लिखित समझौते के पालन का दावा नहीं होने से भड़का आक्रोश, 18 सीएसआर गांवों के बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
गुवा/सारंडा। पश्चिमी सिंहभूम के गुवा स्थित रंजाबुरु खदान में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया ने घोषणा की है कि यदि स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों की लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त 2026 से सेल (BSL) गुवा खदान में खनन, ट्रांसपोर्टिंग, रेलवे रेक लोडिंग सहित सभी कार्यों को अनिश्चितकालीन रूप से शांतिपूर्ण ढंग से बंद कराया जाएगा। समिति का कहना है कि पूर्व में हुए लिखित समझौतों के बावजूद आज तक किसी भी प्रमुख मांग को पूरा नहीं किया गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

जामकुंडिया बाजार में हुई निर्णायक बैठक, आंदोलन की रणनीति तय
शुक्रवार को जामकुंडिया बाजार परिसर में मानकी लागुड़ा देवगम की अध्यक्षता तथा मुखिया राजू सांडिल की उपस्थिति में 18 सीएसआर गांवों के मानकी, मुंडा, पंचायत प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, समिति पदाधिकारी एवं ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से 10 अगस्त से अनिश्चितकालीन बंदी शुरू करने का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद मानकी लागुड़ा देवगम ने बताया कि आंदोलन एवं बंदी की सूचना संबंधी पत्र उपायुक्त, गुवा प्रबंधन, संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तथा राज्य सरकार के संबंधित विभागों को भेज दिया गया है।
समिति का आरोप—तीन बार भरोसा मिला, लेकिन रोजगार नहीं
समिति के नेताओं का कहना है कि गुवा खदान के अधीन कार्यरत मां सरला प्रा. वर्क द्वारा स्थानीय प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवकों को रोजगार देने के बजाय बाहरी मजदूरों से काम कराया जा रहा है।
उनके अनुसार इसी मुद्दे को लेकर पहली बार 23 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक रंजाबुरु खदान बंद किया गया था। आंदोलन के दौरान तत्कालीन राजस्व, भूमि सुधार एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा, अनुमंडल पदाधिकारी जगन्नाथपुर, प्रखंड विकास पदाधिकारी नोवामुंडी, गुवा के मुख्य महाप्रबंधक तथा कंपनी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिखित समझौता हुआ था। इसी आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
समिति का दावा है कि दो महीने बीतने के बाद भी स्थानीय प्रभावित गांवों के एक भी युवक को रोजगार नहीं मिला, जिसके कारण 9 मई 2026 को दूसरी बार आंदोलन करना पड़ा। उस समय भी प्रशासन एवं मंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद आंदोलन स्थगित किया गया, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
“रोज 2-3 रेक खनिज निकल रहा, फिर भी स्थानीय बेरोजगार उपेक्षित”
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि रंजाबुरु खदान से प्रतिदिन लगभग दो-तीन रेक लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन हो रहा है, लेकिन खदान से सबसे अधिक प्रभावित 18 सीएसआर गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। इससे ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो खनन, ट्रांसपोर्टिंग और रेलवे रेक लोडिंग का कार्य पूरी तरह बंद कराया जाएगा।
ये हैं आंदोलन की चार प्रमुख मांगें
सारंडा विकास समिति ने अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है—
* 18 सीएसआर गांवों के 1800 स्थानीय बेरोजगार युवकों (प्रत्येक गांव से 100) को खतियान एवं मानकी-मुंडा की अनुशंसा के आधार पर रोजगार दिया जाए।
* रेलवे साइडिंग में लोडिंग का कार्य सारंडा विकास समिति को दिया जाए।
* रंजाबुरु खदान से रेलवे साइडिंग तक ट्रांसपोर्टिंग का कार्य समिति को आवंटित किया जाए।
* रंजाबुरु खदान में पानी के टैंकर से सड़क पर छिड़काव का कार्य समिति को दिया जाए।
इसके अलावा गुवा खदान में सप्लाई कार्य तथा नोटशीट के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में भी प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवकों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
“लिखित समझौता आज तक कागजों में कैद”
मानकी लागुड़ा देवगम एवं मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि 3 मार्च 2026 को हुए लिखित समझौते में कंपनी ने मांग संख्या 1 एवं 4 को तत्काल पूरा करने तथा 2 एवं 3 पर आवश्यक अनुमति (सीटीओ) मिलने के बाद समिति से वार्ता कर समाधान निकालने का भरोसा दिया था। लेकिन समिति का आरोप है कि आज तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों का विश्वास टूट गया है।
प्रशासन और प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती
10 अगस्त से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन बंदी की घोषणा के बाद गुवा क्षेत्र में एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय रहते प्रशासन, सेल प्रबंधन और कंपनी प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक वार्ता नहीं होती है तो रंजाबुरु खदान में उत्पादन, परिवहन और रेलवे रेक लोडिंग प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, इस संबंध में सेल प्रबंधन और मां सरला प्रा. वर्क की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
बैठक में ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
बैठक में मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल, मुंडा जामदेव चांपिया, कुशू देवगम, बुधराम सिद्धू, राजेश टोपनो, जानुम सिंह चेरोवा, लेबेया देवगम, मंगल कुम्हार, देवेंद्र देवगम, पंचायत समिति सदस्य रामेश्वर चांपिया, जगदीश कोड़ा सहित 18 गांवों के दर्जनों ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं समिति के सदस्य उपस्थित थे।











