बच्चों के हाथों में औजार नहीं, किताबें हों
रिपोर्ट : शैलेश सिंह / संदीप गुप्ता
नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत किरीबुरू पश्चिम की मुखिया पार्वती कीड़ों, मेघाहातुबुरु दक्षिण की मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो तथा बड़ाजामदा पंचायत की मुखिया पार्वती देवगम के नेतृत्व में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर अलग-अलग पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जनचेतना फैलाना और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए समाज को प्रेरित करना था।

बाल श्रम को बताया सामाजिक अभिशाप
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराना एक गंभीर सामाजिक अपराध है। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर श्रम में लगाना कानूनन दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का अधिकार है कि वह शिक्षा प्राप्त करे और सुरक्षित वातावरण में अपना भविष्य बनाए।
“बच्चा मजदूर दिखे तो स्कूल पहुंचाने में करें सहयोग”
कार्यक्रम के दौरान लोगों से अपील की गई कि यदि कहीं भी कोई बच्चा बाल श्रम करता हुआ दिखाई दे तो उसे काम पर लगाने के बजाय विद्यालय भेजने में सहयोग करें। समाज की सामूहिक भागीदारी से ही क्षेत्र को पूर्ण रूप से बाल श्रम मुक्त बनाया जा सकता है।
बाल श्रम उन्मूलन के साथ चला नशा मुक्ति अभियान
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति अभियान भी चलाया गया। महिलाओं एवं ग्रामीणों ने रैली निकालकर लोगों को बाल श्रम और नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। वक्ताओं ने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार और समाज दोनों के लिए घातक है तथा इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव बच्चों के भविष्य पर पड़ता है।

नशामुक्त और बाल श्रम मुक्त समाज बनाने की ली शपथ
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बाल श्रम और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक शपथ ग्रहण की। उन्होंने संकल्प लिया कि अपने गांव और पंचायत क्षेत्र में किसी भी बच्चे को मजदूरी करने के लिए मजबूर नहीं होने देंगे तथा शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देंगे।
बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण रहे मौजूद
इस अवसर पर उप मुखिया सुमन मुंडू, वार्ड सदस्य शानी हेस्सा, रीना दास सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं बड़ाजामदा में मीनाक्षी देवी, अस्थि सुरेन, कमला कुई, सरस्वती देवी, सुषमा लोहार, रायमणी देवी, संजू देवी, मुंगरी देवी, सुखमति बोबोंगा तथा अन्य ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।













