57 परिवारों का संकट गहराया, विधायक से लगाई गुहार
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत पोखरपी पंचायत के बिचागुटू टोला में पेयजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। गाँव के करीब 250 की आबादी वाले 57 परिवार आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को 700 से 800 मीटर दूर स्थित एकमात्र कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी देने में असमर्थ साबित हो रहा है।

गाँव में जलसंकट की भयावह तस्वीर
बिचागुटू में पेयजल की व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो चुकी है। गाँव में मौजूद दो हैंडपंप पूरी तरह खराब पड़े हैं, जबकि एक हैंडपंप में पानी काफी नीचे होने के कारण उसे चलाना मुश्किल हो गया है। एक तालाब जरूर है, लेकिन वह पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है।
महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा मार
पानी की किल्लत का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। रोजाना उन्हें दूर-दराज से पानी ढोना पड़ता है, जिससे उनका अधिकांश समय इसी काम में बीत जाता है। बच्चों की पढ़ाई भी इससे प्रभावित हो रही है, क्योंकि कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय पानी लाने में लगे रहते हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा सीधा असर
असुरक्षित और अपर्याप्त जल स्रोतों के कारण गाँव में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। दूषित पानी पीने से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
पशुधन और खेती भी प्रभावित
पेयजल संकट का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुधन और कृषि कार्य भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। पशुओं के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, वहीं सिंचाई के अभाव में खेती भी प्रभावित हो रही है।
विधायक से लगाई गुहार
गाँव के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सोनाराम सिंकु को आवेदन देकर इस गंभीर समस्या के समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गाँव में जल्द से जल्द डीप बोरवेल की स्थापना की जाए, पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा सामुदायिक नल की व्यवस्था की जाए।
जल जीवन मिशन से जोड़ने की मांग
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि बिचागुटू गाँव को जल जीवन मिशन या अन्य सरकारी योजनाओं के तहत शामिल किया जाए, ताकि स्थायी रूप से पेयजल समस्या का समाधान हो सके।
ग्रामीणों की चेतावनी: अब और इंतजार नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उनका साफ कहना है कि पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए अब और इंतजार करना संभव नहीं है।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
इस गंभीर संकट के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक बिचागुटू के लोग इस बुनियादी सुविधा से वंचित रहेंगे।












