खबर छपते ही हरकत में आया प्रखंड प्रशासन, BDO ने आंगनबाड़ी केंद्र का किया औचक निरीक्षण; भारी लापरवाही उजागर
तत्काल राशन, सब्जी और अंडे की व्यवस्था, आज से ही बच्चों के लिए शुरू हुआ पोषाहार
बगल के सरकारी स्कूल में दोनों सरकारी शिक्षक मिले गायब, सेल प्रबंधन के शिक्षक संभाल रहे थे बच्चों की पढ़ाई
सोमवार को विभागीय अधिकारियों की टीम करेगी दोबारा जांच, नियमित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश
रिपोर्ट शैलेश सिंह
किरीबुरू। सारंडा के अति पिछड़े जाजोगुट्टू गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में पिछले डेढ़ महीने से 30-35 मासूम बच्चों को भोजन नहीं मिलने की खबर प्रकाशित होने के बाद आखिरकार प्रखंड प्रशासन की नींद टूटी। खबर का असर ऐसा हुआ कि मनोहरपुर प्रखंड के बीडीओ शक्तिकुंज ने शनिवार को स्वयं आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में भारी लापरवाही सामने आई। इसके बाद बीडीओ ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बच्चों के लिए खाद्यान्न सामग्री, अंडा समेत अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। प्रशासन की पहल के बाद आज से ही केंद्र में बच्चों के लिए भोजन बनना प्रारंभ हो गया।

डेढ़ महीने बाद बच्चों की थाली में लौटी रौनक
पिछले डेढ़ महीने से जाजोगुट्टू के 30-35 बच्चे प्रतिदिन अपने घरों से थाली लेकर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचते थे, लेकिन भोजन नहीं बनने के कारण उन्हें खाली थाली लेकर वापस लौटना पड़ता था। इस गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी थी। खबर प्रकाशित होने के बाद बीडीओ शक्तिकुंज ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल खाद्यान्न की व्यवस्था कराई।
लगभग डेढ़ महीने बाद जब गरीब परिवारों के बच्चों की थाली में अंडे के साथ पोषक भोजन परोसा गया, तो बच्चों के चेहरे खिल उठे। बच्चों और उनके अभिभावकों में खुशी देखी गई। लंबे समय से भोजन की प्रतीक्षा कर रहे मासूमों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं था।

बीडीओ ने दिखाई तत्परता, नियमित भोजन का दिया भरोसा
निरीक्षण के दौरान बीडीओ शक्तिकुंज ने स्पष्ट किया कि अब आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि भविष्य में बच्चों को भोजन से वंचित नहीं रहना पड़े।
उन्होंने बताया कि सोमवार को विभागीय अधिकारियों की टीम पुनः जाजोगुट्टू गांव का दौरा करेगी और आंगनबाड़ी केंद्र में भोजन बंद रहने के पूरे मामले की जांच करेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आखिर डेढ़ महीने तक बच्चों को भोजन क्यों नहीं मिला और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

आंगनबाड़ी के बाद स्कूल पहुंचे BDO, दोनों सरकारी शिक्षक नदारद
आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के बाद बीडीओ शक्तिकुंज ने बगल में स्थित सरकारी विद्यालय का भी निरीक्षण किया। यहां भी शिक्षा व्यवस्था की एक और गंभीर तस्वीर सामने आई। निरीक्षण के दौरान विद्यालय के दोनों सरकारी शिक्षक अनुपस्थित मिले। वहीं, सेल प्रबंधन की ओर से नियुक्त शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हुए मिले।
एक ही गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की बदहाल व्यवस्था और सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जिन शिक्षकों को सरकार बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी देती है, वे विद्यालय से गायब क्यों थे? इस मामले में भी प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान और आवश्यक कार्रवाई की जरूरत है।

मुंडा कानू राम देवगम ने BDO की पहल को सराहा
जाजोगुट्टू गांव के मुंडा कानू राम देवगम ने बीडीओ शक्तिकुंज की तत्परता और पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को डेढ़ महीने से भोजन नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। प्रशासनिक अधिकारी ने खुद गांव पहुंचकर स्थिति देखी और तत्काल भोजन की व्यवस्था कराई, इससे गरीब ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सोमवार को होने वाली विभागीय जांच में लापरवाही के वास्तविक कारणों का खुलासा होगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होगी।

खबर का असर, लेकिन असली जवाबदेही जांच के बाद तय होगी
जाजोगुट्टू की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि दुर्गम और पिछड़े गांवों में सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। मीडिया में मामला उठने के बाद प्रशासन का सक्रिय होना निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन सवाल केवल आज भोजन शुरू कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
डेढ़ महीने तक बच्चों के हिस्से का पोषक भोजन क्यों बंद रहा? राशन की आपूर्ति में कहां बाधा आई? संबंधित जिम्मेदारों ने समय रहते इसकी सूचना विभाग को क्यों नहीं दी? और सरकारी विद्यालय के दोनों शिक्षक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित क्यों मिले?
इन सवालों का जवाब सोमवार को होने वाली विभागीय जांच से सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल जाजोगुट्टू के मासूमों की थाली में भोजन लौट आया है। अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन का यह प्रयास केवल खबर के बाद की तात्कालिक कार्रवाई बनकर न रह जाए, बल्कि बच्चों को नियमित पोषण और शिक्षा का अधिकार लगातार मिलता रहे।










