सरकारी निर्माण कार्यों में वैध चालान से खनिज खरीदना अनिवार्य
नियम तोड़ने पर ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को देना होगा अतिरिक्त जुर्माना
खान एवं भूतत्व विभाग ने लघु खनिज समनुदान नियमावली में किया संशोधन
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू, 27 अक्टूबर 2026। झारखंड में अवैध खनन, खनिजों की अवैध ढुलाई और सरकारी विकास योजनाओं में बिना वैध चालान के लघु खनिजों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने नियमों को सख्त किया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने झारखंड लघु खनिज समनुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 जारी करते हुए ईंट-मिट्टी के अवैध उत्खनन तथा सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की खरीद और आपूर्ति से संबंधित प्रावधानों में बदलाव किया है।
विभाग की अधिसूचना संख्या ख०नि० (नीति)-05/2022, 2506, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 के अनुसार, ईंट-मिट्टी के मामले में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करने पर स्वामित्व शुल्क की दर से 10 गुना जुर्माना देना पड़ सकता है। वहीं, सरकारी विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों की वैध स्रोत से खरीद और वैध चालान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित कार्य विभागों, संवेदकों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं पर डाली गई है।

ईंट-मिट्टी के अवैध उत्खनन पर सख्त प्रावधान
संशोधित नियमावली के नियम-54 में ईंट-मिट्टी के अवैध उत्खनन, निकासी, भंडारण और परिवहन से संबंधित प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत कोई व्यक्ति अथवा उसकी ओर से कार्य करने वाला एजेंट, मैनेजर, कर्मचारी या ठेकेदार आवश्यक पट्टा, अनुज्ञप्ति अथवा अन्य वैध अनुमति के बिना ईंट-मिट्टी का उत्खनन या निकासी करता है, अथवा वैध अनुज्ञप्ति और चालान के बिना उसका भंडारण या परिवहन करता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अधिसूचना में ईंट-मिट्टी निकालने वालों और ईंट-भट्ठा मालिकों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। यदि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वामित्व शुल्क की समेकित राशि का पूर्ण भुगतान कर आवश्यक अनुज्ञापत्र प्राप्त करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें ईंट-मिट्टी पर लागू राजस्व दर के 10 गुना की दर से जुर्माना देना होगा।
इस प्रावधान से ईंट-भट्ठा संचालकों और मिट्टी निकालने वाले कारोबारियों के लिए वैध अनुमति तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो गया है।
सरकारी योजनाओं में खनिज खरीद का हिसाब देना होगा
संशोधन के तहत नियमावली में नया नियम-55 जोड़ा गया है। इसके अनुसार, सरकारी विकास कार्यों में इस्तेमाल किए जाने वाले लघु खनिजों की खरीद वैध खनन पट्टाधारकों या खनन अनुज्ञप्तिधारकों से वैध चालान के माध्यम से करना सुनिश्चित करना होगा।
यह जिम्मेदारी केवल खनिज आपूर्तिकर्ता तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित कार्य विभागों, संवेदकों और ठेकेदारों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्य में उपयोग किया गया खनिज वैध स्रोत से प्राप्त हुआ है और उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं।
सड़क, पुल-पुलिया, भवन और अन्य सरकारी निर्माण योजनाओं में बालू, पत्थर, गिट्टी तथा दूसरे लघु खनिजों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में खनिजों की खरीद और आपूर्ति से संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, प्रत्येक खनिज पर इस नियम की प्रयोज्यता उसके कानूनी वर्गीकरण और संबंधित प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होगी।

खनिज मूल्य के साथ अतिरिक्त जुर्माना भी
नए नियम-55 के तहत वैध चालान या वैध स्रोत से खनिज खरीद सुनिश्चित करने में विफल रहने पर संबंधित पक्षों को उपयोग किए गए अथवा आपूर्ति किए गए खनिज के खनिज मूल्य के साथ स्वामित्व शुल्क की दोगुनी के बराबर राशि जुर्माने के रूप में जमा करनी होगी।
इसके अतिरिक्त, अधिसूचना में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), मैनेजमेंट शुल्क, पर्यावरणीय सेस और आयकर जैसे मदों के समतुल्य राशि का भी उल्लेख किया गया है।
अधिसूचना में नए मामलों के लिए जुर्माने की गणना का सूत्र इस प्रकार दिया गया है—
जुर्माना राशि = (खनिज मूल्य + स्वामित्व शुल्क) × 2 + DMF + मैनेजमेंट शुल्क + पर्यावरणीय सेस + आयकर।
इसका उद्देश्य सरकारी निर्माण कार्यों में अवैध स्रोत से खनिजों की आपूर्ति और इस्तेमाल को हतोत्साहित करना तथा खनिज कारोबार में जवाबदेही बढ़ाना है।
पुराने मामलों में अलग तरीके से होगा जुर्माना निर्धारण
संशोधित नियमावली में पहले से उपयोग किए गए अथवा आपूर्ति किए गए खनिजों के मामलों के लिए भी अलग प्रावधान दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार, संशोधन लागू होने की तिथि से पहले के मामलों में जुर्माना निर्धारण के दौरान स्वामित्व शुल्क, DMF, मैनेजमेंट शुल्क, आयकर और पर्यावरणीय सेस जैसे मद शामिल किए जाएंगे।
इसलिए पुराने और नए मामलों में जुर्माने की गणना एक समान नहीं होगी। किसी विशेष मामले में लागू राशि निर्धारित करते समय अधिसूचना के मूल प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई गणना को देखना आवश्यक होगा।
सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई अधिसूचना
खान एवं भूतत्व विभाग ने अधिसूचना की प्रतिलिपि सभी विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों, खान निदेशक, भूतत्व निदेशक तथा संबंधित खनन अधिकारियों को सूचनार्थ और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है। विधि विभाग के प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी को भी इसकी प्रतिलिपि प्रेषित की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, झारखंड लघु खनिज समनुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 झारखंड राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी।
सरकार के इस कदम से खनिजों की वैध खरीद, आपूर्ति और परिवहन पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में पहल हुई है। अब संबंधित कारोबारियों, ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और कार्य विभागों के लिए आवश्यक अनुमति, वैध चालान तथा निर्धारित शुल्क से जुड़े नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा। नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन ही अवैध खनन पर अंकुश लगाने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक साबित होगा।









