रिपोर्ट: शैलेश सिंह
बरसात का मौसम शुरू होते ही सारंडा के सुदूरवर्ती गांवों में जहरीले सांपों का आतंक बढ़ गया है। जंगलों से निकलकर कोबरा, करैत (चित्ती) और अन्य विषैले सांप लगातार घरों और झोपड़ियों की ओर पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। कई ग्रामीण इन सांपों के काटने से अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि समय पर इलाज और अस्पताल तक पहुंचने की सुविधा नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।

जंगल से घरों तक पहुंच रहे विषैले सांप
लगातार बारिश के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में घरों और झोपड़ियों में घुस रहे हैं। कच्चे मकान, झाड़-झंखाड़ और खुले आंगन इनके छिपने के लिए अनुकूल स्थान बन रहे हैं।
जमीन पर सोने की मजबूरी, बढ़ा खतरा
सारंडा के अधिकांश गरीब ग्रामीण चारपाई के बजाय जमीन पर बिस्तर बिछाकर सोते हैं। ऐसे में रात के समय सांपों के संपर्क में आने और डंसने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
छोटानागरा में करैत सांप मिलने से मचा हड़कंप
22 जुलाई की रात छोटानागरा गांव में एक जहरीला करैत (चित्ती) सांप एक घर में घुसने की कोशिश कर रहा था। ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए उसे मार दिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
इलाज और एंबुलेंस की कमी बनी बड़ी समस्या
सारंडा के कई गांव स्वास्थ्य सुविधाओं से काफी दूर हैं। सांप काटने की घटना होने पर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में रास्ते की कठिनाइयों और इलाज में देरी के कारण लोगों की मौत हो जाती है।
कैसे करें बचाव
* घर और आसपास झाड़-झंखाड़ की नियमित सफाई रखें।
* रात में टॉर्च का उपयोग करके ही बाहर निकलें।
* जहां तक संभव हो जमीन पर सोने के बजाय चारपाई का उपयोग करें।
* दरवाजों और खिड़कियों के नीचे की खुली जगह बंद रखें।
* घर में सांप दिखने पर उसे पकड़ने की कोशिश न करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
* सांप काटने पर झाड़-फूंक में समय न गंवाएं, तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।

ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात के मौसम में सर्पदंश प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, एंबुलेंस सेवा सुलभ कराई जाए तथा गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जाए। इससे समय रहते लोगों की जान बचाई जा सकती है।










