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बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए केंद्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरू का बड़ा संदेश

On: July 3, 2026 2:10 PM
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75% उपस्थिति, नियमित पढ़ाई और अनुशासन ही सफलता की कुंजी : प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

मेघाहातुबुरू स्थित केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य डॉ आशीष कुमार की अध्यक्षता में पेरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) का आयोजन किया गया। यह बैठक विशेष रूप से कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षार्थियों की शैक्षणिक तैयारी, अनुशासन, उपस्थिति और परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई। बैठक में विद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया।

बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर स्पष्ट रणनीति

बैठक में प्राचार्य डॉ आशीष कुमार ने बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साझा किए। प्राचार्य ने कहा कि बोर्ड परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की बुनियाद है। इसलिए इस समय लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।
उन्होंने बताया कि CBSE की गाइडलाइंस के अनुसार बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना अभिभावकों और विद्यालय दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

2026-27 से 10वीं बोर्ड में होगा नया बदलाव

बैठक में यह भी बताया गया कि सत्र 2026-27 से कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। अब विद्यार्थियों को प्रत्येक विषय में 80 अंकों की थ्योरी परीक्षा में न्यूनतम 27 अंक प्राप्त कर अलग से उत्तीर्ण होना होगा। केवल कुल अंकों के आधार पर पास होने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी।
प्राचार्य ने कहा कि यह बदलाव विद्यार्थियों की विषयगत समझ और गुणवत्ता आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगा।

अप्रैल मासिक परीक्षा के परिणामों की समीक्षा

बैठक में अप्रैल माह की मासिक परीक्षा के परिणाम अभिभावकों के साथ साझा किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए उनकी कमजोरियों और सुधार की संभावनाओं पर चर्चा की।
विद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे केवल अंक देखने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों की पढ़ाई की आदतों, समझ और व्यवहार पर भी ध्यान दें।

रेमेडियल क्लास से कमजोर विद्यार्थियों को मिलेगा सहारा

विद्यालय द्वारा कमजोर और औसत प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष रेमेडियल क्लासेस की शुरुआत की गई है। इसमें उन विद्यार्थियों को शामिल किया गया है जिन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
अभिभावकों से अपील की गई कि वे सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे इन विशेष कक्षाओं में नियमित रूप से शामिल हों।

“सिर्फ पास नहीं, प्रथम श्रेणी लक्ष्य हो” : प्राचार्य

प्राचार्य ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनका संपूर्ण विकास करना है।
उन्होंने कहा—
“हम बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, सांस्कृतिक गतिविधियों और राष्ट्रभक्ति की भावना से भी जोड़ते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बने।”
उन्होंने विशेष रूप से बोर्ड परीक्षार्थियों को मेहनत बढ़ाने की सलाह देते हुए कहा कि अब समय बहुत महत्वपूर्ण है।

जुलाई से सितंबर: मेहनत के सबसे महत्वपूर्ण महीने

प्राचार्य ने बताया कि जुलाई, अगस्त और सितंबर विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक महीने हैं। इन महीनों में कोई विशेष अवकाश नहीं है, इसलिए सभी विद्यार्थियों को नियमित विद्यालय आकर पढ़ाई में पूरा ध्यान देना चाहिए।
विद्यालय का लक्ष्य 31 अक्टूबर तक पूरे सिलेबस को समाप्त कर देना है ताकि नवंबर से रिवीजन और प्रैक्टिस टेस्ट पर पूरा फोकस किया जा सके।
उन्होंने कहा कि फरवरी में बोर्ड परीक्षा प्रारंभ हो जाती है और सितंबर के बाद त्योहारों व अन्य छुट्टियों के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए अभी की मेहनत ही सफलता तय करेगी।

कोचिंग संस्कृति पर भी उठे सवाल

प्राचार्य ने शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती कोचिंग निर्भरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को कोचिंग माफियाओं ने काफी हद तक प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस एकाधिकार को तोड़ने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठा रही है ताकि विद्यालय आधारित शिक्षा को और मजबूत बनाया जा सके।

अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम

बैठक में अभिभावकों से अपील की गई कि वे अपने बच्चों की दैनिक पढ़ाई, होमवर्क, मोबाइल फोन के उपयोग, अनुशासन और समय प्रबंधन पर विशेष नजर रखें।
साथ ही, क्लास टीचर और विषय शिक्षकों के साथ लगातार संवाद बनाकर बच्चों की प्रगति पर नजर रखने को कहा गया।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि यदि शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मिलकर काम करें तो बेहतर परिणाम निश्चित हैं।

शिक्षकों के प्रयास से बढ़ा औसत परिणाम

प्राचार्य ने खुशी जताते हुए बताया कि शिक्षकों और बच्चों की मेहनत और बेहतर शिक्षण पद्धति के कारण इस वर्ष विद्यार्थियों के औसत अंकों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह विद्यालय के लिए सकारात्मक संकेत है।
बैठक में विनय गौर, अंशुल, तनुश्री प्रधान, निधि, प्रियंका दुबे आदि शिक्षक, शिक्षिकाएं सहित दर्जनों अभिभावक उपस्थित रहे।

विद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस सामूहिक प्रयास से इस वर्ष बोर्ड परीक्षा परिणाम और भी बेहतर होंगे।

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