इस बार पहले से अधिक भव्य होगा आयोजन, संस्कृति-संरक्षण और सामाजिक एकता पर दिया गया जोर
गुवा संवाददाता
आगामी विश्व आदिवासी दिवस को लेकर गुवा क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में गुवा रामनगर स्थित एसबीआई बैंक के पीछे अवस्थित आदिवासी क्लब परिसर में क्लब के सह सचिव मंगल बिरुवा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, आयोजन की तैयारी और समाज की व्यापक भागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य इस वर्ष आयोजित होने वाले विश्व आदिवासी दिवस समारोह को और अधिक भव्य, आकर्षक एवं ऐतिहासिक बनाने की रणनीति तैयार करना था। बैठक में मौजूद सदस्यों और गणमान्य लोगों ने एकजुट होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया।

पिछले वर्ष से अधिक भव्य होगा आयोजन : मंगल बिरुवा
बैठक को संबोधित करते हुए क्लब के सह सचिव मंगल बिरुवा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों का प्रतीक है। इसे केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि अपनी अस्मिता और परंपराओं के संरक्षण के संकल्प दिवस के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आयोजन पिछले वर्ष की तुलना में अधिक भव्य, आकर्षक और धूमधाम से किया जाएगा। इसके लिए सभी सदस्यों और क्षेत्रवासियों से सक्रिय सहयोग की अपील की गई।
हर गांव की भागीदारी जरूरी : प्रदीप सुरीन
क्लब के संरक्षक प्रदीप सुरीन ने गुवा क्षेत्र के सभी गांवों के आदिवासी समुदाय से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता ही इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत होगी।
उन्होंने कहा कि जब तक हर गांव और हर परिवार की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसे आयोजनों का उद्देश्य अधूरा रहेगा।
सामूहिक प्रयास से ही बनेगा यादगार आयोजन
क्लब की कोषाध्यक्ष श्रीमती द्रोपदी हेस्सा ने कहा कि किसी भी बड़े कार्यक्रम की सफलता आपसी सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयास पर निर्भर करती है। उन्होंने सभी सदस्यों से जिम्मेदारी के साथ अपने-अपने दायित्व निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस समाज के गौरव और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने का अवसर है।
सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी : कपलेश्वर दोंगो
बैठक में मौजूद समाजसेवी एवं गणमान्य कपलेश्वर दोंगो ने समाज में जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली में निहित है।
उन्होंने कहा—
“विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।”
गांव-गांव से जुटेंगे लोग, एकता का दिखेगा संदेश
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष कार्यक्रम में गुवा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक झांकियां, जनजागरूकता कार्यक्रम और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा भी आयोजन का हिस्सा होंगे।
इस अवसर पर गुवा पूर्वी पंचायत की मुखिया चांदमनी लागुरी सहित सुनीता सामड, मारग्रेट सिरका, जानो चातर, विमला तिरिया, सुमित्रा चातर, कमला पुरती, दारा सिंह चाम्पिया, डेबरा पुरती, बुधराम कन्डायबुरू, लंका पुरती एवं जगमोहन पुरती समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
संकल्प—संस्कृति, पहचान और अधिकारों की रक्षा
बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने विश्व आदिवासी दिवस को सफल बनाने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। यह भी तय किया गया कि कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता को और मजबूत किया जाएगा।
गुवा की यह बैठक साफ संकेत दे रही है कि इस बार विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता, अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना का बड़ा मंच बनने जा रहा है।














