मुखिया अंजनी कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व का राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान, विकास के मॉडल के रूप में उभरी चिताँव पंचायत
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
रोहतास जिले के कोचस प्रखंड अंतर्गत चिताँव पंचायत ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली, जनहितकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन और समग्र विकास के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार समारोह 2025 के लिए चयनित प्रतिभागियों की सूची में चिताँव पंचायत के मुखिया अंजनी कुमार सिंह का नाम शामिल होना पूरे जिले और बिहार के लिए गौरव का विषय बन गया है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित समारोह में देशभर की उत्कृष्ट पंचायतों और जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाएगा। चिताँव पंचायत को ओवरऑल पीएआई 2.0 टॉपर ग्राम पंचायत की श्रेणी में स्थान मिलना इस बात का प्रमाण है कि पंचायत ने विकास के प्रत्येक मानकों पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

गांव की सरकार को बनाया विकास का इंजन
मुखिया अंजनी कुमार सिंह ने पंचायत की जिम्मेदारी संभालने के बाद विकास को केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने दिया। उन्होंने गांव की समस्याओं को समझते हुए योजनाओं को धरातल पर उतारने का अभियान चलाया।

सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए पंचायत को विकास की नई दिशा दी गई। पंचायत भवन से लेकर वार्ड स्तर तक पारदर्शी व्यवस्था स्थापित की गई, जिससे आम लोगों का विश्वास पंचायत प्रशासन पर बढ़ा।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आसान नहीं
देशभर में हजारों पंचायतें विभिन्न विकास योजनाओं के तहत कार्य करती हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही पंचायतें राष्ट्रीय पुरस्कार की सूची तक पहुँच पाती हैं। चिताँव पंचायत का चयन यह दर्शाता है कि पंचायत ने शासन, पारदर्शिता, जनभागीदारी और विकास के मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों के मूल्यांकन में केवल योजनाओं की संख्या नहीं बल्कि उनके प्रभाव, लाभुकों की संतुष्टि और स्थायी विकास को भी देखा जाता है। इन सभी क्षेत्रों में चिताँव पंचायत ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

अंजनी कुमार सिंह की कार्यशैली बनी पहचान
मुखिया अंजनी कुमार सिंह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने पंचायत के विकास को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर रखा। पंचायत के प्रत्येक टोले और गांव तक विकास योजनाओं का लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया।
ग्रामीण बताते हैं कि पंचायत में किसी भी समस्या को लेकर जाने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। चाहे वृद्धावस्था पेंशन की समस्या हो, आवास योजना का लाभ हो या पेयजल संकट, पंचायत प्रशासन समाधान के लिए सक्रिय दिखाई देता है।
यही कारण है कि पंचायत के लोगों के बीच मुखिया की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है और उनकी कार्यशैली की चर्चा अब जिले की सीमाओं से निकलकर राज्य स्तर तक पहुँच चुकी है।

स्वच्छता और जल संरक्षण पर विशेष फोकस
चिताँव पंचायत में स्वच्छता अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया। गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था, नालियों का निर्माण और कचरा प्रबंधन की दिशा में कई पहल की गईं।
इसके साथ ही जल संरक्षण को लेकर भी पंचायत ने सराहनीय कार्य किए। वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण और जल निकासी व्यवस्था में सुधार से ग्रामीणों को काफी लाभ मिला है।
इन प्रयासों का असर यह हुआ कि पंचायत में स्वच्छ वातावरण के साथ-साथ जल संकट की समस्या में भी कमी आई है।
महिलाओं को बनाया विकास की भागीदार
किसी भी पंचायत का वास्तविक विकास तब माना जाता है जब उसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़े। इस दिशा में चिताँव पंचायत ने उल्लेखनीय कार्य किया है।
स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में पंचायत प्रशासन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे निर्णय प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

युवाओं के लिए खुले नए अवसर
पंचायत के विकास मॉडल में युवाओं को भी विशेष महत्व दिया गया। खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगारोन्मुखी योजनाओं से युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया।
युवाओं को पंचायत स्तर पर विभिन्न गतिविधियों में शामिल कर सामाजिक नेतृत्व विकसित करने का कार्य भी किया गया। इससे पंचायत में सकारात्मक माहौल बना है और युवा विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार
चिताँव पंचायत में शिक्षा और स्वास्थ्य को विकास का आधार माना गया। विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में टीकाकरण, पोषण अभियान, स्वच्छता जागरूकता और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों के जीवन स्तर पर देखने को मिला है।
जनभागीदारी से मजबूत हुई पंचायत
अंजनी कुमार सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक पंचायत प्रशासन में जनभागीदारी बढ़ाना रहा है। ग्राम सभाओं को सक्रिय बनाया गया और विकास योजनाओं में लोगों की राय को महत्व दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है। लोगों को योजनाओं की जानकारी दी जाती है और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान का प्रयास किया जाता है।

विकास के हर पैमाने पर बेहतर प्रदर्शन
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार के लिए पंचायतों का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाता है। इनमें प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक समावेशन, डिजिटल पहल, स्वच्छता, जल संरक्षण और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव शामिल होता है।
चिताँव पंचायत ने इन सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह साबित किया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी और जनहितकारी हो तो गांवों का स्वरूप बदला जा सकता है।
रोहतास जिले का बढ़ा मान-सम्मान
चिताँव पंचायत के चयन से केवल पंचायत ही नहीं बल्कि पूरे रोहतास जिले का गौरव बढ़ा है। जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों और पंचायतों के लिए भी यह एक प्रेरणा का विषय है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान भविष्य में पंचायत के विकास कार्यों को और गति प्रदान करेगी तथा अन्य पंचायतें भी इससे सीख लेकर बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होंगी।

नई दिल्ली में होगा सम्मान समारोह
बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार समारोह में भाग लेने के लिए चयनित प्रतिनिधियों को नई दिल्ली भेजा जाएगा। इस अवसर पर देशभर की उत्कृष्ट पंचायतों के जनप्रतिनिधि एक मंच पर उपस्थित होंगे।
चिताँव पंचायत के मुखिया अंजनी कुमार सिंह की सहभागिता रोहतास जिले के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। ग्रामीणों और समर्थकों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल है।

चिताँव पंचायत बना ग्रामीण विकास का मॉडल
आज चिताँव पंचायत केवल एक पंचायत नहीं बल्कि ग्रामीण विकास के सफल मॉडल के रूप में उभर रही है। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी, पारदर्शिता और दूरदर्शी नेतृत्व ने इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
मुखिया अंजनी कुमार सिंह के नेतृत्व में चिताँव पंचायत जिस प्रकार विकास की नई इबारत लिख रही है, वह यह संदेश देती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और जनता का सहयोग मिले तो गांवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार समारोह में मिली यह पहचान न केवल चिताँव पंचायत की उपलब्धि है, बल्कि पूरे बिहार के ग्रामीण विकास मॉडल की सफलता का भी प्रतीक है।













