रिपोर्ट : शैलेश सिंह
झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद परिवहन विभाग ने लंबे समय से लंबित मोटरयान निरीक्षक (एमवीआई) नियुक्ति मामले में दो अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान कर दी है। परिवहन विभाग द्वारा 16 जून 2026 को जारी अलग-अलग कार्यालय आदेशों के तहत धनबाद निवासी अरुण कुमार दास तथा नवागढ़ (धनबाद) निवासी ज्योति लाल महतो को मोटरयान निरीक्षक (वेतन बैंड-2, लेवल-6) के पद पर नियुक्त किया गया है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर जारी हुआ नियुक्ति आदेश
परिवहन विभाग के अनुसार यह नियुक्ति झारखंड उच्च न्यायालय, रांची में लंबित दो अलग-अलग वादों में पारित न्यायिक आदेशों के अनुपालन में की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोनों अभ्यर्थियों की नियुक्ति झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के आधार पर की गई है।
अरुण कुमार दास की नियुक्ति Cont. Case (Civil) No.-999/2024 एवं W.P.(S) No.-4769/2019 में पारित आदेश के आलोक में की गई है, जबकि ज्योति लाल महतो को Cont. Case (Civil) No.-997/2024 एवं W.P.(S) No.-4864/2019 के आधार पर नियुक्ति दी गई है।
परिवीक्षा अवधि में रहेंगे दोनों अधिकारी
विभागीय आदेश के अनुसार दोनों नियुक्त अभ्यर्थी योगदान की तिथि से दो वर्षों की परिवीक्षा अवधि में रहेंगे। परिवीक्षा अवधि के दौरान उनका कार्य और आचरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर एक माह का नोटिस देकर सेवा समाप्त की जा सकती है।
30 दिनों के भीतर देना होगा योगदान
परिवहन विभाग ने निर्देश दिया है कि दोनों अभ्यर्थी आदेश निर्गत होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर परिवहन विभाग, झारखंड में अपना योगदान सुनिश्चित करें। निर्धारित अवधि में योगदान नहीं देने की स्थिति में नियुक्ति स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
चरित्र सत्यापन और प्रमाण पत्र जांच होगी अनिवार्य
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति पुलिस चरित्र सत्यापन, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र तथा शैक्षणिक एवं तकनीकी प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के अधीन होगी। यदि किसी दस्तावेज में त्रुटि या विसंगति पाई जाती है तो नियुक्ति तत्काल रद्द कर संबंधित अभ्यर्थी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एरियर और वरिष्ठता लाभ नहीं मिलेगा
कार्यालय आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन नियुक्तियों के फलस्वरूप दोनों अभ्यर्थियों को किसी प्रकार का एरियर, रेट्रोस्पेक्टिव वेतन, वरिष्ठता लाभ अथवा अन्य वित्तीय लाभ स्वतः देय नहीं होगा। इस संबंध में किसी भी दावे पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा अलग से निर्णय लिया जाएगा।
वर्षों पुराने विवाद का हुआ समाधान
मोटरयान निरीक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा यह मामला कई वर्षों से न्यायालय में लंबित था। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और अवमानना याचिकाओं की सुनवाई के बाद अंततः दोनों अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया है। इससे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है तथा परिवहन विभाग में रिक्त पदों को भरने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।














