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21 मई को 27 नक्सली करेंगे सरेंडर, 33 लाख के इनामी उग्रवादियों समेत 426 मामलों के आरोपी मुख्यधारा में लौटेंगे

On: May 21, 2026 8:31 AM
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झारखंड पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में 21 मई 2026 का दिन एक बड़े मोड़ के रूप में दर्ज होने जा रहा है। राज्य गठन के बाद पहली बार एक साथ 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण का फैसला लिया है। इनमें दर्जनों जवानों की हत्या, पुलिस मुठभेड़, लेवी वसूली, विस्फोट, आगजनी और हथियारबंद हमलों जैसी 426 नक्सली घटनाओं में शामिल उग्रवादी भी शामिल हैं।
झारखंड पुलिस मुख्यालय में 21 मई को आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में ये सभी नक्सली आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण करेंगे। सरेंडर करने वालों में 25 भाकपा माओवादी और दो जेजेएमपी संगठन के उग्रवादी शामिल हैं। इनमें आठ इनामी नक्सलियों पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
यह आत्मसमर्पण अभियान झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त ऑपरेशन की बड़ी सफलता मानी जा रही है। लगातार चल रहे अभियान, जंगलों में सुरक्षा बलों की बढ़ती घेराबंदी, सप्लाई लाइन टूटने और संगठन के कमजोर पड़ने के कारण बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया है।

हथियारों का जखीरा भी होगा पुलिस के हवाले

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और कारतूस भी सुरक्षा बलों को सौंपेगे। उन हथियारों में—
* एक इंसास एलएमजी
* पांच इंसास राइफल
* नौ एसएलआर
* एक बोल्ट एक्शन राइफल
* एक पिस्टल
* 31 मैगजीन
* 2987 राउंड जिंदा कारतूस
शामिल होगा।
इतनी बड़ी संख्या में हथियारों का एक साथ बरामद होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ है।

इन रैंक के नक्सली आज छोड़ेंगे संगठन

सरेंडर करने वालों में माओवादी संगठन के बड़े और सक्रिय सदस्य शामिल होंगे। इनमें—
* 07 विशेष क्षेत्र समिति सदस्य
* 07 एरिया कमांडर
* 13 सक्रिय कैडर
शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार संगठन के शीर्ष स्तर के कमांडरों के आत्मसमर्पण से पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी और रांची क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा।

123 मामलों वाला बड़ा माओवादी भी शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे चर्चित नाम सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल का है। गोइलकेरा निवासी इस विशेष क्षेत्र समिति सदस्य पर अकेले 123 मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है।
इसके अलावा गादी मुण्डा उर्फ गुलशन और नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा जैसे बड़े माओवादी नेताओं ने भी हथियार छोड़ने का फैसला लिया है। इन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सलियों की सूची
विशेष क्षेत्र समिति सदस्य

* करण तियू (गोइलकेरा, चाईबासा) – दो लाख का इनामी, 29 मामले
* गादी मुण्डा उर्फ गुलशन (बुंडू, रांची) – पांच लाख इनामी, 48 मामले
* नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया (अड़की, खूंटी) – पांच लाख इनामी, 38 मामले
* रेखा मुण्डा उर्फ जयंती (बुंडू, रांची) – पांच लाख इनामी, 18 मामले
* सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल (गोइलकेरा, चाईबासा) – पांच लाख इनामी, 123 मामले
* दर्शन उर्फ बिंजा हांसदा (हतनाबुरू, छोटानगरा, चाईबासा) – 14 मामले
* सुलेमान हांसदा उर्फ सुनीया हांसदा (हतनाबुरू, छोटानगरा, चाईबासा) – पांच लाख इनामी, 13 मामले

एरिया कमांडर रैंक के नक्सली

* बासुमती जेराई उर्फ बासू (धरनादिरी, किरीबुरू, चाईबासा) – एक लाख इनामी, 14 मामले
* बैजनाथ मुण्डा (तमाड़, रांची) – 04 मामले
* रघु कायम उर्फ गुणा (मुफस्सिल, चाईबासा) – 19 मामले
* किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका (टोंटो, चाईबासा) – 11 मामले
* राम दयाल मुण्डा (तमाड़, रांची) – 04 मामले

13 सक्रिय कैडर भी लौटेंगे मुख्यधारा में

इसके अलावा 13 सक्रिय कैडरों ने भी आत्मसमर्पण का निर्णय लिया है। इनमें—
* वंदना उर्फ शांति
* सुनिता सरदार
* डांगुर बोइपाई
* बसंती देवगम
* मुन्नीराम मुण्डा
* अनिशा कोड़ा उर्फ रानी
* सपना उर्फ सुरू कालुंडिया
* सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया
* बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह
* नुअस
* बुमली तियू
* निति माई उर्फ निति हेंब्रम
* लादू तिरिया
शामिल हैं।
इन सभी के खिलाफ चाईबासा, सरायकेला और आसपास के विभिन्न थानों में कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

सरेंडर से पहले परिजनों को रांची ले गई पुलिस

सारंडा के हतनाबुरू, छोटानागरा निवासी नक्सली दर्शन उर्फ बिंजा हांसदा और पांच लाख के इनामी सुलेमान हांसदा उर्फ सुनीया हांसदा, बासुमती जेराई उर्फ बासू (धरनादिरी, किरीबुरू, चाईबासा) के परिजनों को छोटानागरा और किरीबुरू पुलिस ने 20 मई की शाम ग्रामीणों की मदद से थाना बुलाया। रातभर उन्हें अपने संरक्षण में रखने के बाद 21 मई की सुबह पुलिस सभी को रांची लेकर रवाना हुई। तीनों नक्सलियों पर क्रमशः 14, 13 और 14 मामले दर्ज हैं।

दर्जनों जवानों की हत्या समेत कई बड़ी वारदातों में थे शामिल

सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सली सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी ब्लास्ट, लेवी वसूली, सड़क निर्माण कार्यों में बाधा, पुलिस कैंपों पर फायरिंग और दर्जनों जवानों की हत्या जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण से संगठन की अंदरूनी संरचना और नेटवर्क की महत्वपूर्ण जानकारी भी मिल सकेगी। इससे आने वाले दिनों में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में चल रहे अभियान को और मजबूती मिलेगी।

सारंडा और कोल्हान में टूट रही माओवादी पकड़

बीते कुछ वर्षों में सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान जंगलों में लगातार सुरक्षा बलों के अभियान चलाए गए। जंगलों में नए कैंप स्थापित किए गए, सड़क और मोबाइल नेटवर्क का विस्तार हुआ तथा ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की कोशिश की गई।
इसी का असर है कि अब माओवादी संगठन का प्रभाव लगातार कमजोर होता दिख रहा है। संगठन के भीतर भय और अविश्वास का माहौल बनने लगा है। कई सक्रिय सदस्य अब मुख्यधारा में लौटने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

पुलिस मुख्यालय में होगा भव्य सरेंडर कार्यक्रम

21 मई को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में होने वाले कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। कार्यक्रम में झारखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, सीआरपीएफ अधिकारी और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता भी दी जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जो नक्सली हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें सरकार की नीति के अनुसार पुनर्वास, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़

एक साथ 27 नक्सलियों का आत्मसमर्पण केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि झारखंड में बदलते हालात का बड़ा संकेत माना जा रहा है। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का दबदबा था, वहां अब सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह अभियान जारी रहा तो आने वाले समय में झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से माओवादी नेटवर्क पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

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