विजया-2 माइंस को मिली मंजूरी, 9 महीने बाद खुलेगा रोजगार का बंद दरवाजा; बेरोजगारों, ट्रक मालिकों और कारोबारियों में खुशी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा के हजारों बेरोजगार युवाओं, ट्रक मालिकों और छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। झारखंड सरकार ने देश की प्रमुख स्टील कंपनी Tata Steel को पश्चिम सिंहभूम स्थित विजया-2 आयरन ओर माइंस के संचालन की अनुमति दे दी है। लगभग नौ महीने से बंद पड़ी इस खदान के दोबारा चालू होने से सारंडा और बड़ाजामदा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में फिर से तेजी आने की उम्मीद जगी है।
खान निदेशक राहुल सिन्हा द्वारा सोमवार को जारी आदेश में पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद अब घाटकुड़ी मौजा स्थित रक्षित वन क्षेत्र की 383.20 एकड़ भूमि में लौह अयस्क खनन का रास्ता साफ हो गया है।

नौ महीने से ठप था रोजगार का पहिया
विजया-2 माइंस बंद होने के बाद सबसे ज्यादा मार सारंडा क्षेत्र के मजदूरों, ट्रक मालिकों, डंपर ऑपरेटरों और स्थानीय कारोबारियों पर पड़ी थी। हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए थे, जबकि सैकड़ों वाहन महीनों से खड़े-खड़े जंग खाने लगे थे।
बड़ाजामदा, गुवा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और आसपास के क्षेत्रों में ट्रांसपोर्टिंग, गैरेज, ढाबा, होटल और छोटे व्यापार लगभग ठप हो चुके थे। अब खदान के फिर शुरू होने से इन सभी क्षेत्रों में दोबारा रौनक लौटने की उम्मीद है।
ट्रक मालिकों और डंपर ऑपरेटरों में खुशी
खनन बंद होने के कारण वाहन मालिक बैंक की किस्त और मजदूरों का भुगतान तक नहीं कर पा रहे थे। कई ट्रक मालिक आर्थिक संकट में फंस गए थे। विजया-2 माइंस चालू होने की खबर के बाद अब ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि माइंस शुरू होते ही सैकड़ों ट्रकों और डंपरों का संचालन फिर शुरू होगा, जिससे ड्राइवर, हेल्पर और वाहन मालिकों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
हर साल 30 लाख टन लौह अयस्क खनन की क्षमता
विजया-2 आयरन ओर माइंस की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 30 लाख टन बताई जा रही है। इतनी बड़ी क्षमता वाली खदान के शुरू होने से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
जानकारी के अनुसार यह खदान पहले Usha Martin को 20 वर्षों के लिए आवंटित की गई थी। बाद में इसका हस्तांतरण Tata Steel Long Product के पक्ष में किया गया और बाद में Tata Steel ने इसका अधिग्रहण कर खनन कार्य शुरू किया था।
टाटा स्टील को मिलेगा कच्चे माल का बड़ा सहारा
खदान बंद होने के कारण टाटा स्टील को अपने संयंत्रों के लिए बाहर से लौह अयस्क मंगाना पड़ रहा था। इससे कंपनी की लॉजिस्टिक्स लागत लगातार बढ़ रही थी। अब विजया-2 माइंस शुरू होने से कंपनी को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त लौह अयस्क उपलब्ध होगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
विशेष रूप से जमशेदपुर और आसपास के स्टील प्लांटों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार के खजाने में आएंगे करोड़ों रुपये
खनन शुरू होने से झारखंड सरकार को भी हर महीने लगभग तीन से चार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इसमें रॉयल्टी, डीएमएफ (District Mineral Foundation) और एनएमईटी फंड शामिल हैं।
अनुमान है कि सालाना 35 से 50 करोड़ रुपये तक का राजस्व केवल इसी एक माइंस से सरकार को मिलेगा। इस राशि का उपयोग पश्चिम सिंहभूम जिले के विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
सारंडा की अर्थव्यवस्था में लौटेगी रफ्तार
खनन गतिविधियां बंद होने से सारंडा क्षेत्र की आर्थिक धड़कन लगभग थम सी गई थी। अब विजया-2 माइंस के फिर चालू होने से स्थानीय बाजारों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। छोटे दुकानदारों, होटल संचालकों, मजदूरों और ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को सीधा लाभ मिलेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार का यह फैसला केवल एक खदान को चालू करने का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे सारंडा क्षेत्र की आर्थिक जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की पहल है।














