संवेदक संघ की शिकायत मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंची, डीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
जिले के खनन विभाग (डीएमओ कार्यालय) की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। रॉयल्टी मद में कटौती की गई राशि की बैंक डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) नहीं लिए जाने के मामले में संवेदक संघ द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) में शिकायत किए जाने की सूचना के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब इस प्रकरण को लेकर जिला परिषद, एनआरईपी और अन्य कार्यकारी एजेंसियों में भी चर्चा तेज हो गई है।

27 अप्रैल 2026 से पहले की योजनाओं की राशि लौटाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार 27 अप्रैल 2026 से पूर्व की पूर्ण एवं चालू योजनाओं के विपत्रों के आधार पर रॉयल्टी मद में कटौती की गई राशि को जिला खनन कार्यालय द्वारा वापस लौटाया जा रहा है। इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व पर सीधा असर पड़ रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब रॉयल्टी की राशि सरकारी खाते में जमा होनी चाहिए, तो उसे वापस किस नियम और किस आदेश के तहत लौटाया जा रहा है?
एक ही मामले में दोहरा रवैया, उठ रहे गंभीर सवाल
सूत्रों का दावा है कि जहां कई संवेदकों की रॉयल्टी राशि जमा नहीं ली जा रही है और वापस कर दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ संवेदकों की राशि स्वीकार भी की गई है। एक ही नियम में अलग-अलग व्यवहार होने से पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं न कहीं गंभीर अनियमितता हो रही है।

सरकार को दोहरी राजस्व हानि का आरोप
संवेदकों का आरोप है कि जिला खनन कार्यालय की कार्यशैली के कारण सरकार को दो स्तर पर राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
* पहला, 27 अप्रैल 2026 से पहले की योजनाओं में रॉयल्टी मद की कटौती राशि जमा नहीं लेकर उसे वापस किया जा रहा है।
* दूसरा, जिले में अवैध बालू, पत्थर और लौह अयस्क के खनन एवं कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
सीएमओ तक पहुंची शिकायत
संवेदक सूत्रों के अनुसार, झामुमो के एक वरिष्ठ नेता के माध्यम से मुख्यमंत्री सचिवालय में जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) कार्यालय की कार्यशैली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। यदि शिकायत पर जांच होती है, तो कई अहम तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
कार्यकारी एजेंसियां भी परेशान
रॉयल्टी की राशि लौटाए जाने से जिला परिषद, एनआरईपी और अन्य कार्यकारी एजेंसियां भी असमंजस की स्थिति में हैं। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है और वे पूरे मामले को उपायुक्त मनीष कुमार के समक्ष रखने पर विचार कर रही हैं।
ईमानदार डीसी के कार्यकाल में कैसे हो रही ऐसी लापरवाही?
जिले के उपायुक्त मनीष कुमार की पहचान एक ईमानदार और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में रही है। ऐसे में उनके अधीनस्थ कार्यालय में इस तरह की कथित लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

सबकी नजर अब जिला प्रशासन पर
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री सचिवालय में पहुंची शिकायत के बाद जिला प्रशासन और खनन विभाग इस पूरे मामले पर क्या कदम उठाते हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो रॉयल्टी राशि लौटाने और राजस्व हानि के पूरे मामले से पर्दा उठ सकता है।














