भ्रष्टाचार नक्सल खदान
अपराध राजनीति खेल समस्या स्वास्थ्य कार्यक्रम शिक्षा दुर्घटना सांस्कृतिक मनोरंजन मौसम कृषि ज्योतिष काम

मंत्री दीपक बिरूवा की पहल से टली पदयात्रा, अब एसीसी परिसर में होगी त्रिपक्षीय वार्ता

On: May 27, 2026 5:24 PM
Follow Us:
---Advertisement---

झींकपानी के मजदूरों और ग्रामीणों की आवाज सुनने पहुंचेंगे मंत्री, सांसद और विधायक

“एसीसी बचाओ संघर्ष समिति” ने कहा – प्लांट बंद हुआ तो बर्बाद हो जाएगी पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

झींकपानी स्थित एसीसी अदानी सीमेंट प्लांट में जारी शटडाउन और मजदूरों की छंटनी को लेकर बढ़ते जनआक्रोश के बीच मंत्री दीपक बिरूवा ने सराहनीय पहल करते हुए मजदूरों और ग्रामीणों की 29 मई को प्रस्तावित पदयात्रा को रुकवा दिया है। अब जिला उपायुक्त, सांसद, क्षेत्र के विधायक, एसीसी प्रबंधन, मजदूरों और ग्रामीणों के बीच एसीसी परिसर में ही त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित होगी।

“इतनी धूप में आने की जरूरत नहीं”

बताया जा रहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रखंड अध्यक्ष सोगा बुडीऊली, स्थानीय मुखिया गुरुचरण मुंडा और मजदूर प्रतिनिधियों ने 26 मई को मंत्री दीपक बिरूवा से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया। मजदूरों ने बताया कि एसीसी प्लांट में शटडाउन के नाम पर लगातार छंटनी की जा रही है और स्थानीय लोगों में प्लांट बंद होने की आशंका गहराने लगी है।
इस पर मंत्री दीपक बिरूवा ने मजदूरों और ग्रामीणों से कहा कि भीषण गर्मी में पैदल जिला मुख्यालय जाकर ज्ञापन देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे स्वयं पहल कर जिला उपायुक्त, सांसद जोबा मांझी, पश्चिम सिंहभूम के सभी विधायकों तथा एसीसी प्रबंधन के साथ मजदूरों और ग्रामीणों की सीधी वार्ता कराएंगे।

29 मई की पदयात्रा रद्द

मंत्री की पहल के बाद बुधवार सुबह जोड़ापोखर में मजदूरों और ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि 29 मई को प्रस्तावित पदयात्रा रद्द कर दी जाए। अब 31 मई रविवार को एसीसी प्रांगण में ही त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाएगी। इसके लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है।

शटडाउन से गहराया रोजगार संकट

गौरतलब है कि एसीसी अदानी सीमेंट प्लांट झींकपानी में बीते 30 अप्रैल से शटडाउन की प्रक्रिया चल रही है। मजदूरों का आरोप है कि शटडाउन के नाम पर धीरे-धीरे स्थानीय मजदूरों की छंटनी की जा रही है। प्लांट का पावर हाउस बंद कर दिया गया है, जबकि लोडिंग-अनलोडिंग और डिस्पैच कार्य भी पूरी तरह ठप है।
मजदूरों का कहना है कि प्लांट के मशीनरी पार्ट्स, स्टॉक में रखे कोयला, सेलेक और क्लिंकर को अन्य प्लांटों में भेजा जा रहा है। इससे लोगों के बीच यह डर गहराता जा रहा है कि प्लांट को स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी चल रही है। हालांकि अब तक कंपनी प्रबंधन की ओर से प्लांट बंद करने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

“यह सिर्फ कारखाना नहीं, हमारी पहचान है”

लगातार बैठकों में मजदूरों और ग्रामीणों ने भावुक स्वर में कहा कि झींकपानी की पहचान इस कारखाने से जुड़ी हुई है। आजादी से पहले स्थापित इस एसीसी प्लांट ने न जाने कितनी पीढ़ियों को रोजगार दिया और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। हजारों मजदूर, किसान, वाहन चालक, दुकानदार, ठेकेदार और छोटे व्यवसायी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसी प्लांट पर निर्भर हैं। यदि प्लांट बंद हुआ तो पूरे इलाके में बेरोजगारी, पलायन और आर्थिक संकट की भयावह स्थिति पैदा हो जाएगी।

“अपनी धरोहर को खत्म नहीं होने देंगे”

स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि आज वे चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियां उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। इसी सोच के साथ “एसीसी बचाओ संघर्ष समिति” का गठन किया गया है। समिति का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी आजीविका और क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर को खत्म नहीं होने देंगे।
अब सभी की नजर 31 मई को होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता पर टिकी है, जहां मजदूरों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्लांट और रोजगार बचाने को लेकर कोई ठोस समाधान निकलेगा।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment