खनन उद्योग में सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने पर जोर
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
खनन उद्योग में बदलते श्रम कानूनों और सुरक्षा मानकों को लेकर टाटा स्टील के नोवामुंडी आयरन माइंस में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। महानिदेशक खान सुरक्षा (डीजीएमएस), चाईबासा क्षेत्र के तत्वावधान में आयोजित इस एकदिवसीय कार्यशाला में नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों, उनके प्रभावी क्रियान्वयन और खनन क्षेत्र में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई।
ऑफिसर्स क्लब, नोवामुंडी में आयोजित इस कार्यशाला का विषय था — “खनन उद्योग में व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (ओएसएच एंड डब्ल्यूसी) संहिता, 2020 की प्रयोज्यता पर विशेष बल के साथ विभिन्न श्रम संहिताओं के प्रावधान”। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खनन क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों और प्रबंधन को नई श्रम संहिताओं के प्रति जागरूक करना तथा उनके अनुपालन को और प्रभावी बनाना था।

विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार
कार्यशाला में निदेशक खान सुरक्षा (डीएमएस), चाईबासा क्षेत्र योहान येजेरला, उप निदेशक खान सुरक्षा (डीडीएमएस) मिथिलेश कुमार तथा भारत सरकार के पूर्व उप श्रम आयुक्त डॉ. तपस के. पांडा ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत डीजीएमएस एंथम के साथ हुई, जिसके बाद नोवामुंडी आयरन माइंस के चीफ डी. विजयेंद्र ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएं खनन उद्योग में सुरक्षित और जवाबदेह कार्य संस्कृति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
सुरक्षा संस्कृति को मिलेगी नई मजबूती
अपने संबोधन में डी. विजयेंद्र ने कहा कि इन नई श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कार्यस्थलों पर सुरक्षा और वैधानिक अनुपालन की संस्कृति को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खनन जैसे जोखिमपूर्ण उद्योग में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
तकनीकी सत्रों में हुआ गहन विमर्श
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने श्रम संहिताओं और उनसे जुड़े नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। योहान येजेरला ने ओएसएच एंड डब्ल्यूसी संहिता, 2020 के प्रमुख प्रावधानों और खनन क्षेत्र में उनकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संहिता श्रमिकों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद अहम है।
वहीं मिथिलेश कुमार ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (केंद्रीय नियम), 2026 के वैधानिक प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए खान प्रबंधन की जिम्मेदारियों को विस्तार से समझाया।
पुराने और नए कानूनों की तुलना
पूर्व उप श्रम आयुक्त डॉ. तपस के. पांडा ने नई श्रम संहिताओं और पुराने श्रम कानूनों के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि नए कानूनों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो उद्योगों को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाएंगे। उन्होंने खनन उद्योग पर इन बदलावों के प्रभावों का भी विश्लेषण किया।
टाटा स्टील और सेल के अधिकारी हुए शामिल
इस कार्यशाला में टाटा स्टील और (सेल) के लगभग 100 अधिकारियों और प्रबंधकीय कर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर नई कानूनी व्यवस्थाओं, सुरक्षा मानकों और वैधानिक अनुपालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी हासिल की।

सुरक्षित और स्वस्थ खनन की दिशा में अहम पहल
कार्यक्रम के अंत में डीजीएमएस, चाईबासा क्षेत्र के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया गया। साथ ही विशेषज्ञ वक्ताओं, टाटा स्टील के प्रतिनिधियों और आयोजन समिति के सदस्यों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया गया।
इस अवसर पर सभी हितधारकों ने सुरक्षित, स्वस्थ और कानूनी रूप से अनुपालनीय खनन कार्यप्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह कार्यशाला खनन उद्योग में सुरक्षा और श्रमिक हितों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।














