प्रबंधन बोला—ग्रामसभा से सूची दें, दिसंबर तक 50 बेरोजगारों को रोजगार; आंदोलनकारी बोले—पहले लिखित समझौता लागू हो
रिपोर्ट : शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता
गुवा। सारंडा विकास समिति जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले सेल की गुवा खदान अंतर्गत रांजाबुरु खदान में सोमवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी के बीच गुवा सेल प्रबंधन ने खदान से प्रभावित सभी 18 गांवों के मुंडा-मानकी को वार्ता के लिए बुलाया। हालांकि, आर्थिक नाकेबंदी में शामिल विभिन्न गांवों के मुंडा-मानकी, लागुड़ा देवगम और मुखिया राजू सांडिल समेत आंदोलन से जुड़े प्रमुख ग्रामीण प्रतिनिधि वार्ता में शामिल नहीं हुए। वहीं, कुछ अन्य गांवों के मुंडाओं के बैठक में शामिल होने की बात कही जा रही है।
प्रबंधन के अधिकारी सूत्रों के अनुसार, गुवा के सीजीएम चंद्रभूषण कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में महाप्रबंधक (एचआर) प्रवीण कुमार सिंह, महाप्रबंधक (शिक्षा) अनर्व डे, महाप्रबंधक (ईएंडएल) डॉ. टीसी आनंद, उप महाप्रबंधक (सीएसआर) अनिल कुमार के अलावा मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त अधिकारी तथा कई गांवों के मुंडा और एक मानकी शामिल हुए।

दिसंबर तक 50 बेरोजगारों को रोजगार देने का दावा
प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि 50 बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार देने को लेकर पूर्व में सहमति बनी थी और प्रबंधन आज भी इस निर्णय पर कायम है। इसके लिए सभी मुंडाओं से अपने-अपने गांवों में ग्रामसभा आयोजित कर बेरोजगार ग्रामीणों का चयन करने को कहा गया है। ग्रामसभा के पैड पर चयनित बेरोजगारों की सूची गुवा थाना प्रभारी के पास जमा करनी होगी। गुवा थाना प्रभारी को इस मामले में नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। थाना स्तर से सभी गांवों की सूची प्रबंधन को भेजे जाने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर चयनित बेरोजगारों को दिसंबर तक रोजगार से जोड़ने की बात प्रबंधन ने कही है।
अधिकारी ने बताया कि कुछ बेरोजगारों ने ग्रामसभा के माध्यम से आवेदन देने के बजाय व्यक्तिगत आवेदन जमा किया है। ऐसे आवेदनों पर थाना की मुहर भी नहीं है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि रोजगार के लिए आवेदन ग्रामसभा के माध्यम से ही दिया जाना चाहिए। बैठक में इन्हीं मुद्दों पर ग्रामीण प्रतिनिधियों और मुंडाओं के साथ चर्चा की गई।
प्रबंधन की ओर से आंदोलन कर रहे दूसरे पक्ष के ग्रामीण प्रतिनिधियों को भी वार्ता में शामिल होने का आग्रह किए जाने की बात कही गई, लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए।

आंदोलनकारियों ने कहा—लिखित समझौता लागू होने तक जारी रहेगा आंदोलन
इधर, 10 अगस्त से अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी शुरू करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से वार्ता के लिए सूचना जरूर भेजी गई थी, लेकिन उनकी मुख्य मांग पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, पूर्व में मंत्री दीपक बिरुवा, एसडीओ, बीडीओ, गुवा सीजीएम समेत अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में मां सरला कंपनी के अधिकृत अधिकारी के साथ लिखित समझौता हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उस लिखित समझौते को पूरी तरह लागू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि एक ही मामले में बार-बार वार्ता और अलग-अलग समझौते का क्या औचित्य है। उनका आरोप है कि यदि मंत्री, एसडीओ, बीडीओ और सीजीएम की मौजूदगी में हुआ पूर्व का लिखित समझौता लागू नहीं होता है तो यह ग्रामीणों के साथ छलावा और धोखा माना जाएगा।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी एक ही मांग है—पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू किया जाए। उनका कहना है कि समझौता लागू होते ही आर्थिक नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी।














