चाईबासा के लघु सिंचाई और ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की निविदाओं से जुड़ी जानकारी नहीं मिलने पर उठे सवाल
वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक की निविदाओं का मांगा था ब्योरा, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट शैलेश सिंह
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में सरकारी विकास योजनाओं की निविदाओं और उनमें संभावित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीण संवेदक संघ ने सवाल उठाए हैं। संघ के अध्यक्ष सुनील सिरका ने लघु सिंचाई प्रमंडल और ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, चाईबासा से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय में नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि आवेदन और प्रथम अपील के बावजूद पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, राज्य सूचना आयोग में शिकायत दिए जाने के 17 महीने से अधिक समय बाद भी सुनवाई नहीं होने का दावा करते हुए संघ ने 28 अक्टूबर को आयोग को दोबारा अनुस्मारक पत्र भेजा है।

छह वित्तीय वर्षों की निविदाओं का मांगा था ब्योरा
संघ के अध्यक्ष सुनील सिरका के अनुसार, फरवरी 2025 में दोनों विभागों से वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक की सरकारी निविदाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इसमें सभी निविदाओं की सूची, संवेदकों का तुलनात्मक विवरण (कंपरेटिव स्टेटमेंट), रद्द की गई निविदाओं के कारण तथा निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद लंबित कार्यों का बिंदुवार विवरण शामिल था।
संघ का कहना है कि इन जानकारियों से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विकास कार्यों की स्थिति का आकलन किया जा सकता था।
प्रथम अपील के बाद भी नहीं मिली पूरी जानकारी
सुनील सिरका के मुताबिक, निर्धारित अवधि में सूचना नहीं मिलने पर मार्च 2025 में प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के समक्ष अपील दायर की गई। इसके बावजूद ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, चाईबासा की ओर से केवल वित्तीय वर्ष 2019-20 की आंशिक जानकारी उपलब्ध कराई गई। संघ का आरोप है कि शेष वर्षों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां अब तक नहीं दी गई हैं।
14 मई 2025 को राज्य सूचना आयोग में लगाई थी गुहार
विभागों से अपेक्षित जानकारी नहीं मिलने के बाद संघ के अध्यक्ष ने 14 मई 2025 को राज्य सूचना आयोग, रांची में मुख्य सूचना आयुक्त के समक्ष आवेदन दिया था। संघ के अनुसार, आवेदन दिए जाने के बाद 17 महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो मामले की स्थिति की जानकारी मिली और न ही सुनवाई की तिथि निर्धारित होने की सूचना प्राप्त हुई है।
इस देरी को लेकर संघ ने आयोग से मामले में हस्तक्षेप करने और सूचना उपलब्ध कराने में कथित लापरवाही की जांच कराने की मांग की है।
रिमाइंडर भेजकर उठाए दो प्रमुख मुद्दे
संघ ने 28 अक्टूबर 2026 को राज्य सूचना आयोग को पत्रांक 16/26 एवं 17/26 के माध्यम से दो अलग-अलग अनुस्मारक पत्र भेजे हैं। इनमें आयोग से मुख्य रूप से दो मांगें की गई हैं।
- लंबित आवेदनों की स्थिति स्पष्ट हो: मई 2025 में दायर आवेदनों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए उनकी वर्तमान स्थिति से संघ को अवगत कराया जाए।
- सुनवाई और कार्रवाई सुनिश्चित हो: मामले की जल्द सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की जाए तथा जांच में सूचना छिपाने या नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग
सुनील सिरका ने आशंका जताई है कि निविदाओं और लंबित विकास कार्यों से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराए जाने के पीछे गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाला धन जनता का है और उसके उपयोग से संबंधित जानकारी प्राप्त करना नागरिकों का अधिकार है।
संघ अध्यक्ष का आरोप है कि विभागों की ओर से लगातार हो रही देरी और टालमटोल से पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावना की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति
ग्रामीण संवेदक संघ ने स्पष्ट किया है कि वह निविदाओं से संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर अपनी पहल जारी रखेगा। अब निगाहें राज्य सूचना आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
हालांकि, सरकारी निविदाओं में भ्रष्टाचार या वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में मांगी गई सूचनाओं की उपलब्धता, निविदा प्रक्रिया की जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











