सुबह 6 से शाम 6 बजे तक उत्पादन व माल ढुलाई रहेगी ठप, समझौते को धरातल पर उतारने की मांग
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले सारंडा के विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं द्वारा सेल, गुवा की रांजाबुरु खदान में 10 अगस्त की सुबह से शुरू किए गए अनिश्चितकालीन आंदोलन के स्वरूप में बदलाव किया गया है। अब ग्रामीण प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 12 घंटे आंदोलन स्थल पर रहकर खदान का उत्पादन एवं माल ढुलाई ठप कराएंगे।
यह आंदोलन मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल सहित विभिन्न गांवों के मुंडाओं के नेतृत्व में चल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि पूर्व में हुए समझौते को जब तक धरातल पर लागू नहीं किया जाता, तब तक आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
मुखिया राजू सांडिल ने बताया कि आंदोलन के पहले दिन सोमवार को सुबह से शाम करीब 5:30 बजे तक ग्रामीण एवं महिलाएं आंदोलन स्थल पर डटी रहीं। इसके बाद सभी ग्रामीण आंदोलन स्थल से वापस अपने-अपने घर लौट गए। उन्होंने कहा कि मंगलवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पुनः आंदोलन स्थल पर रहकर रांजाबुरु खदान का उत्पादन एवं माल ढुलाई ठप कराया जाएगा। यह सिलसिला मांगें पूरी होने तक लगातार जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि आंदोलन के नए स्वरूप की जानकारी खदान की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ जवानों और सेल गुवा प्रबंधन को दे दी गई है।

रात में महिलाओं को आंदोलन स्थल पर रखना उचित नहीं : राजू सांडिल
आंदोलन के स्वरूप में बदलाव के संबंध में मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि लगातार हो रही बारिश और रात के समय आंदोलन स्थल पर महिलाओं को रखना उचित नहीं है। रात में जंगल क्षेत्र में विषैले जीव-जंतुओं की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे ग्रामीणों की जान को खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि सारंडा रिजर्व वन क्षेत्र में रांजाबुरु खदान में सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही खनन कार्य एवं भारी वाहनों के परिचालन की अनुमति होती है। ऐसे में रात के समय आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों के रहने का कोई औचित्य नहीं है।
मुखिया ने सीआईएसएफ एवं सेल प्रबंधन से आग्रह किया कि रात के समय रांजाबुरु खदान में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि अथवा भारी वाहनों का परिचालन वन नियमों के विरुद्ध न कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण दिन के समय आंदोलन स्थल पर रहकर उत्पादन एवं माल ढुलाई को प्रभावित करेंगे और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।












