वित्त विभाग के निर्देश के बाद बदली व्यवस्था, जिला परिषद चाईबासा में मचा प्रशासनिक भूचाल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग ने आखिरकार अपनी पूर्व की व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। विभाग ने वित्त विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि निम्नतर वेतनमान वाले अभियंता को उच्चतर वेतनमान के पद पर बनाए रखना नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी के साथ राज्य के सभी जिलों में ऐसी नियुक्तियों को समाप्त करने तथा पूर्व व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के अधिसूचित कार्यपालक अभियंता को जिला अभियंता का दायित्व सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
इस आदेश के बाद पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिला परिषद में पदस्थापित जिला अभियंता धीरेन्द्र कुमार की नियुक्ति सबसे अधिक चर्चा में है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस आदेश के बाद उन्हें जिला अभियंता के पद से हटना पड़ा है। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विभाग ने बदली अपनी पुरानी व्यवस्था
पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आदेश में सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि पूर्व व्यवस्था के अनुसार जिले में पदस्थापित ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के अधिसूचित कार्यपालक अभियंता को जिला अभियंता का प्रभार सौंपते हुए इसकी सूचना विभाग को भेजी जाए।
विभागीय जानकारों का मानना है कि यह आदेश वित्त विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है, जिससे लंबे समय से चली आ रही विसंगति को दूर करने का प्रयास किया गया है।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की जड़ जिला परिषद चाईबासा में जिला अभियंता के पद पर डिप्लोमा धारक नवप्रोन्नत सहायक अभियंता धीरेन्द्र कुमार की तैनाती को लेकर रही। आरोप लगाया गया कि वे निम्नतर वेतनमान के अधिकारी होते हुए भी उच्चतर वेतनमान वाले पद पर कार्य कर रहे थे।
यही मुद्दा धीरे-धीरे प्रशासनिक और कानूनी विवाद का रूप ले बैठा।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
जिला परिषद सदस्य लालमुनि पूर्ति ने इस नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध बताते हुए झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ पद पर कनिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति सेवा नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ है।
मामला न्यायालय में लंबित रहने के दौरान यह मुद्दा राज्य स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया।
वित्त विभाग के निर्देश ने बदला पूरा खेल
इसी बीच झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया कि निम्नतर वेतनमान वाले अधिकारियों को उच्चतर वेतनमान के पदों से हटाया जाए।
वित्त विभाग के इस आदेश के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। इसके अनुपालन की मांग करते हुए जिला परिषद सदस्य लालमुनि पूर्ति ने पंचायती राज विभाग के सचिव को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
सूत्रों के अनुसार इसी पत्र और वित्त विभाग के निर्देशों के बाद पंचायती राज विभाग ने नई अधिसूचना जारी की।
दस जिला परिषद सदस्यों ने भी खोला था मोर्चा
सूत्रों के अनुसार धीरेन्द्र कुमार की नियुक्ति को लेकर पहले भी जिला परिषद के दस सदस्यों ने सामूहिक रूप से विभाग और जिला प्रशासन को शिकायत भेजी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नियमों की अनदेखी कर उन्हें जिला अभियंता बनाया गया है। सदस्यों ने इस नियुक्ति को तत्काल निरस्त करने की मांग की थी।

लालमुनि पूर्ति के संघर्ष की चर्चा
विभागीय हलकों में यह चर्चा है कि इस पूरे मामले को लगातार उठाने में जिला परिषद सदस्य लालमुनि पूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पहले उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की, फिर वित्त विभाग के आदेश का हवाला देते हुए पंचायती राज विभाग को पत्र लिखा। सूत्रों का दावा है कि लगातार दबाव के कारण ही विभाग को अपनी व्यवस्था बदलनी पड़ी।
हालांकि इस संबंध में विभाग ने अपने आदेश में किसी व्यक्ति के प्रयास का उल्लेख नहीं किया है।
राज्यभर में होगा असर
पंचायती राज विभाग के आदेश का असर केवल चाईबासा तक सीमित नहीं रहने वाला है।
आदेश के अनुसार जिन-जिन जिला परिषदों में निम्नतर वेतनमान वाले अभियंता उच्चतर वेतनमान के पदों पर कार्यरत हैं, उन्हें हटाकर नियमों के अनुरूप नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सेवा नियमों के पालन में एकरूपता आएगी और भविष्य में ऐसे विवादों की संभावना कम होगी।
सेवा नियमों पर फिर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि यदि नियुक्ति नियमों के विरुद्ध थी तो संबंधित अधिकारी को इतने लंबे समय तक उस पद पर कैसे बनाए रखा गया?
क्या नियुक्ति के समय सेवा नियमों की जांच नहीं की गई थी? यदि हुई थी तो फिर नियमों की अनदेखी क्यों की गई? इन सवालों के जवाब अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।
अब उपायुक्तों पर जिम्मेदारी
पंचायती राज विभाग ने अब सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि वे पूर्व व्यवस्था के अनुसार जिला अभियंता की नियुक्ति सुनिश्चित करें और इसकी सूचना विभाग को भेजें।
इससे साफ है कि सरकार अब इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई के पक्ष में नहीं है।
आगे क्या होगा?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन विभागीय आदेश का अनुपालन कितनी तेजी से करता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि उच्च न्यायालय में लंबित मामले पर इस नए आदेश का क्या प्रभाव पड़ता है।
यदि सभी जिलों में इस आदेश का सख्ती से पालन होता है तो यह राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।

नियमों की जीत या व्यवस्था की हार?
पंचायती राज विभाग के ताजा आदेश ने यह संदेश जरूर दिया है कि वित्त विभाग के निर्देशों की अनदेखी अब संभव नहीं है। वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी बना हुआ है कि जिस व्यवस्था को अब गलत मानकर बदला जा रहा है, वह आखिर इतने समय तक लागू कैसे रही?
फिलहाल विभागीय आदेश के बाद चाईबासा जिला परिषद सहित पूरे राज्य में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर आदेश के पूर्ण अनुपालन और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।













