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ऑपरेशन “नवजीवन” से नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका। सारंडा-कोल्हान में माओवादियों का मनोबल टूटा, 25 हार्डकोर माओवादियों ने हथियारों के साथ किया सरेंडर;

On: May 21, 2026 2:03 PM
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JJMP के भी दो उग्रवादी मुख्यधारा में लौटे। बेला सरकार और एक ने बंगाल में, जबकि दो नक्सली तेलंगाना में किया सरेंडर 

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

सारंडा के हतनाबुरू निवासी कुख्यात नक्सली गुणा हंसदा भी सरेंडर करने के फिराक में

रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में झारखंड पुलिस को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगलों में सक्रिय भाकपा (माओवादी) संगठन के 25 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार और भारी मात्रा में गोलियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इनके साथ गुमला जिले में सक्रिय जेजेएमपी संगठन के दो उग्रवादियों ने भी सरेंडर किया।


पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस बयान के अनुसार, यह आत्मसमर्पण अभियान “ऑपरेशन नवजीवन” के तहत हुआ है। आत्मसमर्पण करने वालों में कई लाखों के इनामी नक्सली, शीर्ष कमांडर, एरिया कमेटी सदस्य तथा मारक दस्ता के सदस्य शामिल हैं।
महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के निर्देशन में झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर द्वारा लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादी संगठन अब टूट की स्थिति में पहुंच चुका है। पुलिस की बढ़ती दबिश, जंगलों में लगातार नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना तथा संगठन के अंदर शोषण और भय के माहौल ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया है।

वर्ष 2026 में नक्सलियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई

झारखंड पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक—
* 44 नक्सलियों की गिरफ्तारी
* 29 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
* 22 नक्सली मुठभेड़ में ढेर
हो चुके हैं।
सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अब तक 21 नए एडवांस कैंप लोकेशन (ACL) तथा फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थापित किए गए हैं। इन कैंपों के कारण अब सुरक्षा बल जंगलों के भीतर तक स्थायी रूप से पहुंच बना चुके हैं।

25 माओवादी कमांडरों ने छोड़ी बंदूक

आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादियों में—

1. गादी मुंडा उर्फ गुलशन मुंडा, पिता- सोमरा मुंडा, गांव- बारूहातु, थाना- बुंडू, जिला- रांची, पद- SZCM, इनाम- 5 लाख रुपये, मामले- चाईबासा 12, सरायकेला 12, रांची 4, खूंटी 20 — कुल 48 मामले, जमा हथियार- 5.56 एमएम इंसास राइफल
2. नागेन्द्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा उर्फ मुखिया उर्फ परास, पिता- स्व. सांडे मुंडा, गांव- हरादलामा, कोचा टोली, थाना- अड़की, जिला- खूंटी, पद- SZCM, इनाम- 5 लाख रुपये, मामले- चाईबासा 25, सरायकेला 13 — कुल 38 मामले, जमा हथियार- 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
3. रेखा मुंडा उर्फ जयंती, पिता- दल गोविंद सिंह मुंडा, गांव- बारूहातु, थाना- बुंडू, जिला- रांची, पद- SZCM, इनाम- 5 लाख रुपये, मामले- चाईबासा 17, सरायकेला 1 — कुल 18 मामले, जमा सामग्री- एक वॉकी-टॉकी
4. सागेन अंगरिया उर्फ देकोल उर्फ श्याम लाल अंगरिया, पिता- स्व. डागुर अंगरिया, गांव- सांगाजाटा, थाना- गोइलकेरा, जिला- पश्चिम सिंहभूम, चाईबासा, पद- SZCM, इनाम- 5 लाख रुपये, मामले- चाईबासा में 123 मामले दर्ज
विशेष : 15 मई 2026 को आत्मसमर्पण कर चुका था
5. दर्शन उर्फ बिंजा हांसदा, पिता- सुरनिया हांसदा, गांव- हतनाबुरु, थाना- छोटानागरा, जिला- पश्चिम सिंहभूम, पद- SZCM, मामले- चाईबासा में 14 मामले, जमा हथियार- 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
6. सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा उर्फ चंबरा, पिता- जुनू हांसदा, गांव- हतनाबुरु, थाना- छोटानागरा, जिला- पश्चिम सिंहभूम, पद-SZCM, इनाम- 5 लाख रुपये, मामले- चाईबासा में 13 मामले, जमा हथियार- 5.56 एमएम इंसास राइफल

ACM रैंक के नक्सलियों की पूरी सूची

7. कारण उर्फ डांगुर तियू, पिता- फाड़ तियू, गांव- सांगाजाटा, थाना- गोइलकेरा, जिला- पश्चिम सिंहभूम, चाईबासा, पद- ACM, इनाम- 2 लाख रुपये, मामले- चाईबासा में 29 मामले, जमा हथियार : इंसास एलएमजी
8. बैजनाथ मुंडा, पिता- दुर्गा मुंडा, गांव- हरबागढ़, थाना- तमाड़, जिला- रांची, पद- ACM, मामले- चाईबासा में 4 मामले, जमा हथियार- 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
9. बासुमती जेराई उर्फ बासु उर्फ सरस्वती, पिता- पियुष जेराई, गांव- धरनादिरि, थाना- किरीबुरू, जिला- पश्चिम सिंहभूम, पद- ACM, इनाम- 1 लाख रुपये, मामले- चाईबासा में 14 मामले, जमा हथियार, .303 राइफल
10. रघु कायम उर्फ गुणा, पिता- गोल्टू कायम, गांव- गिडुंग, थाना- मुफस्सिल, जिला- पश्चिम सिंहभूम, पद : ACM, मामले : चाईबासा में 19 मामले, जमा हथियार : 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
11. किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका, पिता : स्व. दिगम सिरका, गांव : कदालसोकोवा, थाना : टोंटो, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : ACM, मामले : चाईबासा में 11 मामले, जमा हथियार : 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
12. राम दयाल मुंडा, पिता : रामाय मुंडा, गांव : हारबा, थाना : तमाड़, जिला : रांची, पद : ACM, मामले : सरायकेला 3, चाईबासा 1,जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी

कैडर सदस्यों की विस्तृत सूची

13. बंदना उर्फ शांति, पिता, दातुन कोड़ा, पति : दर्शन, गांव : हाथीबुरू, थाना : गोइलकेरा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 2
जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी
14. सुनीता सरदार उर्फ बारी, पिता जगबंधु सरदार, पति : बेजनाथ मुंडा
गांव : रायजामा, थाना : खरसावां, जिला : सरायकेला-खरसावां, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 4, जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी
15. डांगुर बोयपाई उर्फ मुकेश, पिता : स्व. नंदू बोयपाई, गांव : हाथीबुरू, थाना : गोइलकेरा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 13
जमा हथियार : .303 राइफल
16. बसंती देवगम, पिता : सिनु देवगम, गांव : सरजोमबुरु, थाना : टोंटो, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 5, जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी
17. मुनीराम मुंडा, पिता बुधराम मुंडा, गांव : रोलाहातु, थाना : दलभंगा, जिला : सरायकेला-खरसावां, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 3, जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी
18. अनिशा कोड़ा उर्फ रानी, पिता : पांडू कोड़ा, गांव : तोड़ांगसाईं, टोला : कुईडा, थाना : गोइलकेरा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 8, जमा हथियार : 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
19. सपन उर्फ सुलु कालुंडिया, पिता : गोपी कालुंडिया, गांव : कंतोडिया, थाना : बड़ाजामदा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 6, जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी
20. सुरसी उर्फ दसमा कालुंडिया, गांव : कंतोडिया, थाना : बड़ाजामदा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 2, जमा हथियार : कंट्री मेड पिस्टल
21. बिरसा कोड़ा उर्फ हरि सिंह, पिता : पेरमा कोड़ा, गांव : बाइपी ससांग, थाना : गोइलकेरा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 21
जमा हथियार : 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
22. नुअस, गांव : मारांगपोंगा, थाना : छोटानागरा, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 3, जमा सामग्री : वॉकी-टॉकी
23. बुमली तियु उर्फ दामु चरण तियु, पिता : बिरजू तियु, गांव : सारजोमबुरु, बांदोडीह, थाना : राजनगर, जिला : सरायकेला-खरसावां, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 6, जमा हथियार : 5.56 एमएम इंसास राइफल
24. नीति माई उर्फ नीति हेम्ब्रम, पिता : नापो उर्फ गुमिदा हेम्ब्रम, गांव : तुम्बाहाका, थाना : टोंटो, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 5
जमा हथियार : 7.62 एमएम एसएलआर राइफल
25. लादू तिरिया, पिता : चरण तिरिया, गांव : सरजोमबुरु, थाना : टोंटो, जिला : पश्चिम सिंहभूम, पद : कैडर, मामले : चाईबासा 9, जमा हथियार : 7.62 एमएम एसएलआर राइफल

इन सभी ने कुल—
16 हथियार
27 मैगजीन
2857 जिंदा गोलियां
08 वॉकी-टॉकी
सुरक्षा बलों को सौंपे हैं।

कौन-कौन से हथियार हुए जमा

पुलिस मुख्यालय के अनुसार आत्मसमर्पण के दौरान जमा हथियारों में शामिल हैं—
* 5.56 एमएम इंसास एलएमजी – 01
* 5.56 एमएम इंसास राइफल – 04
* 7.62 एमएम एसएलआर – 09
* .303 एक्शन राइफल – 01
* कंट्री मेड पिस्टल – 01
जबकि भारी मात्रा में मैगजीन और कारतूस भी जमा किए गए।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में महिलाओं का शोषण, भय और लगातार हिंसा के कारण महिला कैडर संगठन छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।

सारंडा के हतनाबुरू  का नक्सली गुणा हंसदा भी सरेंडर करेगा !

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि छोटानागरा थाना अंतर्गत हतनाबुरु गांव निवासी कुख्यात नक्सली गुणा हंसदा भी सरेंडर करना चाह रहा है। वह अपने गांव के कुछ लोगों तक गोपनीय संदेश भेजा है। हालांकि वह अभी बड़े नक्सलियों के साथ दस्ता में है और छुप कर घने जंगलों में है। वह दस्ता से आना चाह रहा है लेकिन उसके नक्सली साथी उसे छोड़ नहीं रहे है। गुणा हंसदा कभी भी मौका देख भागकर आत्मसमर्पण की कोशिश करने की योजना बना रहा है। ग्रामीण भी चाह रहे हैं कि वो जल्द आत्मसमर्पण कर दे।

मिसिर बेसरा और असीम मंडल को करारा झटका

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले अधिकतर नक्सली कुख्यात केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी तथा असीम मंडल की टीम से जुड़े थे।
ये लोग सारंडा और कोल्हान के जंगलों के चप्पे-चप्पे से परिचित थे और लंबे समय से सुरक्षा बलों पर हमले, बारूदी सुरंग बिछाने, लेवी वसूली और हथियार आपूर्ति जैसे कार्यों में शामिल थे।
इनके आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर होना तय माना जा रहा है।

चाईबासा जिले के स्थानीय युवक बने थे नक्सली

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) तथा आसपास के जिलों के स्थानीय निवासी हैं।
इन युवाओं को माओवादी संगठन ने पहले बहला-फुसलाकर दस्ते में शामिल किया और बाद में इन्हें हथियार थमा दिए गए। कई युवकों को पुलिस विरोधी गतिविधियों में झोंक दिया गया।
अब यही युवा मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जो माओवादी संगठन के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है।

बंगाल और तेलंगाना में भी टूटा माओवादी नेटवर्क

झारखंड पुलिस की लगातार कार्रवाई के कारण पड़ोसी राज्यों में भी माओवादी दबाव में आ गए हैं।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार—

पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण

* समर दा उर्फ भाई पात्रा, रैंक : जोनल कमेटी सदस्य
* बेला सरकार उर्फ आशा दी, रैंक : रीजनल कमेटी सदस्य, इनाम : 15 लाख

तेलंगाना में आत्मसमर्पण

* विश्वनाथ उर्फ संतोष, रैंक : स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य, मामले : 13
* पूनम उर्फ वीणा, रैंक : रीजनल कमेटी सदस्य
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि माओवादी संगठन अब कई राज्यों में दबाव में है।

JJMP के दो उग्रवादियों ने भी छोड़ा हथियार

गुमला जिले में सक्रिय जेजेएमपी संगठन के दो उग्रवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया।
इनमें—
* सचिन बेक उर्फ यूजीन बेक, रैंक : SZC, इनाम : 5 लाख, मामले : 06, हथियार : इंसास राइफल
* श्रवण गोप, रैंक : ACM, मामले : 08
शामिल हैं।
इन दोनों ने 5.56 एमएम इंसास राइफल, चार मैगजीन और 130 गोलियां जमा कीं।

जंगलों में अब नहीं बचा सुरक्षित ठिकाना

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में पहले माओवादी सुरक्षित पनाहगाह बनाकर रहते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
ड्रोन निगरानी, लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन, कोबरा और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई तथा नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना ने नक्सलियों की आवाजाही सीमित कर दी है।
अब माओवादी दस्तों को भोजन, दवा और हथियार पहुंचाना भी कठिन हो गया है।

ग्रामीणों का बढ़ा पुलिस पर भरोसा

सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ ग्रामीणों का सहयोग भी बढ़ा है।
पहले जिन गांवों में माओवादी प्रभाव था, वहां अब ग्रामीण खुलकर पुलिस को सूचना दे रहे हैं। कई गांवों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंचने से भी लोगों का भरोसा सरकार की ओर बढ़ा है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि विकास और सुरक्षा की संयुक्त रणनीति से ही नक्सलवाद कमजोर हुआ है।

“मुख्यधारा में लौटें” : झारखंड पुलिस की अपील

झारखंड पुलिस ने शेष बचे माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा, लेवी और भय का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें।
पुलिस ने कहा कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, रोजगार प्रशिक्षण, आवास और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
अधिकारियों ने दावा किया कि आने वाले महीनों में और बड़े नक्सली कमांडर आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

सारंडा में माओवादियों की कमर टूटी

कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़ माने जाने वाले सारंडा में अब माओवादी संगठन तेजी से कमजोर हो रहा है। जिस इलाके में कभी सुरक्षा बलों का प्रवेश मुश्किल माना जाता था, वहां अब लगातार पुलिस कैंप खुल रहे हैं। सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क और सरकारी योजनाओं की पहुंच ने भी नक्सलियों की पकड़ खत्म कर दी है। 25 हार्डकोर माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि अब जंगलों में माओवादी संगठन का मनोबल टूट चुका है।

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