अंशदान 9.29 रुपये, प्रबंधन शुल्क 1.92 रुपये और पर्यावरण उपकर 0.31 रुपये है। कुल देय राशि 73.46 रुपये दर्ज है।
7. मिट्टी: रॉयल्टी 20 रुपये, डेड रेंट 20 रुपये, DMFT अंशदान 6 रुपये, प्रबंधन शुल्क 1.28 रुपये और पर्यावरण उपकर 0.20 रुपये है। कुल देय राशि 47.48 रुपये दर्शाई गई है।
निर्माण सामग्री की लागत पर पड़ सकता है असर
पत्थर, गिट्टी, बालू और मोरम जैसी सामग्री का इस्तेमाल मकान, सड़क, पुल-पुलिया और अन्य निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में खनिजों पर लागू देय मदों की जानकारी निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों, खनिज कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
खनिज की कीमत केवल सरकारी देय राशि से तय नहीं होती। इसमें उत्खनन, मजदूरी, मशीनरी, लोडिंग-अनलोडिंग, परिवहन और अन्य खर्च भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए तालिका में दी गई राशि को सीधे बाजार मूल्य या उपभोक्ता तक पहुंचने वाली अंतिम कीमत मानना उचित नहीं होगा।
DMFT और पर्यावरण उपकर का महत्व
DMFT अंशदान का संबंध खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के वित्तपोषण से है। वहीं, पर्यावरण उपकर खनिजों से संबंधित निर्धारित वित्तीय देयताओं का हिस्सा है। इन मदों की सही गणना और नियमानुसार जमा होना महत्वपूर्ण है, ताकि सरकारी राजस्व और खनन प्रभावित क्षेत्रों के हितों की रक्षा की जा सके।
दरों के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
खनिजों की निर्धारित दरों के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, सही माप-तौल, वैध परिवहन दस्तावेज और राजस्व जमा करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। संबंधित विभाग और प्रशासन यह सुनिश्चित करें कि खनिजों का कारोबार लागू नियमों के अनुसार हो तथा निर्धारित राजस्व की वसूली में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।









